नई दिल्ली: स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन के बीच कांग्रेस के शीर्ष नेताओं की गैरमौजूदगी ने राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे इस बार लाल किले के स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल नहीं हुए।
कांग्रेस की ओर से इसकी वजह बैठने की व्यवस्था बताई गई है। पार्टी का आरोप है कि राहुल गांधी को उनकी संवैधानिक और संसदीय स्थिति के अनुरूप आगे की कतार में जगह नहीं दी गई। वहीं, सरकार की ओर से कहा गया कि बैठने की व्यवस्था प्रोटोकॉल के तहत की गई थी और ओलंपिक खिलाड़ियों को आगे की सीटें दी गई थीं।
राहुल गांधी की सीट को लेकर क्या है विवाद?
राहुल गांधी लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं और उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त है। कांग्रेस का कहना है कि प्रोटोकॉल के अनुसार उन्हें पहली कतार में जगह मिलनी चाहिए थी।
पार्टी के मुताबिक, राहुल गांधी को दूसरी कतार में पीछे की ओर सीट आवंटित की गई थी। कांग्रेस ने इसे नेता प्रतिपक्ष के पद और लोकतांत्रिक संस्थाओं का अपमान बताते हुए सवाल उठाए।
हालांकि, सरकार से जुड़े सूत्रों के मुताबिक इस बार बैठने की व्यवस्था में बदलाव का एक कारण पेरिस ओलंपिक से लौटे भारतीय खिलाड़ियों को आगे बैठाना था।
सरकार ने सुषमा स्वराज और अरुण जेटली का उदाहरण क्यों दिया?
विवाद बढ़ने के बाद रक्षा मंत्रालय की ओर से कांग्रेस नेताओं को यूपीए शासन के दौरान की बैठने की व्यवस्था से जुड़ा पुराना रिकॉर्ड दिखाए जाने की बात सामने आई है।
सरकार के सूत्रों के मुताबिक, उस समय विपक्ष में रहने वाले बीजेपी नेताओं सुषमा स्वराज और अरुण जेटली को भी लाल किले के स्वतंत्रता दिवस समारोह में आगे की कतार में जगह नहीं मिली थी।
सरकार का तर्क है कि बैठने की व्यवस्था हर साल प्रोटोकॉल, अतिथियों और कार्यक्रम की जरूरतों के अनुसार तय की जाती है। इसलिए राहुल गांधी को पीछे की कतार में सीट दिए जाने को सीधे तौर पर अपमान से जोड़ना उचित नहीं है।
खरगे लाल किले क्यों नहीं पहुंचे?
राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे भी स्वतंत्रता दिवस समारोह में लाल किले नहीं पहुंचे। कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, उन्हें दूसरी या तीसरी कतार में सीट दी गई थी।
पार्टी का कहना है कि खरगे के लिए इतनी दूर तक पैदल जाकर अपनी सीट तक पहुंचना मुश्किल था। इसी वजह से उन्होंने कांग्रेस मुख्यालय इंदिरा भवन में ध्वजारोहण करने का फैसला किया।
इस दौरान सोनिया गांधी और राहुल गांधी भी उनके साथ मौजूद रहे।
बीजेपी ने कांग्रेस पर साधा निशाना
कांग्रेस नेताओं के लाल किले नहीं पहुंचने पर बीजेपी ने तीखा हमला बोला। बीजेपी नेताओं ने इसे राष्ट्रीय पर्व से दूरी बनाने और स्वतंत्रता दिवस जैसे महत्वपूर्ण आयोजन का राजनीतिकरण करने की कोशिश बताया।
बीजेपी नेता आरपी सिंह ने सवाल उठाते हुए कहा कि खरगे संसद के मकर द्वार तक रोज सीढ़ियां चढ़ते हैं, ऐसे में लाल किले तक पहुंचने में परेशानी की वजह क्या है।
बीजेपी का आरोप है कि कांग्रेस को सीट की व्यवस्था पर आपत्ति थी, इसलिए पार्टी के शीर्ष नेताओं ने स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल होने से दूरी बनाई।
लगातार तीसरे साल कांग्रेस नेताओं की गैरमौजूदगी
लाल किले के स्वतंत्रता दिवस समारोह में कांग्रेस के शीर्ष नेताओं की गैरमौजूदगी को लेकर यह विवाद इसलिए भी अहम है क्योंकि यह लगातार तीसरा साल है जब पार्टी के बड़े नेता इस आयोजन से दूर रहे हैं।
एक तरफ कांग्रेस इसे प्रोटोकॉल और विपक्ष के सम्मान से जोड़ रही है, तो दूसरी तरफ बीजेपी इसे राष्ट्रीय पर्व से जुड़ी राजनीति करार दे रही है।
फिलहाल, सीट को लेकर शुरू हुआ यह विवाद स्वतंत्रता दिवस के दिन केंद्र सरकार और कांग्रेस के बीच एक नए राजनीतिक टकराव का मुद्दा बन गया है।