नई दिल्ली: FCRA संशोधन विधेयक, 2026 को लेकर बुधवार को लोकसभा में एक बार फिर जोरदार हंगामा देखने को मिला। विपक्षी दलों ने बिल को वापस लेने की मांग की, जबकि सरकार इसे आगे की जांच के लिए संसद की संयुक्त समिति (JPC) के पास भेजने की तैयारी में है। इसी दौरान समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के बीच तीखी बहस देखने को मिली।
अखिलेश यादव ने उठाए सवाल
लोकसभा में चर्चा के दौरान अखिलेश यादव ने सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि FCRA संशोधन विधेयक अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार अब तक जो विधेयक लेकर आई है, उनमें कितने ऐसे हैं जिनका असर अल्पसंख्यकों पर नहीं पड़ा है। अखिलेश यादव के सवाल पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने उन्हें खुली चुनौती देते हुए कहा कि वह बिल के किसी भी प्रावधान की ओर इशारा करें, जो अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो।
‘बिल में अल्पसंख्यकों के खिलाफ कुछ भी नहीं’
किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसी भी समुदाय को निशाना बनाना नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर विपक्ष को विधेयक के किसी प्रावधान पर आपत्ति है तो वह संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के सामने अपनी बात रख सकता है। रिजिजू ने कहा कि JPC में विपक्ष को अपनी बात रखने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा और जरूरत पड़ने पर अन्य लोगों को भी सुनवाई के लिए बुलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसी अल्पसंख्यक या समुदाय को निशाना बनाने का सवाल ही नहीं है।
JPC को भेजे जाने पर भी विपक्ष का विरोध
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जब किसी विधेयक को JPC के पास भेजा जाता है तो सामान्य तौर पर विपक्ष इसका स्वागत करता है, लेकिन इस मामले में इसके उलट विरोध किया जा रहा है। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया। रिजिजू के मुताबिक, FCRA में प्रस्तावित बदलावों का मकसद देश को सुरक्षित रखना और विदेशी अंशदान से जुड़े नियमों को मजबूत करना है। सरकार का दावा है कि इन प्रावधानों का उद्देश्य किसी खास समुदाय को निशाना बनाना नहीं है।
विपक्ष बिल वापस लेने की मांग पर अड़ा
FCRA संशोधन विधेयक को लेकर कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस (TMC), द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) और समाजवादी पार्टी समेत कई विपक्षी दल सरकार पर हमलावर हैं। विपक्ष विधेयक को वापस लेने की मांग कर रहा है, जबकि सरकार इसे JPC की जांच के लिए भेजने के पक्ष में है।
अब देखना होगा कि JPC में इस विधेयक को लेकर क्या सुझाव सामने आते हैं और सरकार आगे इसके प्रावधानों में कोई बदलाव करती है या नहीं।