उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी ‘हर घर नल योजना’ सवालों के घेरे में आ गई है। चोपन ब्लॉक की सिंदुरिया ग्राम पंचायत में दूषित पानी पीने को मजबूर ग्रामीणों ने अपनी समस्या को लेकर अनोखा विरोध प्रदर्शन किया है। सोन नदी के दूषित पानी में बैठकर ग्रामीणों ने जल सत्याग्रह करते हुए प्रशासनिक अधिकारियों पर गंभीर लापरवाही और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि करीब 2 से 3 साल पहले गांव में सर्वे कराकर पाइपलाइन बिछाने के नाम पर सड़कों की खुदाई कर दी गई थी, लेकिन आज तक उनके घरों में नल की टोटी नहीं लग पाई है। इस गंभीर लापरवाही के चलते ग्रामीणों को आज भी सोन नदी का दूषित पानी पीने पर मजबूर होना पड़ रहा है, जिससे उनके स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ रहा है और कई तरह के स्वास्थ्य संकट खड़े हो गए हैं।
ग्रामीणों का प्रतिनिधित्व कर रहे योग गुरु अजय कुमार पाठक ने इस पूरे मामले पर अपनी बात रखते हुए कहा कि सोनभद्र के चोपन ब्लॉक की सिंदुरिया ग्राम पंचायत में जल संकट को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है। उन्होंने बताया कि ‘प्रधानमंत्री हर घर नल योजना’ के तहत सर्वे और पाइपलाइन खुदाई तो की गई, लेकिन वर्षों बाद भी गांव में पानी की आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी है। योग गुरु पाठक ने आरोप लगाया कि जिले के योजना से जुड़े अधिकारियों की लापरवाही और भ्रष्टाचार के कारण यह महत्वपूर्ण सरकारी योजना केवल कागजों तक ही सीमित रह गई है।
इसी के मद्देनजर, सैकड़ों ग्रामीणों ने सोन नदी में बैठकर एक दिवसीय जल सत्याग्रह किया। यह सांकेतिक धरना प्रशासनिक अधिकारियों को जगाने और जल समस्या के स्थायी समाधान की मांग को लेकर किया गया, ताकि जल्द से जल्द ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो सके।
सिंदुरिया के ग्रामीण अब भी स्वच्छ पेयजल की उम्मीद में हैं और इस जल सत्याग्रह के माध्यम से उन्होंने सरकार और प्रशासन से जल्द से जल्द उनकी समस्या का समाधान करने और हर घर तक शुद्ध पानी पहुंचाने की अपील की है।









