केंद्र सरकार ने देश के राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ को लेकर एक बड़ा और बेहद महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। गृह मंत्रालय की ओर से जारी नई गाइडलाइन में यह साफ कर दिया गया है कि अब तक जो राष्ट्रगीत गाया जाता था, वह दरअसल अधूरा था। अब से सभी सरकारी कार्यक्रमों और स्कूलों में बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा रचित पूरे 6 छंदों वाला राष्ट्रगीत गूंजेगा और इसके सम्मान में खड़ा होना भी अनिवार्य होगा। आइए जानते हैं सरकार को यह बदलाव क्यों करना पड़ा और किन-किन जगहों पर यह नया नियम लागू होगा।
आजादी की लड़ाई में जिस गीत ने पूरे देश को एक सूत्र में पिरोया, अब उसका पूरा और मूल स्वरूप हमारे सामने होगा। गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs) ने 10 पन्नों का विस्तृत नोट जारी कर यह स्पष्ट किया है कि:
किसी भी सरकारी मंच या स्कूल की सभा में अब वंदे मातरम का सिर्फ मुखड़ा या छोटा हिस्सा नहीं बजाया जाएगा। बल्कि अब 3 मिनट 10 सेकंड के पूरे 6 छंदों वाले राष्ट्रगीत का गायन अनिवार्य होगा। सरकार का मानना है कि वंदे मातरम को उसकी पूरी गरिमा और पूर्णता के साथ पेश करना आवश्यक है।
नए आदेश के मुताबिक, अब किसी भी आयोजन में अगर राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान दोनों होने हैं, तो पहले ‘वंदे मातरम’ गाया जाएगा और उसके बाद ही ‘जन-गण-मन’ (राष्ट्रगान) होगा। इस दौरान वहां मौजूद हर व्यक्ति को ‘सावधान’ की मुद्रा में खड़ा होना होगा। यह नियम राष्ट्रपति या राज्यपाल के आगमन/प्रस्थान, सेना की परेड, और आकाशवाणी/दूरदर्शन पर राष्ट्रीय संदेशों के प्रसारण जैसे राजकीय समारोहों में सख्ती से लागू होगा।
आम जनता की सुविधा के लिए मंत्रालय ने एक महत्वपूर्ण छूट भी दी है। अगर आप सिनेमाघर में फिल्म देख रहे हैं या कोई डॉक्यूमेंट्री चल रही है और उसमें कहानी के हिस्से के रूप में वंदे मातरम बजता है, तो आपको खड़े होने की जरूरत नहीं है। मंत्रालय ने यह स्पष्ट किया है कि ऐसी जगहों पर खड़े होने से भ्रम और अव्यवस्था फैल सकती है, जिससे गीत का सम्मान घटने का खतरा है।
सरकार का यह फैसला वंदे मातरम को फिर से लोकप्रिय बनाने और आने वाली पीढ़ी को इसके गौरवशाली इतिहास और बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा रचित मूल, पूर्ण स्वरूप से परिचित कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।









