“तथ्यों पर बहस कीजिए, पत्रकारों पर बेबुनियाद आरोप लगाना बंद कीजिए”
राम मंदिर से जुड़े मुद्दे पर BHARAT अपडेट की लाइव डिबेट के दौरान मीडिया को ‘भोंपू’ और ‘गोदी मीडिया’ कहे जाने पर चैनल के मैनेजिंग एडिटर प्रेम शंकर सिंह ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में मीडिया की आलोचना करना सभी का अधिकार है, लेकिन बिना किसी तथ्य या प्रमाण के पूरे मीडिया और पत्रकारों को अपमानित करना स्वीकार्य नहीं हो सकता।
डिबेट का विषय “असली और नकली रामभक्त” था। चर्चा के दौरान समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव के उस बयान का भी उल्लेख किया गया, जिसमें उन्होंने बाबरी मस्जिद गिराने वालों पर गोली चलाए जाने की बात कही थी। इसी मुद्दे पर बहस के दौरान समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता ने सवालों का जवाब देने के बजाय मीडिया पर निशाना साधते हुए ‘गोदी मीडिया’ और ‘भोंपू’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया।
इस पर प्रेम शंकर सिंह ने स्पष्ट कहा कि यदि किसी राजनीतिक दल को भारतीय जनता पार्टी से सवाल पूछने हैं तो उसके लिए मंच पर बीजेपी का प्रवक्ता मौजूद है। मीडिया को बीच में घसीटना और उसे राजनीतिक बहस का निशाना बनाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि मीडिया केवल सार्वजनिक बयानों और तथ्यों को जनता के सामने रखता है।
प्रेम शंकर सिंह ने सपा प्रवक्ता से कहा कि यदि उनके पास मीडिया के खिलाफ कोई ठोस प्रमाण है तो उसे सार्वजनिक करें। लेकिन बिना किसी सबूत के पूरे मीडिया को पक्षपाती बताना और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करना लोकतांत्रिक संवाद की मर्यादा के खिलाफ है। उन्होंने सपा प्रवक्ता से ‘भोंपू’ शब्द पर खेद व्यक्त करने और अपने शब्द वापस लेने की भी मांग की।
उन्होंने अपने 25 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने हर सरकार से सवाल पूछे हैं और हमेशा निष्पक्ष पत्रकारिता की है। उन्होंने कहा, “यदि कोई एक भी ऐसा तथ्य, वीडियो या उदाहरण सामने रख दे, जिससे यह साबित हो जाए कि BHARAT अपडेट ने बिना तथ्यों के किसी सरकार का पक्ष लिया है या एकतरफा पत्रकारिता की है, तो मैं पत्रकारिता छोड़ने को तैयार हूं। लेकिन यदि ऐसा कोई प्रमाण नहीं है, तो बेबुनियाद आरोप लगाने वालों को भी अपने शब्दों पर खेद जताना चाहिए।”
बहस के दौरान जब सपा प्रवक्ता ने कहा कि मीडिया को सरकार से सवाल पूछने चाहिए, तब प्रेम शंकर सिंह ने जवाब दिया कि मीडिया अपनी जिम्मेदारी पूरी ईमानदारी से निभा रहा है और आगे भी निभाता रहेगा। उन्होंने कहा कि सत्ता हो या विपक्ष, मीडिया का काम दोनों से सवाल पूछना है। यही लोकतंत्र और निष्पक्ष पत्रकारिता की पहचान है।
Full Video Link – https://youtu.be/YTVP61Y-P0o?si=NfftQSWrjOqAmIm7
उन्होंने कहा कि पत्रकारों और एंकरों का अपमान करने का अधिकार किसी भी राजनीतिक दल या उसके प्रवक्ता को नहीं है। यदि किसी के पास तथ्य हैं तो उन्हें सामने रखा जाना चाहिए, लेकिन पूरे मीडिया को कटघरे में खड़ा करना उचित नहीं है।
प्रेम शंकर सिंह ने कहा कि यदि मीडिया वास्तव में किसी एक पक्ष का ‘भोंपू’ होती, तो राम मंदिर चंदा विवाद जैसे मामलों पर लगातार सवाल नहीं उठाती। मीडिया ने इस मुद्दे पर सभी पक्षों से जवाब मांगे और पूरे मामले को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि मीडिया ने हर उस विषय पर सवाल किए हैं जहां जनता का हित जुड़ा है, चाहे मामला सरकार से संबंधित हो या विपक्ष से।
उन्होंने समाजवादी पार्टी सहित सभी राजनीतिक दलों से सकारात्मक राजनीति करने की अपील करते हुए कहा कि मीडिया किसी राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि जनता का मंच है। BHARAT अपडेट का उद्देश्य किसी विचारधारा का समर्थन करना नहीं, बल्कि हर पक्ष को तथ्यों के साथ जनता के सामने रखना है।
लाइव डिबेट के दौरान प्रेम शंकर सिंह की स्पष्ट, तथ्यपरक और संतुलित टिप्पणी को दर्शकों ने भी सराहा। सोशल मीडिया पर भी बड़ी संख्या में लोगों ने मीडिया की गरिमा और निष्पक्ष पत्रकारिता के समर्थन में अपनी प्रतिक्रिया दी।
BHARAT अपडेट ने एक बार फिर दोहराया कि चैनल निष्पक्ष, निर्भीक और तथ्य-आधारित पत्रकारिता के अपने मूल सिद्धांतों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। लोकतंत्र में सवाल पूछना मीडिया का दायित्व है और यह दायित्व सत्ता तथा विपक्ष—दोनों के प्रति समान रूप से निभाया जाता रहेगा। तथ्यों पर आधारित हर बहस का स्वागत है, लेकिन पत्रकारों और मीडिया संस्थानों के प्रति अपमानजनक भाषा तथा निराधार आरोप किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हैं।


