प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष सितंबर 2026 में एक महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में सामने आए हैं। 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभालने के बाद उन्होंने 2014 में देश के प्रधानमंत्री का पद संभाला। जून 2026 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भी उनके लगातार 25 वर्षों तक सरकार के प्रमुख के रूप में सार्वजनिक जीवन में रहने के पड़ाव का उल्लेख किया था।
इन वर्षों में उनकी राजनीति और सरकार के कामकाज से जुड़े कई प्रमुख मुद्दे राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में रहे हैं। इनमें गरीब कल्याण, बुनियादी सुविधाएं, डिजिटल तकनीक, स्वच्छता, महिला सशक्तीकरण, आत्मनिर्भरता, राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेश नीति और सांस्कृतिक विरासत जैसे विषय शामिल हैं।
संकट के समय मानवीय सहायता और भारतीय नागरिकों की वापसी
कोरोना महामारी के दौरान भारत ने अपने नागरिकों के लिए स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा से जुड़े बड़े स्तर पर कार्यक्रम चलाए। इसके साथ ही विभिन्न देशों को दवाइयों, वैक्सीन और अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराने की पहल भी की गई।
युद्ध और संकटग्रस्त क्षेत्रों में फंसे भारतीय नागरिकों को वापस लाने के लिए भी कई अभियान चलाए गए। यूक्रेन से भारतीय विद्यार्थियों की वापसी सहित अलग-अलग संकटों के दौरान भारतीय नागरिकों को सुरक्षित स्वदेश लाने के प्रयास किए गए। इन अभियानों के साथ भारत ने विदेशों में फंसे अपने नागरिकों की निकासी को विदेश नीति और कांसुलर कार्रवाई का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया।
राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ नीति
मोदी सरकार के कार्यकाल में राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई प्रमुख राजनीतिक और सुरक्षा मुद्दों में रही है। उरी हमले के बाद 2016 में सर्जिकल स्ट्राइक और पुलवामा आतंकी हमले के बाद 2019 में बालाकोट एयर स्ट्राइक भारत की सुरक्षा नीति के महत्वपूर्ण घटनाक्रम रहे।
2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया। प्रधानमंत्री मोदी ने संसद में इस अभियान को आतंकवाद के खिलाफ भारत की प्रतिक्रिया के रूप में प्रस्तुत किया। सरकार ने इसे रक्षा आत्मनिर्भरता और रणनीतिक स्वायत्तता से भी जोड़ा है।
BRICS के मंच पर भारत की भूमिका
सितंबर 2026 में नई दिल्ली में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी भारत ने की। सम्मेलन में वैश्विक शासन में सुधार, बहुपक्षवाद, आर्थिक सहयोग, सतत विकास और ग्लोबल साउथ की भूमिका जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। नई दिल्ली घोषणा में BRICS देशों ने अधिक प्रतिनिधित्व वाले और सुधारित बहुपक्षीय ढांचे की आवश्यकता पर जोर दिया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने BRICS सत्र में ग्लोबल साउथ को वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में अधिक प्रतिनिधित्व देने की बात रखी। उन्होंने कहा कि ग्लोबल साउथ को केवल नियमों का पालन करने वाला नहीं, बल्कि नियम बनाने में भूमिका निभाने वाला पक्ष होना चाहिए।
BRICS सम्मेलन के दौरान भारत ने विभिन्न देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय बातचीत भी की। इन बैठकों में व्यापार, ऊर्जा, सुरक्षा, तकनीक और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा हुई।
गरीब कल्याण और बुनियादी सुविधाओं पर जोर
मोदी सरकार की नीतियों में गरीब और वंचित वर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाएं प्रमुख रही हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना, प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना, पीएम किसान सम्मान निधि, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, उज्ज्वला योजना और आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं के जरिए आवास, खाद्य सुरक्षा, कृषि सहायता, रसोई गैस और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बढ़ाने का प्रयास किया गया।
केंद्र सरकार ने इन योजनाओं को सामाजिक-आर्थिक समावेशन से जोड़ते हुए बैंक खाते, घर, बिजली, स्वच्छ ईंधन, स्वास्थ्य बीमा और खाद्यान्न जैसी बुनियादी जरूरतों को नीति के प्रमुख हिस्से के रूप में रखा है। 2026 में केंद्रीय मंत्रिमंडल के प्रस्ताव में भी गरीबों के लिए आवास, बिजली, स्वच्छ पानी, मुफ्त राशन और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी योजनाओं का उल्लेख किया गया।
स्वच्छ भारत से जनभागीदारी तक
प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने स्वच्छता को राष्ट्रीय अभियान के रूप में आगे बढ़ाया। स्वच्छ भारत मिशन के तहत खुले में शौच से मुक्ति, शौचालय निर्माण, कचरा प्रबंधन और स्वच्छता को लेकर जनभागीदारी पर जोर दिया गया।
