अमेरिका की यात्रा करने की योजना बना रहे भारतीय नागरिकों के लिए अब एयरपोर्ट पर उतरना किसी सिरदर्द से कम नहीं है। हाल ही में अमेरिकी इमीग्रेशन नियमों में आई सख्ती के कारण, वैध वीजा होने के बावजूद यात्रियों को घंटों तक लंबी पूछताछ और कई चरणों की बायोमेट्रिक जांच से गुजरना पड़ रहा है, जिससे उनकी यात्रा का अनुभव पूरी तरह बदल गया है।
अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) ने अपनी स्क्रीनिंग प्रक्रिया को अत्यधिक सख्त कर दिया है। अब सिर्फ सवालों के जवाब देना काफी नहीं है। यात्रियों को फिंगरप्रिंट, फोटो, आंखों का आयरिस स्कैन, चेहरे की पहचान, वॉइस प्रिंट और यहां तक कि डीएनए जांच जैसे संवेदनशील बायोमेट्रिक डेटा से गुजरना पड़ रहा है। कई भारतीय यात्रियों ने बताया है कि उन्हें एयरपोर्ट पर एक बार नहीं, बल्कि कई बार जांच के लिए रोका जाता है।
इस सख्ती का सीधा असर यात्रियों की यात्रा योजनाओं पर पड़ रहा है। कई मामलों में यात्रियों को घंटों तक रोका जाता है और कुछ दुर्भाग्यपूर्ण मामलों में उन्हें देश में प्रवेश करने से भी मना कर दिया जाता है, भले ही उनके पास वैध दस्तावेज हों। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह कदम राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने और इमीग्रेशन सिस्टम में होने वाले धोखाधड़ी को रोकने के लिए उठाया गया है। यह नई नीति अंतरराष्ट्रीय छात्रों, विदेशी कामगारों और पर्यटकों—सभी पर समान रूप से लागू होती है।
यात्रियों की बढ़ती नाराजगी को देखते हुए, DHS ने एक ट्रैवल रेड्रेस इंक्वायरी प्रोग्राम (TRIP) शुरू किया है। यदि किसी यात्री को गलत तरीके से रोका जाता है या जांच में अनावश्यक देरी होती है, तो वे इस कार्यक्रम के तहत शिकायत दर्ज कर सकते हैं। अमेरिका जाने से पहले यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे अपनी वीजा एप्लीकेशन बहुत सावधानी से भरें और यात्रा की छोटी से छोटी जानकारी को भी त्रुटिहीन रखें।
इसलिए, अगर आप जल्द ही अमेरिका की यात्रा करने वाले हैं, तो यह सुनिश्चित करें कि आप पूरी तैयारी के साथ जाएं और इमीग्रेशन प्रक्रिया में होने वाली अप्रत्याशित देरी के लिए संयम बनाए रखें।









