मतदाता सूची में गड़बड़ी पर SC का सख्त रुख: सिर्फ संदेह पर नहीं कटेगा नाम, सुधार के लिए मिला 10 दिन का मौका

मतदाता सूची में गड़बड़ी पर SC का सख्त रुख
मतदाता सूची में गड़बड़ी पर SC का सख्त रुख

पश्चिम बंगाल में चल रही मतदाता सूची सुधार प्रक्रिया (SIR) को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। चुनाव आयोग ने हाल ही में सुप्रीम कोर्ट को जानकारी दी है कि इस प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची में कई चौंकाने वाली तार्किक गड़बड़ियां मिली हैं। हालांकि, इस पर त्वरित एक्शन लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि किसी भी मतदाता का नाम केवल संदेह के आधार पर नहीं हटाया जा सकता। कोर्ट ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

चुनाव आयोग (ECI) ने कोर्ट को बताया है कि मतदाता सूची में ऐसी जानकारियां मिली हैं जो समझ से बाहर हैं और सूची की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करती हैं। आयोग के अनुसार, कहीं एक ही व्यक्ति को सैकड़ों मतदाताओं का पिता दिखाया गया है, तो कहीं उम्र और पारिवारिक जानकारी में भारी अंतर है। आयोग का मत है कि ऐसी गलतियों को तुरंत ठीक करना आवश्यक है, ताकि मतदाता सूची को सही और भरोसेमंद बनाया जा सके। ये सुधार प्रक्रिया (SIR) चुनावी तैयारियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

मतदाताओं के अधिकार की रक्षा करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि तार्किक गड़बड़ियों की जांच जरूर हो, लेकिन किसी का वोट देने का अधिकार केवल शक के आधार पर छीना नहीं जा सकता। कोर्ट ने सुधार और न्याय सुनिश्चित करने के लिए निम्नलिखित निर्देश दिए हैं:

सार्वजनिक स्थानों पर सूची: जिन मतदाताओं के नाम पर सवाल उठाए गए हैं, उनकी सूची को सार्वजनिक जगहों जैसे पंचायत भवन, ब्लॉक ऑफिस और वार्ड ऑफिस में लगाया जाए, ताकि मतदाता स्वयं इसे देख सकें और आपत्ति दर्ज कर सकें।

आपत्ति दर्ज करने का समय: संबंधित मतदाताओं को अपनी बात रखने, ज़रूरी कागजात दिखाने और गलती सुधारने के लिए 10 दिन की समय सीमा दी जाएगी।

प्रतिनिधि द्वारा सुनवाई: कोर्ट ने यह भी व्यवस्था दी है कि यदि कोई व्यक्ति स्वयं उपस्थित नहीं हो सकता, तो वह किसी प्रतिनिधि के माध्यम से भी अपनी शिकायत या पक्ष दर्ज करा सकता है।

न्याय और इंसाफ सबसे अहम

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला इस बात पर जोर देता है कि मतदाता सूची सुधार प्रक्रिया (SIR) में पारदर्शिता और इंसाफ सबसे अहम है। कोर्ट का साफ संदेश है कि कोई भी व्यक्ति बिना किसी ठोस और सत्यापित वजह के अपने वोट के अधिकार से वंचित नहीं होना चाहिए।

यह सुनिश्चित किया गया है कि चुनावी सूची में सुधार हो, लेकिन यह सुधार किसी भी नागरिक के लोकतांत्रिक अधिकार को प्रभावित किए बिना, पूरी तरह से पारदर्शी और न्यायसंगत तरीके से किया जाए।

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