प्रधानमंत्री ने स्वयं सफाई अभियान में हिस्सा लेकर लोगों से स्वच्छता को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने की अपील की। मध्य प्रदेश का इंदौर शहर स्वच्छता के क्षेत्र में लगातार चर्चा में रहा है और इसे स्थानीय निकायों तथा नागरिक भागीदारी के उदाहरण के रूप में देखा जाता है।
अर्थव्यवस्था, आत्मनिर्भरता और तकनीक
‘मेक इन इंडिया’, ‘आत्मनिर्भर भारत’, ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘स्टार्टअप इंडिया’ जैसे अभियानों के जरिए विनिर्माण, डिजिटल सेवाओं, स्टार्टअप और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया।
रक्षा उत्पादन और निर्यात, डिजिटल भुगतान तथा स्टार्टअप इकोसिस्टम में भारत की बढ़ती गतिविधियां इसी व्यापक आर्थिक नीति का हिस्सा हैं। सरकार ने आत्मनिर्भरता को विशेष रूप से रणनीतिक क्षेत्रों और विनिर्माण क्षमता से जोड़ा है।
अंतरिक्ष विज्ञान में भारत की उपलब्धियां
भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम ने भी इस अवधि में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल कीं। चंद्रयान-3 मिशन की सफल लैंडिंग ने भारत को चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग करने वाले देशों की सूची में शामिल किया। मिशन की सफलता को भारत की वैज्ञानिक और तकनीकी क्षमता के महत्वपूर्ण प्रदर्शन के रूप में देखा गया।
युवा और महिला सशक्तीकरण
सरकार की नीतियों में युवाओं के लिए कौशल विकास, स्वरोजगार, स्टार्टअप और वित्तीय सहायता पर जोर दिया गया। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के माध्यम से छोटे कारोबार और स्वरोजगार के लिए ऋण सुविधा उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया।
महिला सशक्तीकरण के क्षेत्र में उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना और ‘लखपति दीदी’ जैसे कार्यक्रमों को आगे बढ़ाया गया। संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान करने वाला नारी शक्ति वंदन अधिनियम भी इसी अवधि का प्रमुख राजनीतिक-संवैधानिक कदम रहा है।
विरासत और आधुनिक भारत का मेल
मोदी सरकार के दौरान सांस्कृतिक विरासत से जुड़े मुद्दे भी राष्ट्रीय राजनीति और सार्वजनिक विमर्श में प्रमुख रहे हैं। योग को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देने में भारत की भूमिका महत्वपूर्ण रही। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मान्यता दी, जिसके बाद दुनिया के कई देशों में इस दिन योग से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
अयोध्या में राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा जनवरी 2024 में हुई। वहीं, अगस्त 2019 में केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के विशेष प्रावधानों को हटाने का निर्णय लिया। इन दोनों घटनाक्रमों का भारतीय राजनीति और सार्वजनिक विमर्श पर व्यापक प्रभाव रहा है।
‘मन की बात’ से संवाद की पहल
‘मन की बात’ कार्यक्रम के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के अलग-अलग हिस्सों के नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, विद्यार्थियों, किसानों और अन्य क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों से जुड़े विषयों को राष्ट्रीय मंच दिया। कार्यक्रम में समय-समय पर स्थानीय स्तर पर किए जा रहे नवाचार और जनभागीदारी के उदाहरणों का उल्लेख किया जाता रहा है।
25 वर्षों की सार्वजनिक यात्रा
नरेंद्र मोदी की सार्वजनिक यात्रा गुजरात के मुख्यमंत्री से लेकर भारत के प्रधानमंत्री तक पहुंची है। जून 2026 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने उनके लगातार 25 वर्षों तक सरकार के प्रमुख के रूप में सार्वजनिक जीवन में रहने के पड़ाव का उल्लेख करते हुए उनके शासनकाल से जुड़ी विभिन्न योजनाओं और नीतियों को रेखांकित किया था। 17 सितंबर को प्रधानमंत्री का जन्मदिन भी है। इस अवसर पर उनके समर्थकों और संगठनों की ओर से सेवा और जनकल्याण से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहे हैं। प्रधानमंत्री के जन्मदिन के अवसर पर ‘सेवा पखवाड़ा’ जैसे कार्यक्रमों के जरिए स्वच्छता, स्वास्थ्य, रक्तदान और अन्य सामाजिक गतिविधियां आयोजित करने की परंपरा भी रही है।
25 वर्षों की इस यात्रा में शासन, विकास, राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेश नीति, सामाजिक कल्याण, तकनीक और सांस्कृतिक मुद्दों से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले और कार्यक्रम सामने आए हैं। आने वाले वर्षों में ‘विकसित भारत 2047’ का लक्ष्य सरकार के प्रमुख राष्ट्रीय उद्देश्यों में शामिल है। प्रधानमंत्री ने भी इसे 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के व्यापक लक्ष्य से जोड़ा है।
इस अवसर पर सार्वजनिक जीवन में उनकी यात्रा और सरकार की नीतियों का मूल्यांकन अलग-अलग दृष्टिकोणों से किया जाता रहा है। समर्थक इसे सेवा, विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण अवधि मानते हैं, जबकि विपक्षी दल कई नीतियों और फैसलों पर अलग-अलग सवाल और आपत्तियां उठाते रहे हैं। इन सभी पहलुओं के बीच नरेंद्र मोदी के 25 वर्षों का सार्वजनिक जीवन भारतीय राजनीति के एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज हुआ है।