‘E20 कार दो या पूरे पैसे लौटाओ’ आदेश के खिलाफ हाई कोर्ट जाएगी Maruti Suzuki

रायपुर जिला उपभोक्ता आयोग द्वारा ग्रैंड विटारा को लेकर दिए गए फैसले को अब मारुति सुजुकी बड़ी अदालत में चुनौती देगी।
Maruti Suzuki
रायपुर कंज्यूमर कोर्ट के फैसले को चुनौती देगी Maruti Suzuki

Maruti Suzuki News: रायपुर जिला उपभोक्ता आयोग द्वारा ग्रैंड विटारा को लेकर दिए गए फैसले को अब मारुति सुजुकी बड़ी अदालत में चुनौती देगी। कंपनी का कहना है कि ग्राहक को बेची गई कार पूरी तरह E20 कम्पैटिबल थी और उपभोक्ता आयोग के आदेश में कई महत्वपूर्ण तथ्यों पर पर्याप्त विचार नहीं किया गया।

कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील करेगी मारुति

मारुति सुजुकी ने कहा है कि वह रायपुर कंज्यूमर कोर्ट के आदेश को उच्च मंच पर चुनौती देगी। उपभोक्ता आयोग ने कंपनी को निर्देश दिया था कि वह ग्राहक को नई E20 कम्प्लायंट ग्रैंड विटारा उपलब्ध कराए या फिर कार की पूरी कीमत वापस करे।

कंपनी का दावा है कि संबंधित वाहन E20 ईंधन के अनुरूप था और इसकी जानकारी वाहन के यूजर मैन्युअल में भी स्पष्ट रूप से दी गई थी। मारुति का कहना है कि जांच के दौरान वाहन में मिलावटी ईंधन (Adulterated Fuel) इस्तेमाल होने के संकेत मिले थे, लेकिन आयोग के आदेश में इन तथ्यों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया।

क्या है पूरा मामला?

रायपुर निवासी डॉक्टर प्रेमराज डेब्टा ने जून 2024 में नेक्सा डीलरशिप से मारुति ग्रैंड विटारा स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड जेटा प्लस वेरिएंट खरीदा था। उनका आरोप है कि डीलरशिप ने वाहन को दिसंबर 2023 में निर्मित बताया, जबकि बाद में उन्हें जानकारी मिली कि कार का निर्माण जनवरी 2023 में हुआ था।

नवंबर 2024 में कार के डैशबोर्ड पर इंजन मालफंक्शन का संकेत आने के बाद वाहन को सर्विस सेंटर ले जाया गया। डीलरशिप ने कथित तौर पर खराबी की वजह मिलावटी पेट्रोल बताई और ईंधन टैंक खाली कर दोबारा फ्यूल भरवाया गया।

बार-बार आई खराबी, इंजन बदलने का दिया गया अनुमान

ग्राहक का कहना है कि समस्या बार-बार सामने आती रही और कार करीब एक महीने तक वर्कशॉप में खड़ी रही। बाद में डीलरशिप ने ईमेल के जरिए बताया कि मिलावटी ईंधन के कारण इंजन खराब हो गया है और उसे बदलना होगा, जिसकी अनुमानित लागत करीब 5.30 लाख रुपये होगी। कंपनी ने यह भी कहा कि यह खर्च वारंटी के दायरे में नहीं आएगा।

कोर्ट ने ग्राहक के पक्ष में सुनाया फैसला

मामला रायपुर जिला उपभोक्ता आयोग पहुंचा, जहां कंपनी और डीलरशिप ने दोहराया कि वाहन E20 ईंधन के अनुरूप है। हालांकि आयोग कंपनी की दलीलों से संतुष्ट नहीं हुआ।

अपने आदेश में आयोग ने मारुति सुजुकी को निर्देश दिया कि वह ग्राहक को नई E20 कम्प्लायंट कार उपलब्ध कराए या फिर वाहन की पूरी कीमत, करीब 20.5 लाख रुपये, वापस करे। साथ ही मानसिक प्रताड़ना के लिए 1 लाख रुपये और मुकदमे के खर्च के लिए 10 हजार रुपये देने का भी आदेश दिया।

अब उच्च अदालत में होगी कानूनी लड़ाई

मारुति सुजुकी ने स्पष्ट किया है कि वह इस फैसले के खिलाफ अपील करेगी। ऐसे में अब यह मामला उच्च उपभोक्ता आयोग या सक्षम अदालत में जाएगा, जहां दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अंतिम फैसला होगा।

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