दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में मंगलवार रात उस समय तनाव फैल गया, जब नगर निगम (MCD) और पुलिस ने फैज़-ए-इलाही मस्जिद के आसपास के अवैध अतिक्रमण को हटाने के लिए बड़ी कार्रवाई शुरू की। आधी रात को शुरू हुई इस बुलडोजर कार्रवाई ने जल्द ही हिंसक विरोध प्रदर्शन का रूप ले लिया, जिसमें पांच पुलिसकर्मी घायल हुए और कई लोगों को हिरासत में लिया गया।
रात करीब 12 बजे 32 बुलडोजरों, 50 डंपरों और 200 से अधिक मजदूरों के साथ अतिक्रमण हटाओ दस्ता मौके पर पहुंचा। जैसे ही कार्रवाई शुरू हुई, स्थानीय लोग सड़कों पर उतर आए और विरोध करने लगे। स्थिति जल्द ही हिंसक हो गई, जहां प्रदर्शनकारियों ने पुलिस और एमसीडी टीमों पर पथराव किया। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले दागने पड़े। इस झड़प में 5 पुलिसकर्मी घायल हो गए और 10 लोगों को हिरासत में लिया गया।
इस विवाद में अब राजनीतिक पहलू भी सामने आ रहा है। सूत्रों के अनुसार, समाजवादी पार्टी के एक सांसद पर घटना के दौरान लोगों को भड़काने का आरोप लगा है, जिसकी जांच पुलिस जल्द करेगी। दूसरी ओर, स्थानीय लोगों का आरोप है कि उन्हें कार्रवाई से पहले कोई पूर्व सूचना नहीं दी गई थी। उनका कहना है कि अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया में मस्जिद के आसपास के हिस्से को भी नुकसान पहुंचा है, जिसने उनके गुस्से को और भड़का दिया।
कार्रवाई के चलते फैज़-ए-इलाही मस्जिद के सामने की गली को पूरी तरह बंद कर दिया गया है। इलाके में सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए हैं, रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) समेत भारी संख्या में पुलिस बल तैनात है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह कदम कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी था। देर रात शुरू हुई कार्रवाई सुबह तक लगातार जारी रही और सभी अवैध कब्जों को हटा दिया गया।
तुर्कमान गेट का यह मामला अब सिर्फ अवैध कब्जे हटाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने सामाजिक और राजनीतिक तनाव को जन्म दे दिया है। प्रशासन का कहना है कि क्षेत्र में शांति और व्यवस्था बनाए रखने के लिए कड़ी निगरानी जारी रहेगी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।









