ममता बनर्जी की पार्टी ने बदला नाम और चुनाव चिह्न, बागी गुट को मिला ‘लिफाफा’

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी से जुड़े घटनाक्रम में पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न बदल गया है, जबकि बागी गुट को नया निशान मिला है।

नई दिल्ली: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर चल रहे विवाद के बीच चुनाव आयोग ने दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिन्ह आवंटित कर दिए हैं। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITMC)’ नाम और फुटबॉल खिलाड़ी का चुनाव चिन्ह मिला है। वहीं, अरूप रॉय के नेतृत्व वाले गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और लिफाफा चुनाव चिन्ह दिया गया है।

इससे पहले चुनाव आयोग ने दोनों गुटों को मूल ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और पार्टी के पारंपरिक ‘फूल और घास’ वाले चुनाव चिन्ह के इस्तेमाल से रोक दिया था। यह फैसला पश्चिम बंगाल के आगामी उपचुनावों को देखते हुए अंतरिम व्यवस्था के तौर पर लिया गया है।

दोनों गुटों को देनी थी तीन-तीन पसंद

चुनाव आयोग ने दोनों गुटों को नए नाम और चुनाव चिन्ह के लिए तीन-तीन विकल्प देने को कहा था। इसके बाद आयोग ने उपलब्ध विकल्पों में से दोनों गुटों के लिए अलग पहचान तय की।

आयोग ने कहा कि मूल पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह के इस्तेमाल पर रोक तब तक जारी रहेगी, जब तक दोनों पक्षों के दावों पर अंतिम फैसला नहीं हो जाता।

क्या है पूरा विवाद?

TMC में यह विवाद पार्टी के संगठन और नेतृत्व को लेकर उठे दावों के बाद सामने आया है। बागी गुट की ओर से पार्टी के संगठनात्मक ढांचे और नेतृत्व के अधिकार को लेकर सवाल उठाए गए हैं, जबकि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाला गुट इन दावों को स्वीकार नहीं करता।

चुनाव आयोग ने कहा है कि दोनों पक्ष खुद को वास्तविक TMC बताते हैं और इस विवाद पर अंतिम फैसला लेने में समय लगेगा। आगामी उपचुनावों की प्रक्रिया को प्रभावित होने से बचाने के लिए फिलहाल दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिन्ह दिए गए हैं।

उपचुनाव में दिखेगी नई पहचान

अब आगामी उपचुनावों में ममता बनर्जी का गुट AITMC और फुटबॉल खिलाड़ी के चिन्ह के साथ मैदान में उतरेगा, जबकि अरूप रॉय गुट डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस और लिफाफा चिन्ह के साथ चुनाव लड़ेगा।

यह व्यवस्था फिलहाल अंतरिम है। चुनाव आयोग के अंतिम फैसले के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि TMC के मूल नाम और पारंपरिक चुनाव चिन्ह पर अंतिम अधिकार किस पक्ष को मिलता है।

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