नई दिल्ली: पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था एक बार फिर बढ़ते कर्ज के दबाव में दिखाई दे रही है। स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान (SBP) की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, देश का कुल सार्वजनिक कर्ज बढ़कर करीब 83.6 ट्रिलियन पाकिस्तानी रुपये यानी लगभग 83.6 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। पिछले कुछ वर्षों में कर्ज में तेज बढ़ोतरी ने पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
पाकिस्तान पर कितना है कर्ज?
रिपोर्ट के मुताबिक, जून 2026 के अंत तक पाकिस्तान का घरेलू कर्ज करीब 59.44 ट्रिलियन पाकिस्तानी रुपये पहुंच गया था। वहीं, विदेशी कर्ज का बोझ करीब 24.20 ट्रिलियन रुपये रहा।
दोनों को मिलाने पर पाकिस्तान का कुल कर्ज करीब 83.6 ट्रिलियन रुपये हो जाता है। पिछले चार वर्षों में इसमें करीब 75 फीसदी की बढ़ोतरी बताई जा रही है।
कर्ज के जाल में क्यों फंस रहा पाकिस्तान?
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था लंबे समय से राजकोषीय घाटे, महंगाई, कम विदेशी मुद्रा भंडार और बढ़ते ब्याज भुगतान जैसी चुनौतियों से जूझ रही है। सरकार को पुराने कर्ज का ब्याज और मूलधन चुकाने के लिए लगातार नए कर्ज का सहारा लेना पड़ता है।
इस वजह से अर्थव्यवस्था पर कर्ज का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। सरकार की आमदनी का बड़ा हिस्सा कर्ज की सर्विसिंग और ब्याज भुगतान में चला जाता है, जिससे विकास और सामाजिक योजनाओं के लिए उपलब्ध संसाधन सीमित हो जाते हैं।
IMF और वर्ल्ड बैंक पर भी निर्भरता
पाकिस्तान अपनी वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF), वर्ल्ड बैंक और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से सहायता और कर्ज लेता रहा है। इसके अलावा देश के घरेलू बैंकों और वित्तीय संस्थानों से भी सरकार की उधारी लगातार बढ़ी है।
हालांकि हाल के समय में टैक्स कलेक्शन में सुधार हुआ है, लेकिन सरकारी खर्च अभी भी बड़ा बना हुआ है। प्रशासनिक खर्च, सब्सिडी और कर्ज पर ब्याज भुगतान सरकार की वित्तीय स्थिति पर दबाव डाल रहे हैं।
सरकार ने क्या कदम उठाए?
आर्थिक दबाव के बावजूद पाकिस्तान सरकार ने कर्ज के बोझ को कम करने की दिशा में कुछ कदम उठाए हैं। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान सरकार ने करीब 2.9 ट्रिलियन रुपये के कर्ज का भुगतान किया।
इसके अलावा पाकिस्तान का कर्ज-से-जीडीपी अनुपात करीब 75 फीसदी से घटकर 68.5 फीसदी बताया गया है। यह अर्थव्यवस्था के लिए कुछ राहत का संकेत जरूर है, लेकिन कुल कर्ज का बढ़ता आकार अब भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।
क्या पाकिस्तान दिवालिया हो सकता है?
बढ़ता कर्ज अपने आप में किसी देश के दिवालिया होने का प्रमाण नहीं है। किसी देश की वास्तविक वित्तीय स्थिति इस बात पर निर्भर करती है कि वह अपने कर्ज की समय पर अदायगी, ब्याज भुगतान और विदेशी मुद्रा जरूरतों को कितना संभाल पाता है।
पाकिस्तान के सामने फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती यही है कि वह लगातार बढ़ती कर्ज जरूरतों के बीच अपनी अर्थव्यवस्था को स्थिर रखे। अगर राजस्व बढ़ाने, खर्च नियंत्रित करने और विदेशी मुद्रा स्थिति सुधारने में सफलता नहीं मिली, तो आने वाले समय में कर्ज का बोझ पाकिस्तान के लिए और बड़ी मुश्किल पैदा कर सकता है।