Loading...
  • ... अपडेट हो रहा है
  • ... अपडेट हो रहा है
  • ... अपडेट हो रहा है
ताज़ा ख़बरें
Loading updates...

होम

शॉर्ट अपडेट

ब्रेकिंग

लाइव टीवी

मेन्यू

राजस्थान का रहस्यमयी मंदिर, जहां पहले राक्षस फिर होती है मां शीतला की पूजा!

भारत में आस्था को लेकर कई रहस्यमयी कहानियां और चमत्कार हैं जिसे आजतक आधुनिक विज्ञान भी नहीं समझ पाया है। आज हम बात करने वाले हैं राजस्थान के ऐसे प्राचीन मंदिर की जिसकी कहानी डरावनी भी है और श्रद्धा से भी भरी है। यहां 800 साल से एक परंपरा चली आ रही है जिसे सुनते ही लोग दंग रह जाते हैं। राजस्थान के पाली जिले में स्थित शीतला माता के मंदिर जो कि लगभग 800 साल पुराना बताया जाता है और ये मंदिर आस्था के साथ-साथ कई चमत्कारी मान्यताओं से भी जुड़ा बताया जाता है। मंदिर के गर्भगृह में मां शीतला की चार भुजाओं वाली प्रतिमा स्थापित है, जिसे बेहद शक्तिशाली माना जाता है।

मंदिर परिसर में एक अनोखी ओखली मौजूद है, जिसे देखकर लोग हैरान रह जाते हैं। बताया जाता है कि इसकी गहराई करीब 1 मीटर है, लेकिन इसमें कितना भी पानी डाला जाए, यह कभी पूरी तरह नहीं भरती। श्रद्धालु इसे माता की दिव्य शक्ति का चमत्कार मानते हैं, जो इस मंदिर को और भी खास बनाता है।

राक्षस को भोग लगाने की अनोखी परंपरा

इस मंदिर की सबसे अलग और चौंकाने वाली परंपरा यह है कि यहां भक्त पहले एक राक्षस को भोग अर्पित करते हैं, उसके बाद ही मां शीतला की पूजा की जाती है। यह परंपरा सुनने में जितनी अजीब लगती है, इसके पीछे की कहानी उतनी ही रोचक और आस्था से जुड़ी हुई है।

पुरानी कथा से जुड़ी मान्यता

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, लगभग 800 साल पहले इस क्षेत्र में बाबरा नाम का एक राक्षस रहता था। वह इतना क्रूर था कि ब्राह्मणों के घरों में होने वाली शादियों में दूल्हों की हत्या कर देता था, जिससे पूरा इलाका भय में जी रहा था। लोगों की प्रार्थना सुनकर मां शीतला ने एक छोटी कन्या का रूप धारण किया और अपनी शक्ति से उस राक्षस का वध कर दिया। मरते समय राक्षस ने अपनी गलती स्वीकार की और माता से क्षमा मांगी। मां शीतला ने उसकी प्रार्थना स्वीकार करते हुए उसे वरदान दिया कि उनकी पूजा से पहले उसे भोग लगाया जाएगा, ताकि उसकी आत्मा को शांति मिल सके। तभी से यह परंपरा आज तक जारी है।

नवरात्रि में उमड़ती है आस्था की भीड़

हर साल नवरात्रि के दौरान इस मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। दूर-दूर से लोग यहां आकर पहले राक्षस को भोग लगाते हैं और फिर माता से अपनी मनोकामनाएं मांगते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से की गई प्रार्थना यहां जरूर पूरी होती है।

संबंधित खबरें

मोहन भागवत का सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश: क्या संघ प्रमुख ने युवाओं के बहाने सरकार, विपक्ष और पूरे सिस्टम को आईना दिखाया?

कॉकरोच आंदोलन के पीछे बड़ी साजिश? 180 इन्फ्लुएंसर्स के वायरल दावे से गरमाई सियासत, सोशल मीडिया की भूमिका पर उठे सवाल

‘जिंदा चमड़े का सप्लायर’… आरजेडी के भीतर आखिर किस ओर इशारा कर गए भाई वीरेंद्र? तेजस्वी यादव के सामने खड़े हुए कई बड़े सवाल

शेख हसीना के ऐलान से बांग्लादेश में बढ़ी सियासी हलचल, भारत ने दिया ये बयान

12 अगस्त को लॉन्च होगा Google Pixel 11 Pro Fold! लॉन्च से पहले लीक हुआ डिजाइन

Recommended Stories

मोहन भागवत का सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश: क्या संघ प्रमुख ने युवाओं के बहाने सरकार, विपक्ष और पूरे सिस्टम को आईना दिखाया?

कॉकरोच आंदोलन के पीछे बड़ी साजिश? 180 इन्फ्लुएंसर्स के वायरल दावे से गरमाई सियासत, सोशल मीडिया की भूमिका पर उठे सवाल

‘जिंदा चमड़े का सप्लायर’… आरजेडी के भीतर आखिर किस ओर इशारा कर गए भाई वीरेंद्र? तेजस्वी यादव के सामने खड़े हुए कई बड़े सवाल

शेख हसीना के ऐलान से बांग्लादेश में बढ़ी सियासी हलचल, भारत ने दिया ये बयान

12 अगस्त को लॉन्च होगा Google Pixel 11 Pro Fold! लॉन्च से पहले लीक हुआ डिजाइन