प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में गुजरात स्थित सोमनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना की और वहां से राष्ट्र को संबोधित किया। यह संबोधन भारत की सदियों पुरानी विरासत की दृढ़ता और उससे असहज महसूस करने वाली ‘गुलामी की मानसिकता’ पर केंद्रित रहा। पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि सोमनाथ केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि भारत की आत्मा का प्रतीक है जिसने 1000 साल में कई आक्रमण झेले, लेकिन कभी झुकना नहीं सीखा।
सोमनाथ मंदिर परिसर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आतताइयों (अत्याचारियों) को लगा था कि वे पत्थर तोड़कर भारत की आस्था को भी तोड़ देंगे। उन्होंने 1026 ईस्वी में महमूद गजनवी के हमले से लेकर पुर्तगालियों के आक्रमण तक का जिक्र करते हुए कहा कि हर हमले और विध्वंस के बाद सोमनाथ फिर खड़ा हुआ। उन्होंने साफ चेताया कि इतिहास सिर्फ बाहर से आए आक्रांताओं से नहीं, बल्कि अंदर की कमजोर सोच से भी लड़ता है।
पीएम मोदी ने आजादी के बाद के उस दौर की याद दिलाई जब सरदार वल्लभभाई पटेल सोमनाथ के पुनर्निर्माण का संकल्प ले रहे थे। उन्होंने कहा कि आज भी देश में ऐसी ताकतें मौजूद हैं जो भारत की विरासत से असहज महसूस करती हैं। यह संदर्भ 1951 में सोमनाथ मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा से जुड़ा है, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की उपस्थिति और सरकारी धन के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई थी, जिसे PM ने ‘गुलामी की मानसिकता’ करार दिया। उन्होंने कहा कि सोमनाथ का नाम ही अमरता (सोम यानी अमृत) का प्रतीक है, और धार्मिक कट्टरपंथी यह नहीं समझ पाए कि जिस मंदिर को वे मिटाना चाहते थे, उसके नाम में ही अमरता है। उन्होंने देशवासियों से एकजुट रहने की अपील की।
वहीं, प्रधानमंत्री की इस यात्रा पर राजनीति भी देखने को मिली। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने पीएम की यात्रा को उनका संवैधानिक अधिकार बताया, लेकिन साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री से पड़ोसी देशों, खासकर बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों का मुद्दा उठाते हुए अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर ध्यान देने का आग्रह किया। सोमनाथ का पुनर्निर्माण आज 75 साल पूरे कर चुका है और PM मोदी ने कहा कि यह इतिहास का संदेश है कि सोमनाथ खड़ा है तो भारत खड़ा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने भरोसा जताया कि हर देशवासी के मन में विकसित भारत को लेकर विश्वास है और सोमनाथ मंदिर संघर्ष, आस्था और स्वाभिमान का प्रतीक है, जो यह सिखाता है कि भारत को तोड़ा जा सकता है, लेकिन कभी झुकाया नहीं जा सकता।









