Loading...
  • ... अपडेट हो रहा है
  • ... अपडेट हो रहा है
  • ... अपडेट हो रहा है
ताज़ा ख़बरें
Loading updates...

होम

शॉर्ट अपडेट

ब्रेकिंग

लाइव टीवी

मेन्यू

यूपी में विधायकों की बैठक पर पंकज चौधरी की चिट्ठी, क्या ठाकुर-ब्राह्मण राजनीति को मिली नई हवा?

xyz
xyz

उत्तर प्रदेश में इन दिनों बीजेपी के भीतर ब्राह्मण विधायकों की बैठक को लेकर सियासी माहौल गरमाया हुआ है। पहले इस बैठक की चर्चा हुई और फिर नए प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की चेतावनी भरी चिट्ठी ने मामले को और हवा दे दी। अब विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है कि जब पहले ठाकुर विधायकों की बैठक हुई थी, तब बीजेपी चुप क्यों रही, और ब्राह्मण विधायकों की बैठक पर इतनी सख्ती क्यों दिखाई गई।

इस पूरे विवाद ने बीजेपी को असहज कर दिया है। पार्टी के भीतर से भी आवाजें उठने लगी हैं कि क्या इस मामले में जल्दबाज़ी कर दी गई। बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि प्रदेश अध्यक्ष को सार्वजनिक चेतावनी देने के बजाय विधायकों से निजी तौर पर बातचीत कर मामला सुलझाना चाहिए था। अनुशासन के नाम पर जारी चिट्ठी ने उस मुद्दे को बड़ा बना दिया, जो शायद विधानसभा सत्र के साथ ही खत्म हो सकता था।

दरअसल, अगस्त महीने में ठाकुर यानी क्षत्रिय विधायकों की भी एक बैठक हुई थी, जिसे “कुटुंब परिवार” का नाम दिया गया था। उस बैठक के बाद विधायकों ने खुद माना था कि बैठक हुई है, लेकिन तब बीजेपी की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया। सूत्र बताते हैं कि उस समय भी बातचीत के ज़रिये बात समझाई गई थी। यही फर्क अब सवालों की वजह बन गया है।

यूपी की राजनीति में ब्राह्मण और ठाकुर दोनों ही जातियों की भूमिका अहम मानी जाती है। ब्राह्मणों की आबादी करीब 10–12 फीसदी और ठाकुरों की 6–7 फीसदी मानी जाती है। संख्या भले कम हो, लेकिन इन दोनों जातियों का सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव काफी ज्यादा है। यही वजह है कि इनकी नाराज़गी किसी भी पार्टी के लिए नुकसानदेह हो सकती है।

बीजेपी की चिंता भी यही है। विधानसभा चुनाव में अब ज्यादा समय नहीं बचा है और अगर ब्राह्मण समाज में नाराज़गी गहराई, तो इसका असर चुनावी नतीजों पर पड़ सकता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेकर भी विपक्ष सवाल उठा रहा है कि ठाकुरों की बैठक पर चुप्पी और ब्राह्मणों की बैठक पर कार्रवाई क्यों।

इस बीच ब्राह्मण विधायकों की बैठक के आयोजक, कुशीनगर से विधायक पीएन पाठक ने सोशल मीडिया पर एक भावनात्मक पोस्ट लिखी। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में ब्राह्मण समाज को मार्गदर्शक और विचारक माना गया है और उसका काम समाज को जोड़ना है, तोड़ना नहीं।

विपक्ष इस मुद्दे को पूरी ताकत से भुनाने में जुटा है। उसका मकसद साफ है—ब्राह्मण समाज को यह एहसास कराना कि बीजेपी उन्हें सिर्फ वोट बैंक समझती है। यूपी में करीब 37 साल से कोई ब्राह्मण मुख्यमंत्री नहीं बना है, और यही दर्द विपक्ष बार-बार उछाल रहा है।

हालांकि हकीकत यह भी है कि ब्राह्मणों के सामने विकल्प सीमित हैं। सपा और बसपा से उन्हें ज्यादा उम्मीद नहीं, और कांग्रेस की हालत भी कमजोर है। ऐसे में बीजेपी ही उनका मुख्य विकल्प बनी हुई है। सवाल सिर्फ इतना है कि क्या यह मुद्दा ब्राह्मण बनाम ठाकुर की राजनीति का रूप ले पाएगा, या बीजेपी समय रहते नुकसान की भरपाई कर लेगी। इसका जवाब आने वाले महीनों में ही साफ हो पाएगा।

संबंधित खबरें

मोहन भागवत का सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश: क्या संघ प्रमुख ने युवाओं के बहाने सरकार, विपक्ष और पूरे सिस्टम को आईना दिखाया?

कॉकरोच आंदोलन के पीछे बड़ी साजिश? 180 इन्फ्लुएंसर्स के वायरल दावे से गरमाई सियासत, सोशल मीडिया की भूमिका पर उठे सवाल

‘जिंदा चमड़े का सप्लायर’… आरजेडी के भीतर आखिर किस ओर इशारा कर गए भाई वीरेंद्र? तेजस्वी यादव के सामने खड़े हुए कई बड़े सवाल

शेख हसीना के ऐलान से बांग्लादेश में बढ़ी सियासी हलचल, भारत ने दिया ये बयान

12 अगस्त को लॉन्च होगा Google Pixel 11 Pro Fold! लॉन्च से पहले लीक हुआ डिजाइन

Recommended Stories

मोहन भागवत का सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश: क्या संघ प्रमुख ने युवाओं के बहाने सरकार, विपक्ष और पूरे सिस्टम को आईना दिखाया?

कॉकरोच आंदोलन के पीछे बड़ी साजिश? 180 इन्फ्लुएंसर्स के वायरल दावे से गरमाई सियासत, सोशल मीडिया की भूमिका पर उठे सवाल

‘जिंदा चमड़े का सप्लायर’… आरजेडी के भीतर आखिर किस ओर इशारा कर गए भाई वीरेंद्र? तेजस्वी यादव के सामने खड़े हुए कई बड़े सवाल

शेख हसीना के ऐलान से बांग्लादेश में बढ़ी सियासी हलचल, भारत ने दिया ये बयान

12 अगस्त को लॉन्च होगा Google Pixel 11 Pro Fold! लॉन्च से पहले लीक हुआ डिजाइन