सुप्रीम कोर्ट के हालिया रुख के बावजूद काक्रोच जनता पार्टी (CJP) सरकार की कार्रवाई से संतुष्ट नजर नहीं आ रही है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि आपराधिक पृष्ठभूमि वाले प्रदर्शनकारियों के मामले में नरमी नहीं बरती जा सकती, लेकिन CJP सभी प्रदर्शनकारियों की रिहाई की मांग पर कायम है। पार्टी का कहना है कि सरकार की ओर से लाया गया एंटी पेपर लीक कानून भी पर्याप्त नहीं है। ऐसे में संगठन अब अपने अगले आंदोलन की रणनीति बनाने में जुटा दिखाई दे रहा है।
CJP लगातार सरकार, पुलिस और प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठा रही है। पार्टी का आरोप है कि सरकार की घोषणाओं के बावजूद प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई पूरी तरह नहीं रुकी है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भी उसने असहमति जताई है। संगठन का कहना है कि जिन छात्रों और युवाओं ने आंदोलन में हिस्सा लिया, उनके साथ समान व्यवहार होना चाहिए।
एंटी पेपर लीक कानून पर भी असहमति
पेपर लीक रोकने के लिए केंद्र सरकार ने सख्त कानून लाने की पहल की है और संबंधित विधेयक लोकसभा से पारित भी हो चुका है। इसके बावजूद CJP इसे पर्याप्त नहीं मानती। पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष रांका का कहना है कि सरकार को पहले उन सुझावों पर अमल करना चाहिए जो संगठन ने परीक्षा प्रणाली में सुधार, परीक्षा पैटर्न और कोचिंग संस्थानों के नियमन को लेकर दिए थे।
हालांकि सरकार पहले ही परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए विशेषज्ञ समिति गठित कर चुकी है, लेकिन CJP का मानना है कि व्यापक बदलाव के बिना समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है।
क्या आंदोलन का दायरा बढ़ाने की तैयारी?
CJP अब सिर्फ छात्रों तक सीमित रहने के बजाय दूसरे सामाजिक समूहों को भी अपने साथ जोड़ने की कोशिश करती दिखाई दे रही है। किसान संगठनों से बढ़ते संवाद और विभिन्न समूहों के साथ बैठकों को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि विभिन्न आंदोलनों के बीच समन्वय बनता है, तो सरकार पर दबाव बढ़ सकता है।
सरकार अब दबाव में नहीं दिखना चाहती
सरकार ने आंदोलन के दौरान कई अहम कदम उठाए। तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, गिरफ्तार छात्रों को राहत और जांच संबंधी फैसलों को सरकार अपनी संवेदनशीलता के तौर पर पेश कर रही है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने भी कुछ मामलों में सरकार की कार्रवाई की समीक्षा का रास्ता खुला रखा है।
इसके बावजूद CJP का कहना है कि उसकी प्रमुख मांगें अभी पूरी नहीं हुई हैं। दूसरी ओर, सरकार के समर्थकों का एक वर्ग मानता है कि अब लगातार दबाव की राजनीति को स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए।
विपक्ष की रणनीति भी बदलती नजर आ रही है
विपक्षी दल CJP के कई मुद्दों का समर्थन करते दिखाई दे रहे हैं, लेकिन आंदोलन में उनकी भूमिका सीमित रही है। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल संसद के भीतर सरकार को घेरने की रणनीति पर ज्यादा जोर दे रहे हैं, जबकि सड़क पर चल रहे आंदोलनों से उन्होंने सीमित दूरी बनाए रखी है।
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पहले भी केंद्र सरकार के भविष्य को लेकर राजनीतिक बयान दे चुके हैं। ऐसे में विपक्ष सरकार को घेरने के लिए संसद और जन आंदोलनों—दोनों मोर्चों पर सक्रिय रहने की कोशिश कर रहा है। हालांकि अंतिम फैसला जनता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के जरिए ही तय होगा कि इन राजनीतिक घटनाक्रमों का भविष्य की राजनीति पर कितना असर पड़ता है।