Kaushambi Blast: उत्तर प्रदेश के कौशाम्बी में अवैध पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट ने कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। पिपरी थाना क्षेत्र के मनोरी में हुए इस हादसे का सबसे दर्दनाक असर मीरपुर गांव के गया प्रसाद साहू के परिवार पर पड़ा। धमाके में गया प्रसाद का मकान भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त होकर ढह गया। मलबे में दबने से उनके चार बच्चों की मौत हो गई, जबकि उनकी पत्नी गंभीर रूप से घायल हैं और प्रयागराज के SRN अस्पताल में इलाज चल रहा है।
एक ही परिवार के चार बच्चों की मौत
हादसे के बाद जब बच्चों के शव मीरपुर गांव पहुंचे तो पूरे इलाके में मातम छा गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। गुस्साए परिवारवालों ने बच्चों के शव सड़क पर रखकर प्रदर्शन किया और हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।
मृतकों की पहचान 15 वर्षीय जान्ह्वी, 10 वर्षीय आदित्य, 7 वर्षीय रवि और 2 वर्षीय अमित के रूप में हुई है। एक ही परिवार के चार बच्चों की मौत ने पूरे गांव को झकझोर दिया है।
पटाखा फैक्ट्री के बगल में था गया प्रसाद का मकान
बताया जा रहा है कि गया प्रसाद साहू का घर पटाखा फैक्ट्री के ठीक बगल में स्थित था। फैक्ट्री में हुए जोरदार विस्फोट के कारण आसपास के इलाके में भारी तबाही हुई। धमाके की चपेट में आने से गया प्रसाद का मकान भी ढह गया और उसके मलबे में उनके चार बच्चे दब गए।
हादसे में गया प्रसाद की पत्नी भी गंभीर रूप से घायल हुई हैं। उन्हें इलाज के लिए प्रयागराज के SRN अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी हालत को लेकर डॉक्टर लगातार निगरानी कर रहे हैं।
छह लोगों के खिलाफ केस, तीन गिरफ्तार
हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे। गया प्रसाद की शिकायत के आधार पर छह लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने अब तक तीन आरोपियों को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी दी है।
इनमें पटाखा फैक्ट्री का संचालक नौशाद अली भी शामिल है। पुलिस के मुताबिक, नौशाद की गिरफ्तारी के दौरान मुठभेड़ हुई, जिसमें उसके पैर में गोली लगी। घायल नौशाद को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
हादसे में अब तक 12 लोगों की मौत
पटाखा फैक्ट्री विस्फोट में मृतकों की संख्या अब बढ़कर 12 हो गई है। हादसे में घायल 45 वर्षीय राजेश की भी प्रयागराज के SRN अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। मेडिकल कॉलेज के मीडिया प्रभारी डॉ. संतोष सिंह ने राजेश की मौत की पुष्टि की है।
वहीं, हादसे में घायल अन्य लोगों का अस्पतालों में इलाज जारी है। प्रशासन की ओर से राहत और बचाव कार्य के साथ-साथ हादसे की जांच भी की जा रही है।
नौशाद के एनकाउंटर पर भी सवाल
पटाखा फैक्ट्री विस्फोट के आरोपी नौशाद अली के पुलिस मुठभेड़ में घायल होने का मामला भी अब चर्चा में है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ता डॉ. गजेंद्र सिंह यादव ने इस संबंध में उत्तर प्रदेश राज्य मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कराई है।
शिकायत में मुठभेड़ की परिस्थितियों की स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की गई है। अधिवक्ता का कहना है कि किसी व्यक्ति पर गंभीर आरोप होना अलग विषय है और पुलिस मुठभेड़ में उसके घायल होने की परिस्थितियों की जांच अलग विषय।
CCTV और फोरेंसिक जांच की मांग
शिकायत में यह भी मांग की गई है कि यह जांच की जाए कि क्या नौशाद ने वास्तव में पुलिस टीम पर गोली चलाई थी। इसके लिए घटनास्थल से मिले कथित कारतूस, खोखे और अन्य भौतिक साक्ष्यों की जांच कराने की मांग की गई है।
इसके अलावा पुलिस के हथियारों और कारतूसों की फोरेंसिक एवं बैलिस्टिक जांच, पुलिस डायरी और वायरलेस लॉग की पड़ताल तथा मुठभेड़ में शामिल पुलिसकर्मियों के बयान दर्ज करने की मांग की गई है।
शिकायतकर्ता ने घटनास्थल और आसपास के CCTV फुटेज, मोबाइल वीडियो और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान सुरक्षित रखने की भी मांग की है। घायल नौशाद का स्वतंत्र मेडिकल परीक्षण कराने और उसकी चोटों से जुड़े सभी रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की बात भी कही गई है।
जांच से ही साफ होगी पूरी तस्वीर
अधिवक्ता ने स्पष्ट किया है कि शिकायत का उद्देश्य आरोपी को निर्दोष साबित करना नहीं है। उनका कहना है कि यदि पुलिस का दावा सही है तो निष्पक्ष जांच से वह और मजबूत होकर सामने आएगा। वहीं, अगर किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन हुआ है तो उसकी जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।
कौशाम्बी के इस हादसे में एक परिवार के चार बच्चों की मौत ने सुरक्षा व्यवस्था और अवैध पटाखा निर्माण को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब जांच में यह सामने आना बाकी है कि फैक्ट्री में सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था या नहीं और आखिर इस भीषण हादसे के लिए जिम्मेदार कौन-कौन लोग हैं।