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अमेरिका-ईरान के बीच भीषण युद्ध! कुवैत से बहरीन तक तबाही, दोबारा जंग शुरू होने के क्या हैं कारण?

US-Iran War

पश्चिम एशिया (Middle East) एक बार फिर बारूद के ढेर पर बैठ गया है, अमेरिका और ईरान के बीच का तनाव अब एक बेहद खतरनाक और सीधे सैन्य युद्ध में तब्दील हो चुका है।

पश्चिम एशिया (Middle East) एक बार फिर बारूद के ढेर पर बैठ गया है। अमेरिका और ईरान के बीच का तनाव अब एक बेहद खतरनाक और सीधे सैन्य युद्ध में तब्दील हो चुका है। दोनों परमाणु संपन्न और शक्तिशाली देश एक-दूसरे पर ताबड़तोड़ मिसाइल और हवाई हमले कर रहे हैं। ताजा घटनाक्रम में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के कड़े रुख के बाद अमेरिकी वायुसेना ने ईरान के भीतर घुसकर उसके रणनीतिक और सैन्य ठिकानों पर भीषण अटैक किए हैं।

इसके जवाब में ईरान के ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) ने भयंकर पलटवार करते हुए कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सेना के प्रमुख एयरबेस और मुख्यालयों पर दर्जनों बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन दाग दिए हैं। इस युद्ध की वजह से कुवैत से लेकर बहरीन तक हवाई हमलों के सायरन गूंज रहे हैं और पूरी दुनिया में तीसरे विश्व युद्ध का खतरा मंडराने लगा है।

अचानक क्यों भड़की युद्ध की चिंगारी? (Strait of Hormuz का मुख्य विवाद)

इस ताजा युद्ध की मुख्य और तात्कालिक वजह स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) में पिछले कुछ दिनों से जारी समुद्री टकराव है। दरअसल, यह दुनिया का सबसे संवेदनशील समुद्री जलमार्ग है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का करीब पांचवां हिस्सा गुजरता है। हाल ही में ईरान द्वारा ओमान के तट के पास कुछ व्यावसायिक तेल टैंकरों और जहाजों पर किए गए हमलों के बाद तनाव चरम पर पहुंच गया。

अमेरिका ने ईरान के इस कदम को दोनों देशों के बीच हुए हालिया युद्धविराम समझौते (Ceasefire Agreement) का खुला उल्लंघन बताया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, उन्होंने ईरान की उन क्षमताओं को नष्ट करने के लिए हवाई हमले शुरू किए, जो अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग में जहाजों की आवाजाही के लिए खतरा पैदा कर रही थीं।

अमेरिका के हमले के बाद ईरान का कुवैत और बहरीन पर भीषण पलटवार

अमेरिकी हमलों के कुछ ही घंटों के भीतर ईरान ने अपनी सैन्य जिद दिखाते हुए खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। ईरान की अर्धसैनिक फोर्स IRGC ने आधिकारिक बयान जारी कर कुवैत में स्थित अमेरिकी सेना के ‘कैंप आरिफजान’ (Camp Arifjan) और ‘अली अल सलेम एयर बेस’ (Ali Al Salem Air Base) पर ताबड़तोड़ हमले किए。

इसके अलावा बहरीन में मौजूद अमेरिकी नौसेना के सबसे महत्वपूर्ण 5वें बेड़े (US Navy’s 5th Fleet) के मुख्यालय ‘जुफैर’ और ‘शेख ईसा’ बेस को भी ईरान ने निशाना बनाया। कुवैत और बहरीन की डिफेंस प्रणालियों ने कई ईरानी मिसाइलों और ड्रोन को हवा में ही इंटरसेप्ट करने का दावा किया है, लेकिन इस भीषण गोलाबारी से पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल है।

Coercive Diplomacy और Brinkmanship का खतरनाक मिश्रण

अंतरराष्ट्रीय राजनीति और कूटनीति के विशेषज्ञों का मानना है कि यह युद्ध केवल जमीन कब्जाने का नहीं, बल्कि ‘कोअर्सिव डिप्लोमेसी’ (Coercive Diplomacy – ताकत दिखाकर बात मनवाना) और ‘ब्रिंकमैनशिप’ (Brinkmanship – युद्ध के मुहाने तक जाकर विरोधी को डराना) का एक क्लासिक और खतरनाक उदाहरण है।

दोनों ही देश बातचीत की मेज पर खुद को कमजोर नहीं दिखाना चाहते। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प चाहते हैं कि ईरान उनके कड़े आर्थिक और सैन्य दबाव के आगे घुटने टेक दे और अपने परमाणु कार्यक्रम व यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) को पूरी तरह हमेशा के लिए रोक दे। वहीं, ईरान की घरेलू राजनीति और वहां का सैन्य नेतृत्व अब अपनी जिद पर अड़ गया है कि वे किसी भी अमेरिकी धमकी के आगे झुकने वाले नहीं हैं।

क्या ट्रम्प पर है इजरायल का भारी दबाव?

