नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है, लेकिन खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है। चीन ने सीमा के पास बनी एक बड़ी बैरियर झील को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है। आशंका है कि आने वाले तीन दिनों में झील में पानी का स्तर तेजी से बढ़ सकता है, जिससे इसके टूटने का खतरा पैदा हो गया है।
नेपाल में भोटेकोसी नदी और उसके आसपास आई अचानक बाढ़ ने बड़े पैमाने पर जान-माल को नुकसान पहुंचाया है। इस आपदा के बाद अब नेपाल-चीन सीमा क्षेत्र में एक और संभावित खतरे ने चिंता बढ़ा दी है। चीन के जल संसाधन मंत्रालय के मुताबिक, छोछेन खोला और पुरेपू त्सांगपो नदियों के संगम के पास एक बड़ी बैरियर झील बन गई है।
जानकारी के मुताबिक, गुरुवार सुबह तक इस झील में करीब 20 लाख घन मीटर पानी जमा हो चुका था और झील के ओवरफ्लो होने की स्थिति बताई गई है। अगले तीन दिनों में इसमें करीब 30 लाख घन मीटर अतिरिक्त पानी आने का अनुमान है। ऐसे में झील के टूटने का जोखिम काफी बढ़ गया है।
नेपाल में फ्लैश फ्लड से भारी तबाही
26 अगस्त को नेपाल के रसुवा क्षेत्र में अचानक आई फ्लैश फ्लड ने भारी तबाही मचाई। बताया गया कि भोटेकोसी नदी की सहायक नदी ल्हेन्डे का प्रवाह हिमस्खलन के कारण बाधित हो गया था। इसके बाद अचानक पानी का तेज बहाव नीचे की ओर आया और नेपाल-चीन सीमा के पास स्थित तिमुरे समेत कई इलाकों को प्रभावित किया।
इस घटना की खास बात यह रही कि उस समय इलाके में बारिश नहीं हो रही थी। अचानक आई बाढ़ के कारण लोगों को संभलने का ज्यादा मौका नहीं मिला। बाढ़ के तेज बहाव ने सड़क, पुल और कई दूसरी जरूरी सुविधाओं को नुकसान पहुंचाया।
अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के मुताबिक, इस आपदा में सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है और बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं। नेपाल और तिब्बत में राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है।
जयशंकर ने की हाई लेवल समीक्षा बैठक
नेपाल में बिगड़े हालात को देखते हुए भारत सरकार भी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने विदेश सचिव, विदेश मंत्रालय की टीम और काठमांडू तथा बीजिंग में मौजूद भारतीय राजदूतों के साथ विशेष समीक्षा बैठक की।
बैठक में नेपाल में राहत और बचाव अभियान के साथ-साथ वहां मौजूद भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर चर्चा की गई। विदेश मंत्रालय नेपाल सरकार और संबंधित अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है।
भारत ने भेजी राहत सामग्री
भारत ने नेपाल में राहत और बचाव कार्यों के लिए सहायता भेजना शुरू कर दिया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर के मुताबिक, बुधवार को 10 टन मानवीय सहायता की पहली खेप भेजी गई थी। इसके बाद गुरुवार को भारत ने 37.5 टन राहत सामग्री की दूसरी खेप भी रवाना की।
इस सहायता में बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित लोगों के लिए जरूरी राहत सामग्री शामिल है। भारत नेपाल में फंसे लोगों की स्थिति पर भी लगातार नजर रख रहा है।
अगले तीन दिन क्यों हैं बेहद अहम?
चीन की ओर से जारी चेतावनी के बाद अब अगले तीन दिन बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। अगर बैरियर झील में पानी का दबाव बढ़ता है और झील टूटती है, तो नीचे की ओर बसे इलाकों में अचानक पानी का तेज बहाव पहुंच सकता है।
इसी वजह से नेपाल और चीन के अधिकारी संभावित खतरे पर नजर बनाए हुए हैं और राहत एवं बचाव तैयारियों को मजबूत किया जा रहा है। हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर, भूस्खलन और अचानक आने वाली बाढ़ का खतरा पहले से ही गंभीर बना हुआ है।
फिलहाल नेपाल में राहत और बचाव अभियान जारी है और चीन की बैरियर झील पर भी लगातार निगरानी रखी जा रही है। आने वाले कुछ दिन इस क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहने वाले हैं।