Nepal Flood Alert: नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के बाद हालात अभी सामान्य भी नहीं हुए थे कि एक बार फिर बड़े सैलाब का खतरा मंडराने लगा है। नुवाकोट में प्रशासन ने ताजा बाढ़ की चेतावनी जारी की है। लोगों से नदी किनारे के इलाकों को तुरंत खाली कर सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की जा रही है। चेतावनी के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
30 मिनट में फिर आ सकता है सैलाब
नेपाल के नुवाकोट में एक बार फिर बाढ़ का अलर्ट जारी किया गया है। स्थानीय प्रशासन की ओर से लोगों को सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश दिए गए हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, चेतावनी में आने वाले करीब 30 मिनट में तेज बाढ़ आने की आशंका जताई गई। इसके बाद नदी किनारे बसे इलाकों में लोगों के बीच दहशत फैल गई। प्रशासन और सुरक्षा बलों ने लोगों को वहां से हटाना शुरू कर दिया।
धुंडे बाजार समेत प्रभावित इलाकों में पुलिस और प्रशासन की टीमें लोगों को नदी से दूर ले जाती नजर आईं। लाउडस्पीकर के जरिए घर और दुकानें खाली करने की अपील भी की गई।
तिब्बत में बनी झील से बढ़ा खतरा
इस नए खतरे की बड़ी वजह तिब्बत में बनी एक अवरोधक झील (Barrier Lake) को बताया जा रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, भूस्खलन और मलबे के कारण बनी झील से पानी बाहर निकलने लगा है। इससे नीचे की ओर बहने वाली नदियों में अचानक जलस्तर बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है। चीन के जल संसाधन मंत्रालय ने भी इस स्थिति को लेकर आपात प्रतिक्रिया शुरू की है।
नदियों का यह जल तंत्र आगे नेपाल की भोटेकोशी नदी से जुड़ता है। ऐसे में तिब्बत में पानी के अचानक बढ़ने का सीधा असर नेपाल के निचले इलाकों पर पड़ सकता है।
पहले से तबाह नुवाकोट पर फिर संकट
नुवाकोट उन इलाकों में शामिल है, जहां हाल की भोटेकोशी-त्रिशूली बाढ़ ने भारी तबाही मचाई थी।
कई सड़कें और पुल पहले ही क्षतिग्रस्त हैं। राहत और बचाव अभियान जारी है। ऐसे में दोबारा तेज बाढ़ आने की आशंका ने प्रशासन और स्थानीय लोगों की चिंता और बढ़ा दी है।
यानी जिन इलाकों में लोग पहली आपदा के बाद अपने घरों और दुकानों को संभालने की कोशिश कर रहे थे, वहां अब एक और सैलाब का खतरा खड़ा हो गया है।
35 पुल और 45 सस्पेंशन ब्रिज पहले ही बह चुके
नेपाल में आई पिछली बाढ़ ने बुनियादी ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 35 पुल और 45 सस्पेंशन ब्रिज बह चुके हैं।
इसके अलावा 13 जलविद्युत परियोजनाओं को नुकसान पहुंचा है और कई वाहन भी तेज बहाव की चपेट में आए हैं। नेपाली सेना ने प्रभावित इलाकों से 250 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाला है। हालांकि, कई लोग अब भी लापता हैं, जिनमें भारतीय नागरिक भी शामिल हैं।
रेस्क्यू ऑपरेशन पर भी असर
नए बाढ़ खतरे का असर राहत और बचाव अभियान पर भी पड़ा है। जिस इलाके में पहले से रेस्क्यू ऑपरेशन चल रहा था, वहां पानी बढ़ने की आशंका के कारण सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है।
ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, भूस्खलन से बनी झील के ओवरफ्लो होने के बाद बचाव दलों को कुछ इलाकों से पीछे हटना पड़ा है। इससे लापता लोगों की तलाश और राहत पहुंचाने की चुनौती और बढ़ गई है।
हिमालयी क्षेत्र में लगातार बढ़ रहा खतरा
नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ के पीछे हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर या बर्फ-चट्टान के टूटने से पैदा हुए मलबे और पानी को संभावित कारण माना जा रहा है। इस घटना ने नदियों के बहाव को अचानक बदल दिया और बड़े पैमाने पर तबाही मचाई।
अब तिब्बत में बनी अस्थायी झील और उसके बढ़ते जलस्तर ने एक नई चिंता पैदा कर दी है। विशेषज्ञों और अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि पानी का दबाव कब और कितनी तेजी से नीचे की ओर बढ़ेगा।
लोगों से सतर्क रहने की अपील
फिलहाल प्रशासन लोगों को नदी किनारे जाने से बचने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दे रहा है। पुलिस और सेना की टीमें लगातार प्रभावित इलाकों में निगरानी कर रही हैं।
नेपाल में एक आपदा के बाद दूसरी संभावित बाढ़ ने हालात को बेहद संवेदनशील बना दिया है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि जिन इलाकों में सड़कें और पुल पहले ही टूट चुके हैं, वहां दोबारा बाढ़ आने पर राहत और बचाव पहुंचाना बेहद मुश्किल हो सकता है।
फिलहाल लोगों से अपील की जा रही है कि प्रशासन की चेतावनी को गंभीरता से लें, नदी किनारे से दूर रहें और किसी भी अफवाह के बजाय आधिकारिक निर्देशों का पालन करें।