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अमेरिका-ईरान युद्ध कैसे टला? आधी रात के ट्रंप कॉल और अरब देशों की गुप्त कूटनीति का पूरा खेल

अमेरिका-ईरान युद्ध कैसे टला

पश्चिमी एशिया में तनाव जिस चरम सीमा पर पहुंच गया था, वहां से युद्ध टलना किसी चमत्कार से कम नहीं था। अमेरिका और ईरान के बीच मिसाइलों के दागने की तैयारी हो चुकी थी, लेकिन तभी अचानक एक घटनाक्रम ने पूरी बाजी पलट दी। यह सिर्फ एक फोन कॉल नहीं था, बल्कि खाड़ी देशों की जबरदस्त कूटनीति और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक सीक्रेट मैसेज का नतीजा था, जिसने क्षेत्र को एक बड़े विनाश से बचा लिया।

युद्ध को टालने की शुरुआत आधी रात को हुई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रात करीब एक बजे ईरान तक एक सीधा और निर्णायक संदेश भिजवाया। यह कोई सामान्य कूटनीतिक बयान नहीं, बल्कि जंग रोकने की अंतिम कोशिश थी। संदेश स्पष्ट था: अमेरिका हमला नहीं करना चाहता, लेकिन बदले में ईरान को कुछ ठोस कदम उठाने होंगे। ट्रंप की शर्त थी कि ईरान में चल रहे प्रदर्शनों के दौरान दी जा रही मौत की सज़ा पर रोक लगे और क्षेत्र में अमेरिकी हितों या सैन्य ठिकानों को निशाना न बनाया जाए।

इस संदेश की पुष्टि बाद में पाकिस्तान में ईरान के राजदूत रजा अमीरी मुकद्दम ने भी की। उन्होंने बताया कि ट्रंप की ओर से यह भरोसा दिया गया था कि शर्तें मानने पर अमेरिका सैन्य कार्रवाई से पीछे हट जाएगा। इसके तुरंत बाद, तेहरान ने प्रदर्शनकारियों को दी जाने वाली फांसी पर रोक लगाने की घोषणा कर दी और अमेरिका ने भी ईरान पर हमले की तैयारी रोक दी।

यह शांति सिर्फ एक संदेश से नहीं आई, बल्कि पर्दे के पीछे चल रही गहन कूटनीति का परिणाम थी। तनाव के चरम पर होने के दौरान, सऊदी अरब, क़तर, ओमान और मिस्र जैसे चार प्रमुख अरब राष्ट्रों ने अमेरिका और ईरान दोनों से लगातार संपर्क बनाए रखा। इन देशों को डर था कि अगर अमेरिका ने ईरान पर हमला किया तो पूरा खाड़ी क्षेत्र इसकी आग में झुलस जाएगा। तेल सप्लाई, समुद्री रास्ते और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था सब कुछ खतरे में पड़ सकता है।

वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्टों के अनुसार, इन देशों ने वाशिंगटन पर हमला न करने का दबाव बनाया। हालात इतने गंभीर थे कि क़तर के अल-उदीद एयरबेस से अमेरिकी कर्मियों को भी अस्थायी तौर पर हटाना पड़ा था। अरब देशों की इस संयुक्त कूटनीति और ट्रंप की पहल ने युद्ध की कगार पर खड़ी तस्वीर को बदल दिया। हालांकि, मानवाधिकार संगठनों का दावा है कि ईरान में दमन पूरी तरह रुका नहीं है और इंटरनेट सेवाएं अब भी बड़े पैमाने पर बाधित हैं।

ट्रंप की आधी रात की पहल और खाड़ी देशों की मजबूत कूटनीति ने वैश्विक तनाव को कम किया है। अब देखना यह है कि क्या यह सिर्फ एक अस्थायी राहत है, या फिर यह घटना अमेरिका और ईरान के बीच किसी बड़े और स्थायी समझौते की नींव रखेगी।