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यूपी की सियासत में ‘धुरंधर’ की एंट्री, होर्डिंग्स पर अखिलेश vs योगी आमने-सामने

यूपी की सियासत इन दिनों फिल्मी रंग धुरंधर-2 में नजर आ रही है। हाल ही में कई जिलों में लगाए गए होर्डिंग्स ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है, जहां नेताओं को फिल्मी किरदारों से जोड़कर दिखाया गया है।

होर्डिंग्स में आमने-सामने दिखे नेता

लखनऊ, अमेठी समेत 10 जिलों में सपा प्रमुख अखिलेश यादव के खिलाफ होर्डिंग्स लगाए गए हैं। होर्डिंग में एक तरफ अखिलेश को फिल्म ‘धुरंधर’ के विलेन ‘रहमान डकैत’ की तरह दिखाया गया है। नीचे लिखा है- अखिलेश का ल्यारी राज। होर्डिंग में दूसरी तरफ कन्या पूजन करते सीएम योगी की तस्वीर लगी है। नीचे लिखा है- धुरंधर सीएम। होर्डिंग में पूछा गया है- आपको क्या चाहिए?

शासन की तुलना का संदेश

होर्डिंग्स में सपा शासन को दंगे और अराजकता से जोड़ते हुए दिखाया गया है, वहीं योगी सरकार को माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया है। साथ ही जनता से सवाल किया गया है कि उन्हें कैसा शासन चाहिए।

‘यूथ अगेंस्ट माफिया’ ने लगाए पोस्टर

इन होर्डिंग्स को ‘यूथ अगेंस्ट माफिया’ नाम की संस्था द्वारा लगाया गया है। लखनऊ समेत कई शहरों में प्रमुख चौराहों और इलाकों में इन्हें लगाया गया, जिससे यह मुद्दा तेजी से चर्चा में आ गया है।

फिल्म ‘धुरंधर’ से जुड़ा विवाद

अब आपको बताते Dhurandhar 2 की सियासत में कैसे एंट्री हुई? सिनेमाघरों में 19 मार्च को रिलीज हुई फिल्म ‘धुरंधर-2’ से जुड़े एक किरदार की सबसे ज्यादा चर्चा हुई वह किरदार है आतिफ अहमद का। कहा जा रहा है कि आतिफ के रूप में प्रयागराज के माफिया रहे अतीक अहमद का ISI कनेक्शन दिखाया गया है। यही वजह है कि सपा ने फिल्‍म को प्रोपेगेंडा करार दिया था। अखिलेश यादव ने कहा था कि यह फिल्‍म विपक्ष को बदनाम करने के लिए बनाई गई है। मुख्तार अंसारी के भाई और गाजीपुर से सपा सांसद अफजाल अंसारी ने फिल्म पर आपत्ति जताई थी। कहा था- अतीक अहमद के नाम पर फिल्म बनाकर उन्हें ISI (पाकिस्तान खुफिया एजेंसी) एजेंट दिखाया गया। जबकि वह अब इस दुनिया में नहीं हैं।

वहीं सीएम योगी ने 2 दिन पहले वाराणसी में ‘धुरंधर’ की तारीफ की थी। कहा था- आज की फिल्मों में ‘डकैतों’ को दिखाया जा रहा है। आज की फिल्में बदली हैं। पहले तो सही को गलत और गलत को सही दिखाया जा रहा था। अब सही को सही दिखाया जा रहा है। भाजपा नेता और रिटायर्ड आईपीएस अफसर डॉ. सूर्य कुमार शुक्ला ने फिल्म की तारीफ की थी। उन्होंने दावा किया था कि बिहार के शहाबुद्दीन, यूपी के मुख्तार अंसारी और अतीक अहमद के बीच करीबी संबंध थे। ये तीनों मिलकर जाली नोटों को बाजार में खपाते थे। इससे होने वाली कमाई गैंग को मजबूत करने में लगाई जाती थी।

बयानबाजी से बढ़ी राजनीति

फिल्म और होर्डिंग्स को लेकर दोनों पक्षों के नेताओं के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। इस पूरे घटनाक्रम ने यूपी की राजनीति में फिल्म और सियासत के मेल को लेकर नई बहस छेड़ दी है।