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पद्मश्री अशोक सिंह का गाजीपुर में सम्मान: बासमती क्रांति से देश को मिला ₹50,000 करोड़ का निर्यात

गाजीपुर में पद्म श्री कृषि वैज्ञानिक अशोक सिंह का सम्मान समारोह, जिन्होंने बासमती चावल की उन्नत किस्में विकसित कीं।

गाजीपुर के लिए यह अत्यंत गर्व का क्षण है। गणतंत्र दिवस पर प्रतिष्ठित पद्मश्री पुरस्कार के लिए नामित किए गए कृषि वैज्ञानिक डॉ. अशोक कुमार सिंह को हाल ही में उनके गृह जनपद गाजीपुर में सम्मानित किया गया। शहर के एक गेस्ट हाउस में आयोजित समारोह में स्थानीय लोगों ने चावल की उन्नत किस्मों को विकसित करने में उनके 35 वर्षों के अभूतपूर्व योगदान के लिए उनका जोरदार अभिनंदन किया।

डॉ. अशोक कुमार सिंह मूल रूप से गाजीपुर के बरहट गांव के निवासी हैं। उन्होंने अपनी शुरुआती शिक्षा मलिकपुरा इंटर कॉलेज से पूरी की, जिसके बाद उन्होंने दिल्ली से पीएचडी की डिग्री हासिल की। इस सम्मान समारोह में लोगों का प्यार देखकर वे काफी अभिभूत और प्रसन्न दिखाई दिए।

बासमती क्रांति की कहानी

कृषि वैज्ञानिक डॉ. अशोक सिंह ने इस अवसर पर अपनी यात्रा साझा करते हुए बताया कि वह पिछले 35 वर्षों से बासमती धान की नई किस्मों के विकास पर लगातार काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि पहले बासमती की पुरानी किस्में 160 दिनों की लंबी अवधि की होती थीं, जिससे फसल अक्सर गिर जाती थी और पैदावार में भारी कमी आती थी।

डॉ. सिंह के अनुसार, स्वामीनाथन की अध्यक्षता में गठित एक टीम ने बासमती की नई प्रजातियों की खोज शुरू की। इसी प्रयास के परिणामस्वरूप, 1989 में पूसा बासमती और उसके बाद 1121 जैसी क्रांतिकारी किस्में विकसित की गईं। वर्तमान में, ये उन्नत प्रजातियाँ लगभग 30 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में उगाई जा रही हैं।

किसानों की आत्मनिर्भरता में वृद्धि

डॉ. अशोक सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि नई किस्मों ने किसानों की आर्थिक स्थिति को पूरी तरह से बदल दिया है। उन्होंने बताया कि ये प्रजातियाँ न केवल कम समय में तैयार हो जाती हैं, बल्कि इनसे प्रति हेक्टेयर 60 से 70 क्विंटल तक रिकॉर्ड उपज मिलती है।

उनके शोध का प्रभाव केवल स्थानीय किसानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देता है। डॉ. सिंह ने बताया कि बासमती की नई किस्मों के कारण ही भारत प्रतिवर्ष 50,000 करोड़ रुपये का चावल निर्यात करता है, जिससे किसानों की संपन्नता और देश की आत्मनिर्भरता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

डॉ. अशोक सिंह के कृषि क्षेत्र में किए गए इन महत्वपूर्ण और दूरगामी योगदानों को देखते हुए ही भारत सरकार ने उन्हें पद्म श्री पुरस्कार के लिए नामित किया है, जिसे जल्द ही राष्ट्रपति के हाथों उन्हें प्रदान किया जाएगा।

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