नई दिल्ली: उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में अदालत ने शुक्रवार को बड़ा फैसला सुनाते हुए ताहिर हुसैन समेत पांच दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। सजा सुनाते हुए अदालत ने कहा कि यह एक अत्यंत गंभीर और समाज को झकझोर देने वाली घटना थी।
अदालत ने क्या कहा?
सजा सुनाते हुए अदालत ने कहा कि अंकित शर्मा की बेहद बर्बर तरीके से हत्या की गई और उनके शव के साथ अमानवीय व्यवहार किया गया। अदालत ने टिप्पणी की कि अपराध को अंजाम देने का तरीका अत्यंत क्रूर था और इस घटना ने पूरे समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया।
कोर्ट ने कहा कि हमला इतना भीषण और निर्मम था कि पीड़ित की मौत के बाद भी शव को घसीटकर चांद बाग ले जाया गया और नाले में फेंक दिया गया।
23 जुलाई को ठहराया गया था दोषी
इस मामले में 23 जुलाई 2026 को अदालत ने ताहिर हुसैन, नजीम, कासिम, अनस और जावेद को दोषी करार दिया था। इसके बाद सजा पर सुनवाई हुई, जिसमें अदालत ने सभी दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई।
पुलिस ने मांगी थी फांसी की सजा
सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस और पीड़ित परिवार ने सभी दोषियों के लिए मृत्युदंड की मांग की थी। पुलिस ने अदालत में दलील दी थी कि यह ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर‘ श्रेणी का मामला है।
दिल्ली पुलिस के अनुसार, अंकित शर्मा के शरीर पर 51 चोटों के निशान मिले थे, जिनमें 7 घाव घातक थे। इनमें से 16 घाव धारदार हथियारों से किए गए थे। पुलिस ने यह भी कहा कि मौत के बाद भी शव के साथ बर्बरता की गई थी।
बचाव पक्ष ने किया था विरोध
ताहिर हुसैन की ओर से पेश वकील ने मृत्युदंड की मांग का विरोध करते हुए कहा था कि ताहिर हुसैन ने स्वयं पुलिस को फोन किया था। बचाव पक्ष का तर्क था कि केवल शरीर पर मौजूद घावों की संख्या के आधार पर किसी मामले को मृत्युदंड योग्य नहीं माना जा सकता।
हालांकि, दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई।
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