अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध को एक महीना पूरा हो चुका है, लेकिन हालात अब भी तनावपूर्ण बने हुए हैं। युद्ध खत्म होने के संकेत नहीं दिख रहे हैं और केवल शर्तों के साथ बातचीत की कोशिशें जारी हैं। इस युद्ध के चलते पश्चिम एशिया के और देश भी इस संघर्ष में शामिल होते नजर आ रहे हैं, जिससे हालात और गंभीर हो गए हैं।
यमन देश भी इस जंग में कूदा
अब तक इस युद्ध से दूर रहा यमन भी इसमें कूद पड़ा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, शनिवार तड़के यमन की ओर से इजराइल पर मिसाइल हमला किया गया। हूती विद्रोहियों ने गाजा युद्ध के दौरान हमास और फिलिस्तीन के समर्थन में पहले भी लाल सागर में इजराइली और अमेरिकी जहाजों पर रोक लगाने की कोशिश की थी।
हूती विद्रोहियों की चेतावनी और कार्रवाई
ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने पहले ही चेतावनी दी थी कि अगर ईरान और उसके सहयोगियों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहती है, तो वे भी जवाब देंगे। खबरों के अनुसार, उन्होंने इजराइल के परमाणु ठिकाने डिमोना को निशाना बनाते हुए बैलिस्टिक मिसाइल दागी है।
क्षेत्रीय टकराव का खतरा बढ़ा
हूती विद्रोहियों के इस युद्ध में शामिल होने से पूरे क्षेत्र में बड़े स्तर पर टकराव की आशंका बढ़ गई है। इनके पास लंबी दूरी तक हमला करने और अरब सागर व लाल सागर के अहम समुद्री मार्गों को प्रभावित करने की क्षमता है, जिससे स्थिति और गंभीर हो सकती है।
बाब अल-मंदेब पर खतरा
लेबनान और इराक में मौजूद ईरान के सहयोगी पहले ही इस युद्ध में शामिल हैं। अब हूती की एंट्री के बाद Bab el-Mandeb के बंद होने की आशंका भी बढ़ गई है।
यह समुद्री मार्ग यमन और अफ्रीका के हॉर्न क्षेत्र (जिबूती/इरिट्रिया) के बीच स्थित है और रेड सी को अदन की खाड़ी व हिंद महासागर से जोड़ता है।
वैश्विक व्यापार पर असर
यह रास्ता स्वेज नहर तक पहुंचने का प्रमुख मार्ग है और दुनिया का करीब 10-15% समुद्री व्यापार इसी से गुजरता है। पहले ही Strait of Hormuz पर तनाव बना हुआ है, ऐसे में अगर बाब अल-मंदेब भी बंद होता है तो दुनिया को बड़े आर्थिक संकट का सामना करना पड़ सकता है।









