हाल ही में ‘डिजिटल अरेस्ट’ शब्द ने देशभर में सनसनी मचा दी थी, जिससे लोग डर रहे थे कि उन्हें मोबाइल या कंप्यूटर के माध्यम से गिरफ्तार किया जा सकता है। लेकिन अब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस बड़े भ्रम को तोड़ दिया है और प्रदेशवासियों को साइबर ठगी के इस नए तरीके से सावधान रहने की अपील की है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को स्पष्ट किया कि ‘डिजिटल अरेस्ट’ भारतीय कानून का हिस्सा नहीं है। यह सिर्फ साइबर ठगों द्वारा लोगों को डराने और उनसे पैसे वसूलने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक शब्द है। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि न तो पुलिस और न ही कोई सरकारी एजेंसी किसी व्यक्ति को वीडियो कॉल, वॉट्सऐप या किसी अन्य सोशल मीडिया माध्यम के ज़रिये गिरफ्तार करती है और न ही किसी भी स्थिति में पैसे की मांग करती है।
साइबर ठग अक्सर लोगों को धमकाने के लिए सरकारी अधिकारी या पुलिसकर्मी बनकर यह दावा करते हैं कि उन्हें किसी अपराध में ‘डिजिटल रूप से गिरफ्तार’ किया गया है। लोगों को ऐसे किसी भी झांसे में नहीं आना चाहिए। मुख्यमंत्री ने लोगों से आग्रह किया है कि वे अपनी निजी जानकारी जैसे OTP (वन टाइम पासवर्ड), फोटो, या अपने निवास की लोकेशन किसी भी अज्ञात व्यक्ति या स्रोत के साथ साझा न करें।
साइबर अपराधों पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए, उत्तर प्रदेश में अब सभी 75 जिलों में साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन और समर्पित हेल्प डेस्क स्थापित किए गए हैं। यदि आप या आपका कोई परिचित इस प्रकार की किसी भी ठगी का शिकार होता है, तो तुरंत राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 1930 पर इसकी सूचना दें।
मुख्यमंत्री के स्पष्ट बयान ने इस अफवाह पर विराम लगा दिया है। जागरूक जनता और सतर्कता ही साइबर ठगों की हर चाल को नाकाम कर सकती है, जिससे हमारा समाज सुरक्षित बना रहेगा।









