नई दिल्ली: झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के खिलाफ छात्रों का आंदोलन लगातार जारी है। विधानसभा घेराव के दौरान पुलिस कार्रवाई और छात्रों पर लाठीचार्ज के मुद्दे ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। बीजेपी जहां पूरे मामले की CBI जांच की मांग कर रही है, वहीं कांग्रेस की चुप्पी को लेकर पार्टी के नेता राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे पर निशाना साध रहे हैं। बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने कांग्रेस नेतृत्व पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे पर झारखंड के छात्रों के मुद्दे पर चुप रहने का आरोप लगाया। निशिकांत दुबे ने कहा कि अगर कांग्रेस को दिल्ली के छात्रों की चिंता है तो झारखंड में आंदोलन कर रहे छात्रों की आवाज क्यों नहीं उठाई जा रही है।
‘खरगे-राहुल गांधी को डूब मरना चाहिए’
निशिकांत दुबे ने कांग्रेस नेताओं पर हमला बोलते हुए कहा कि मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी को झारखंड का पिछड़ापन, गरीबी और भ्रष्टाचार दिखाई नहीं दे रहा है। उन्होंने कहा कि जिस तरह झारखंड के छात्र सड़कों पर आंदोलन कर रहे हैं और अधिकारियों का रवैया सामने आया है, उस पर कांग्रेस को आवाज उठानी चाहिए। बीजेपी सांसद ने आरोप लगाया कि कांग्रेस झारखंड में छात्रों के आंदोलन को लेकर दोहरा रवैया अपना रही है। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों को छात्रों के मुद्दे पर राजनीति से ऊपर उठकर उनकी मांगों का समर्थन करना चाहिए।
हेमंत सोरेन सरकार पर भी निशाना
निशिकांत दुबे ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सरकार पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के मामले में CBI जांच की मांग दोहराते हुए सवाल किया कि राज्य सरकार केंद्रीय एजेंसी से जांच कराने से क्यों बच रही है। उन्होंने एक आरोपी के मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े एक अधिकारी के यहां से पकड़े जाने का दावा करते हुए कहा कि जांच आगे बढ़ने पर मामला मुख्यमंत्री और राज्य के शीर्ष अधिकारियों तक पहुंच सकता है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
‘राहुल गांधी जिन्ना से भी बदतर नेता’
बीजेपी सांसद ने अपने बयान में राहुल गांधी पर बेहद तीखा हमला करते हुए उन्हें ‘जिन्ना से भी बदतर’ नेता तक कह दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस उन मुद्दों पर ज्यादा सक्रिय रहती है जहां बीजेपी का विरोध राजनीतिक रूप से उसके लिए फायदेमंद होता है। निशिकांत दुबे के इस बयान के बाद झारखंड के छात्र आंदोलन को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है। वहीं, छात्रों की मांगों और भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की जांच को लेकर राज्य सरकार पर भी दबाव बढ़ता जा रहा है।