अमेरिका ने अपनी इमिग्रेंट वीज़ा नीति में एक बड़ा और सख्त बदलाव लागू किया है। 75 देशों के नागरिकों के लिए इमिग्रेंट वीज़ा प्रोसेसिंग पर अनिश्चित काल के लिए रोक लगा दी गई है। यह फ़ैसला दुनिया भर के प्रवासियों और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के लिए चिंता का विषय बन गया है। इस बड़ी सूची में कई प्रमुख देश शामिल हैं, लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि तमाम राजनीतिक कोशिशों के बावजूद पाकिस्तान को यह झटका लगा है, जबकि भारत को सूची से बाहर रखकर राहत दी गई है।
यह सख्त फ़ैसला 21 जनवरी से लागू हुआ है और इसे डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा वीज़ा नीति से जुड़ा अब तक का सबसे कठोर कदम माना जाता है। इस फैसले के बाद दक्षिण एशिया और मध्य एशिया के देशों में हलचल तेज़ हो गई है। जिन प्रमुख देशों के नागरिकों पर यह रोक लगाई गई है, उनमें पाकिस्तान, अफ़गानिस्तान, ईरान, रूस, ब्राज़ील, मिस्र, थाईलैंड और यमन जैसे देश शामिल हैं।
इस वीज़ा बैन की सबसे ज़्यादा चर्चा पाकिस्तान को लेकर हो रही है। हाल के महीनों में पाकिस्तान ने अमेरिका और विशेष रूप से ट्रंप प्रशासन को खुश करने की भरपूर कोशिश की थी। पिछले साल भारत के साथ हुए सैन्य तनाव के बाद पाकिस्तान का राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व खुलकर ट्रंप के समर्थन में नज़र आया था। यहाँ तक कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने युद्धविराम का श्रेय भी ट्रंप को दे दिया था। इसके बावजूद पाकिस्तान को अमेरिका की ‘नो एंट्री’ वाली सूची में डाल दिया गया, जिसे कूटनीतिक रूप से एक बड़ी बेइज्जती माना जा रहा है।
दक्षिण एशिया मामलों के विश्लेषक माइकल कुगलमैन ने इस फ़ैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि, “पाकिस्तान को अमेरिका से रिश्ते सुधारने की तमाम कोशिशों के बावजूद इस बैन से राहत नहीं मिल सकी। यह फ़ैसला दिखाता है कि अमेरिकी प्रशासन अब वीज़ा और इमिग्रेशन के मुद्दे पर बेहद सख़्त रुख़ अपनाए हुए है।”
इस सूची में भारत का नाम शामिल नहीं है। इसका मतलब है कि ग्रीन कार्ड (Green Card) या स्थायी निवास (PR) के लिए आवेदन करने वाले भारतीय नागरिकों पर इस फ़ैसले का सीधा असर नहीं पड़ेगा। यह भारत के लिए बड़ी राहत की ख़बर है।
हालांकि, भारत के कई पड़ोसी देश इस रोक की चपेट में आ गए हैं। बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, म्यांमार और अफ़गानिस्तान के नागरिकों के लिए भी इमिग्रेंट वीज़ा प्रोसेसिंग पर रोक लगाई गई है।
अमेरिका का यह कड़ा कदम साफ संकेत देता है कि ट्रंप प्रशासन इमिग्रेशन को लेकर किसी भी देश के साथ नरमी बरतने के मूड में नहीं था। जहां भारत को राहत मिली है, वहीं पाकिस्तान और अन्य प्रभावित देशों के लिए यह फैसला गंभीर चुनौती बनकर सामने आया है, जिसके अंतरराष्ट्रीय राजनीति और कूटनीति पर दूरगामी परिणाम देखने को मिल सकते हैं।








