विरोध या संसद पर दबाव की राजनीति? आखिर किसके इशारे पर बढ़े प्रदर्शनकारी?
मानसून सत्र के पहले ही दिन देश की राजधानी दिल्ली में जो तस्वीर सामने आई, उसने लोकतंत्र, विरोध की मर्यादा और संसद की सुरक्षा—तीनों पर गंभीर बहस छेड़ दी है।
मानसून सत्र के पहले ही दिन देश की राजधानी दिल्ली में जो तस्वीर सामने आई, उसने लोकतंत्र, विरोध की मर्यादा और संसद की सुरक्षा—तीनों पर गंभीर बहस छेड़ दी है।
आज हम भारतीय लोकतंत्र के उस अध्याय की बात करेंगे, जिसे अक्सर स्वतंत्र भारत के इतिहास का सबसे विवादित और अंधकारमय दौर कहा जाता है। यह दौर था 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 तक लागू रहे आपातकाल (Emergency) का, जिसने भारतीय राजनीति, संविधान और लोकतंत्र को गहराई से प्रभावित किया। वक़्त था सन … Read more