महाराष्ट्र की राजनीति में नगर निगम चुनावों से पहले पाला बदलने की प्रक्रिया तेज हो चुकी है। राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) को मुंबई में एक बड़ा झटका लगा है। मनसे के वरली विभाग के प्रमुख और राज ठाकरे के करीबी माने जाने वाले संतोष धुरी ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया है। धुरी के इस अचानक फैसले ने मुंबई नगर निगम (BMC) चुनाव के सियासी माहौल को और गर्म कर दिया है।
संतोष धुरी के दलबदल के पीछे मुख्य कारण सीट बंटवारे को लेकर उनकी गहरी नाराजगी है। उन्होंने सीधे तौर पर राज ठाकरे के नेतृत्व वाली मनसे पर पुराने, वफादार और जमीनी कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया है। धुरी माहिम विधानसभा के वार्ड नंबर 194 से मनसे के मजबूत दावेदार माने जा रहे थे, लेकिन गठबंधन की राजनीति के चलते यह अहम सीट शिवसेना (उद्धव गुट) को सौंप दी गई। धुरी का दर्द यह भी था कि मराठी बहुल इलाकों में भी मनसे को प्राथमिकता न देकर गठबंधन सहयोगी को अहमियत दी गई, जिसके बाद उन्होंने बीजेपी में शामिल होने का फैसला किया।
मुंबई बीजेपी अध्यक्ष अमित साटम ने संतोष धुरी का पार्टी में स्वागत किया और कहा कि बीजेपी को उनके अनुभव का लाभ मिलेगा। साटम ने दावा किया कि अब दोनों ठाकरे बंधुओं (राज और उद्धव) का जनाधार कमजोर हो चुका है, इसलिए वे अपना राजनीतिक अस्तित्व बचाने के लिए एक साथ आए हैं। मुंबई के 227 वार्डों के लिए होने जा रहे इन चुनावों में कुल 2,516 उम्मीदवार मैदान में हैं। इन चुनावों को देश की आर्थिक राजधानी में अब प्रतिष्ठा की लड़ाई के तौर पर देखा जा रहा है।
गौरतलब है कि 2017 के बीएमसी चुनावों में शिवसेना को 84 सीटें, बीजेपी को 82 सीटें और कांग्रेस को 31 सीटें मिली थीं। इस बार मनसे के एक मजबूत नेता का पाला बदलना, सीट बंटवारे को लेकर हुई निराशा, और बीजेपी के आक्रामक तेवर मुंबई की राजनीति में कई नए समीकरण बनाते दिख रहे हैं।
संतोष धुरी के इस दलबदल ने मुंबई नगर निगम चुनाव में मनसे की रणनीति पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि क्या मनसे की यह टूट बीएमसी की चुनावी तस्वीर को बदल पाएगी और क्या बीजेपी इस सियासी दांव का पूरा फायदा उठा पाएगी।









