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मनु भाकर–वैभव सूर्यवंशी विवाद ने खोली भारत के खेल सिस्टम की सच्चाई

भारत में खेल संस्कृति को लेकर एक बड़ा सवाल उठ खड़ा हुआ है। डबल स्वर्ण ओलंपिक मेडलिस्ट मनु भाकर से मीडिया इंटरेक्शन के दौरान 15 साल के क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी के बारे में पूछा गया। इस पर सोशल मीडिया पर जमकर बहस छिड़ गई।

सवाल यह है कि जब 16 साल की मनु भाकर ने 2018 में मेक्सिको में ISSF वर्ल्ड कप में गोल्ड जीता था, तब क्या किसी ने विराट कोहली या रोहित शर्मा से मनु के बारे में पूछा था? जवाब है नहीं। तो फिर मनु से क्रिकेट के बारे में क्यों पूछा जाए?

मनु भाकर की उम्र अभी 24 साल है। वो दो ओलंपिक मेडल जीत चुकी हैं। दिल्ली में नेशनल राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया की 75वीं सालगिरह के कार्यक्रम में उनसे उनकी शूटिंग की बजाय क्रिकेट पर सवाल पूछा गया।

भारत में ओलंपिक खेलों की चर्चा सिर्फ ओलंपिक के दौरान होती है। बाकी समय हर बात क्रिकेट के इर्द-गिर्द घूमती रहती है।

सोशल मीडिया पर लोगों ने इस बात को सही पहचाना। फैंस ने कहा कि मनु भाकर के अपने फेडरेशन के इवेंट में उनसे दूसरे खेल पर सवाल पूछना सही नहीं है।

अगर भारत सच में एक मल्टी-स्पोर्ट देश बनना चाहता है, तो बदलाव सोच से शुरू होना चाहिए। जब तक किसी शूटिंग वर्ल्ड कप की उतनी ही चर्चा नहीं होगी जितनी IPL मैच की होती है, तब तक यह दोहरा मापदंड जारी रहेगा। एक शूटर को उतनी ही इज्जत मिलनी चाहिए जितनी एक क्रिकेटर को मिलती है।

मनु भाकर और वैभव सूर्यवंशी को लेकर जो विवाद छिड़ा, उसने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है — क्या भारत कभी सच में एक खेल राष्ट्र बन पाएगा?

मनु भाकर ने ओलंपिक में मेडल जीता, लेकिन उन्हें वो सम्मान नहीं मिला जो मिलना चाहिए था। दूसरी तरफ वैभव सूर्यवंशी क्रिकेट में चमके और पूरा देश उनके पीछे दीवाना हो गया। यही फर्क सब कुछ बयां करता है।

भारत में क्रिकेट को जो इज्जत मिलती है, वो किसी दूसरे खेल को नहीं मिलती। शूटिंग, कुश्ती, बैडमिंटन — इन खेलों के खिलाड़ी मेडल लाते हैं, लेकिन उनकी चर्चा जल्दी खत्म हो जाती है। जब तक हम सिर्फ क्रिकेट को पूजते रहेंगे और बाकी खेलों को नजरअंदाज करते रहेंगे, भारत एक असली खेल राष्ट्र नहीं बन सकता। खिलाड़ियों को सम्मान चाहिए, सिर्फ तालियां नहीं।

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