Taslima Nasreen on Bangladesh Hindus: बांग्लादेश की निर्वासित लेखिका तसलीमा नसरीन ने देश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों को लेकर तीखी टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में सत्ता बदलने के बावजूद अल्पसंख्यकों की स्थिति में कोई बड़ा सुधार नहीं हुआ है। तसलीमा का दावा है कि चाहे तारिक रहमान का दौर हो या मुहम्मद यूनुस का शासन, हिंदुओं और महिलाओं के खिलाफ भेदभाव और हिंसा की घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं।
मदरसों और कट्टरपंथ पर क्या बोलीं तसलीमा?
भारत दौरे के दौरान दिए गए एक इंटरव्यू में तसलीमा नसरीन ने कहा कि बांग्लादेश के कई मदरसों में गैर-मुस्लिमों के खिलाफ नफरत का माहौल तैयार किया जाता है। उनके मुताबिक, जब स्वतंत्र विचार रखने वाले लोगों या अल्पसंख्यकों पर हमले होते हैं, तब दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति नहीं दिखाई देती। उन्होंने कहा कि देश को नए मंदिरों या मदरसों की नहीं, बल्कि आधुनिक और वैज्ञानिक शिक्षा की जरूरत है, जिससे समाज में समानता, सहिष्णुता और लोकतांत्रिक मूल्यों को बढ़ावा मिल सके।
40 साल से कर रहीं UCC की वकालत
तसलीमा नसरीन ने महिलाओं के अधिकारों की बात करते हुए समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि वह पिछले 40 वर्षों से इसकी वकालत कर रही हैं। उनका कहना है कि धर्म आधारित व्यक्तिगत कानूनों के कारण महिलाओं को समान अधिकार नहीं मिलते। उन्होंने दावा किया कि बांग्लादेश में बेटियों को संपत्ति में बराबरी का अधिकार नहीं मिलता और कई धार्मिक कानून महिलाओं के अधिकारों को सीमित करते हैं।
धर्म की आलोचना के कारण छोड़ना पड़ा देश
तसलीमा नसरीन ने कहा कि धार्मिक कट्टरपंथ की आलोचना करने की वजह से उन्हें अपना देश छोड़ना पड़ा। उन्होंने बताया कि उनके खिलाफ फतवे जारी किए गए और उन्हें जान से मारने की धमकियां मिलीं। इसके बावजूद वह महिलाओं, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए लगातार आवाज उठाती रही हैं।
क्या है पूरा विवाद?
तसलीमा नसरीन के ये बयान ऐसे समय आए हैं जब बांग्लादेश में हिंदू समुदाय और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर लगातार बहस जारी है। विभिन्न मानवाधिकार संगठनों ने भी समय-समय पर अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की घटनाओं पर चिंता जताई है। वहीं, इन घटनाओं को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दलों और सरकारी पक्ष की अपनी-अपनी व्याख्याएं हैं। ऐसे मामलों में स्थिति का आकलन आधिकारिक जांच, स्वतंत्र रिपोर्टों और विश्वसनीय तथ्यों के आधार पर करना महत्वपूर्ण माना जाता है।