इस युद्ध के पीछे की एक बड़ी रणनीतिक वजह इजरायल और अमेरिका की अटूट साझेदारी को भी माना जा रहा है। इजरायल लंबे समय से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को अपने अस्तित्व के लिए सबसे बड़ा और सीधा खतरा बताता रहा है। इजरायल का मानना है कि यदि ईरान ने परमाणु बम बना लिया, तो पूरे मिडल ईस्ट में शक्ति संतुलन बिगड़ जाएगा।

ऐसे में अमेरिकी प्रशासन पर इजरायल की सुरक्षा चिंताओं का गहरा असर होना स्वाभाविक है। हालांकि अमेरिका इसे अपने राष्ट्रीय हितों और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार की सुरक्षा से जोड़कर देख रहा है, लेकिन पर्दे के पीछे इजरायल और अमेरिका की यह मजबूत रणनीतिक जुगलबंदी ईरान को चारों तरफ से घेरने की नीति पर काम कर रही है।

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तेल का खेल: क्या ईरान नहीं चाहता कीमतों का गिरना?

इस युद्ध का एक बहुत बड़ा आर्थिक पहलू भी है। ईरान की पूरी अर्थव्यवस्था और उसकी रीढ़ काफी हद तक कच्चे तेल (Crude Oil) के निर्यात पर टिकी हुई है। अमेरिका द्वारा लगाए गए कड़े प्रतिबंधों के कारण ईरान वैध तरीके से तेल नहीं बेच पा रहा था। ऐसे में जब भी खाड़ी क्षेत्र में युद्ध जैसे हालात बनते हैं, वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें अचानक आसमान छूने लगती हैं。

तेल की ऊंची कीमतें ईरान को ब्लैक मार्केट या अन्य रास्तों से तेल बेचने पर भारी आर्थिक मुनाफा कमाने का मौका देती हैं। हॉर्मुज जलमार्ग को ब्लॉक करने की धमकी देकर ईरान दुनिया को यह संदेश देना चाहता है कि यदि उसकी अर्थव्यवस्था को चोट पहुंचाई गई, तो वह पूरी दुनिया की ऊर्जा सप्लाई चेन को ठप कर देगा।

अमेरिकी और ईरानी घरेलू राजनीति का प्रभाव

इस युद्ध के समय को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं। अमेरिका में राजनीतिक और चुनावी माहौल के दौरान हमेशा से राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख एक बड़ा मुद्दा रहता है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के लिए वैश्विक मंच पर एक “मजबूत और सख्त कमांडर-इन-चीफ” की छवि दिखाना उनकी घरेलू राजनीति के लिए बेहद फायदेमंद साबित होता है।

दूसरी ओर, ईरान में भी हाल ही में हुए बड़े राजनीतिक बदलावों और नेतृत्व संकट के बीच वहां की सेना और धार्मिक नेतृत्व (IRGC) जनता को यह दिखाना चाहता है कि वे देश की संप्रभुता से कोई समझौता नहीं कर रहे हैं। शांति और शक्ति की इस राजनीति ने दोनों देशों को एक ऐसे युद्ध में झोंक दिया है जहां से पीछे हटना दोनों के स्वाभिमान के खिलाफ होगा।

अमेरिका-ईरान युद्ध के मुख्य बिंदु (At a Glance)

मुख्य कारकविवरण और प्रभाव
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज का संकटदुनिया के 20% तेल परिवहन वाले मार्ग पर नियंत्रण को लेकर टकराव।
अमेरिकी एयर स्ट्राइकअमेरिका द्वारा ईरान के तटीय रडार और नौसैनिक ठिकानों पर बमबारी।
ईरान का पलटवारकुवैत (कैंप आरिफजान) और बहरीन (5वें बेड़े) में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल दागना।
आर्थिक परिणामतेल की कीमतों में भारी उछाल और वैश्विक शेयर बाजारों में भारी गिरावट।
परमाणु गतिरोधईरान द्वारा यूरेनियम संवर्धन जारी रखने और ट्रम्प द्वारा उसे रोकने की जिद।

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