उत्तर प्रदेश में मानसून की बारिश के चलते बाढ़ का संकट एक बार फिर गहरा गया है। गंगा, यमुना, सरयू और मंदाकिनी समेत 10 से ज्यादा नदियां खतरे के निशान के आसपास या कई जगह उससे ऊपर बह रही हैं। प्रदेश के 26 जिले बाढ़ की गंभीर चपेट में हैं और करीब 4 लाख की आबादी प्रभावित बताई जा रही है। सबसे ज्यादा चिंता पूर्वी और मध्य उत्तर प्रदेश के उन इलाकों को लेकर है, जहां नदियों के जलस्तर में लगातार उतार-चढ़ाव हो रहा है।
वाराणसी में गंगा खतरे के निशान से ऊपर
वाराणसी में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान 71.26 मीटर को पार कर करीब 72.1 मीटर तक पहुंच गया है। हालांकि पिछले 24 घंटे में जलस्तर में बेहद धीमी कमी के संकेत मिले हैं, लेकिन खतरा अभी टला नहीं है। शहर के सभी 84 घाट जलमग्न हैं। अस्सी घाट से लेकर नमो घाट और दशाश्वमेध घाट तक पानी पहुंच चुका है।
गंगा का जलस्तर बढ़ने से गंगा आरती अब छतों पर की जा रही है। वहीं, मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट के जलमग्न होने के कारण अंतिम संस्कार के लिए वैकल्पिक ऊंचे स्थानों का इस्तेमाल किया जा रहा है। गंगा में नावों के संचालन पर भी रोक लगा दी गई है। तटीय इलाकों में एनडीआरएफ की टीमें निगरानी कर रही हैं और वरुणा क्षेत्र पर भी नजर रखी जा रही है।
प्रयागराज में गंगा-यमुना दोनों उफान पर
प्रयागराज में गंगा और यमुना दोनों नदियों के बढ़ते जलस्तर ने चुनौती बढ़ा दी है। दारागंज, सलोरी, बघाड़ा और राजापुर जैसे निचले इलाकों में घरों तक पानी पहुंच गया है। लेटे हनुमान मंदिर भी जलमग्न है, जबकि दारागंज घाट के डूबने के बाद अंतिम संस्कार के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ रही है। यमुना में चंबल और बेतवा का पानी आने से जलस्तर में दोबारा बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है। इसका असर आगे वाराणसी तक पहुंच सकता है।
कानपुर में दो दर्जन से ज्यादा गांव प्रभावित
कानपुर में गंगा के बढ़ते जलस्तर से कटरी क्षेत्र में संकट बढ़ गया है। दो दर्जन से ज्यादा गांवों में पानी घुसने की खबर है। खेतों में खड़ी फसलें डूब चुकी हैं और ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों या घरों की छतों पर शरण लेनी पड़ रही है। कानपुर-उन्नाव को जोड़ने वाले तटीय रास्तों पर भी जलभराव की स्थिति बनी हुई है। इससे ग्रामीण इलाकों में आवागमन प्रभावित हुआ है।
चित्रकूट में मंदाकिनी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर
चित्रकूट में मंदाकिनी नदी ने भी गंभीर स्थिति पैदा कर दी है। नदी का जलस्तर खतरे के निशान से करीब 4 मीटर ऊपर तक पहुंच गया था। रामघाट और आसपास के इलाके जलमग्न हो गए। मध्य प्रदेश के बांधों से छोड़े गए पानी ने भी स्थिति को और गंभीर कर दिया। इससे साफ है कि बाढ़ का संकट किसी एक नदी या जिले तक सीमित नहीं है। अलग-अलग नदियों के बढ़ते जलस्तर, बांधों से छोड़ा गया पानी और लगातार हो रही बारिश मिलकर प्रदेश के कई इलाकों की स्थिति प्रभावित कर रहे हैं।
1,300 से ज्यादा राहत शिविर सक्रिय
बाढ़ प्रभावित लोगों को राहत देने के लिए राज्य में 1,300 से ज्यादा राहत शिविर सक्रिय किए गए हैं। वाराणसी में 61 राहत शिविर चिह्नित किए गए हैं। सरैयां, राजघाट, जेपी मेहता इंटर कॉलेज और वरुणा तटीय इलाकों के सरकारी स्कूलों में प्रभावित परिवारों को ठहराया जा रहा है। प्रयागराज में सलोरी, बघाड़ा और दारागंज जैसे प्रभावित इलाकों के सरकारी स्कूलों और सामुदायिक केंद्रों को राहत शिविर बनाया गया है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में शैक्षणिक गतिविधियां भी स्थगित हैं। चित्रकूट और कानपुर में पंचायत भवनों और प्राथमिक विद्यालयों को राहत केंद्र के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है।
1,690 से ज्यादा नावें और 1,060 से ज्यादा मेडिकल टीमें तैनात
राहत और बचाव अभियान के लिए 1,690 से ज्यादा नावें और 1,060 से ज्यादा मेडिकल टीमें तैनात की गई हैं। अब तक 17,500 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है। प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि प्रभावित परिवारों तक 48 घंटे के भीतर सूखा राशन, दूध और गर्म भोजन जैसी जरूरी सामग्री पहुंचाई जाए। इसके साथ ही जलभराव वाले इलाकों में सफाई और पानी की निकासी का काम तेज करने पर जोर दिया जा रहा है।
पानी उतरने के बाद स्वास्थ्य संबंधी चुनौती
बाढ़ का पानी कम होने के बाद संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ने की आशंका है। इसे देखते हुए मेडिकल टीमें तैनात की गई हैं और साफ पेयजल उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। मौसम विभाग ने पूर्वी उत्तर प्रदेश में अगले 24 से 48 घंटे के दौरान मध्यम से भारी बारिश और आकाशीय बिजली की चेतावनी दी है। ऐसे में लोगों से खराब मौसम और बिजली कड़कने के दौरान घर से बाहर नहीं निकलने तथा उफनती नदियों और उनके किनारों से पूरी तरह दूर रहने की अपील की गई है।
मुख्यमंत्री योगी ने किया प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रभावित इलाकों का जायजा ले रहे हैं। उन्होंने वाराणसी और चित्रकूट का हवाई सर्वेक्षण कर राहत व्यवस्था की समीक्षा की और प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाने के निर्देश दिए। फिलहाल उत्तर प्रदेश में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए अगले 24 से 48 घंटे बेहद अहम माने जा रहे हैं। नदियों का जलस्तर, लगातार बारिश और स्वास्थ्य संबंधी जोखिम प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौतियां हैं। अब चुनौती सिर्फ बाढ़ के पानी को नियंत्रित करने की नहीं, बल्कि पानी उतरने के बाद प्रभावित परिवारों की जिंदगी को जल्द से जल्द सामान्य करने की भी है।