नई दिल्ली: दक्षिण भारत के राज्यों ने अंतरराज्यीय जल विवादों को बातचीत के जरिए जल्द सुलझाने के केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के सुझाव का समर्थन किया है। गुरुवार को हुई दक्षिण क्षेत्रीय परिषद की 31वीं बैठक में जल विवादों के साथ लोकसभा सीटों के परिसीमन का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। दक्षिणी राज्यों ने आशंका जताई कि जनसंख्या के आधार पर परिसीमन होने पर उनका राजनीतिक प्रतिनिधित्व प्रभावित हो सकता है।
अमित शाह ने जल विवाद जल्द सुलझाने पर दिया जोर
बैठक की अध्यक्षता करते हुए अमित शाह ने कहा कि राज्यों के लिए अपने हितों की रक्षा करना स्वाभाविक है, लेकिन लंबे समय तक चलने वाले जल विवाद किसी के हित में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी राज्य को वर्षों तक पानी से वंचित रहना पड़े और पानी समुद्र में बहता रहे, तो इससे किसी राज्य का वास्तविक हित पूरा नहीं होता।
शाह ने ब्रह्मपुत्र से कावेरी और गोदावरी तक प्रमुख नदियों को जोड़ने की दिशा में काम करने की जरूरत बताई। उनके मुताबिक इससे भारत आने वाले लंबे समय तक पानी की कमी से बच सकता है और कई नए जलमार्ग भी विकसित किए जा सकते हैं।
परिसीमन पर दक्षिणी राज्यों ने क्या कहा?
बैठक में लोकसभा सीटों के संभावित परिसीमन को लेकर दक्षिणी राज्यों ने अपनी चिंता सामने रखी। उनका कहना है कि अगर जनसंख्या को मौजूदा आधार से अधिक महत्व दिया गया और सीटों का पुनर्वितरण हुआ, तो जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन किया है, उन्हें राजनीतिक प्रतिनिधित्व के मामले में नुकसान हो सकता है।
कर्नाटक और तमिलनाडु ने लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों की संख्या को अगले 25 वर्षों तक बरकरार रखने की मांग की। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद से प्रस्ताव पारित कर केंद्र से 1971 की जनगणना को परिसीमन का आधार बनाए रखने की मांग की। साथ ही उन्होंने महिलाओं के आरक्षण को मौजूदा सीटों के भीतर लागू करने की बात भी रखी।
मेकेदातु बांध पर तमिलनाडु को आश्वासन
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने तमिलनाडु को आश्वासन दिया कि मेकेदातु बांध परियोजना बनने की स्थिति में उसके हितों की रक्षा की जाएगी। उन्होंने कहा कि अमित शाह की मौजूदगी में तमिलनाडु और पुडुचेरी के हितों की सुरक्षा का भरोसा दिया गया है।
हालांकि, बैठक में कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच चल रहे कावेरी जल विवाद पर चर्चा नहीं हुई। तमिलनाडु के मंत्री ने स्पष्ट किया कि कावेरी जल बंटवारे या कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण से जुड़े मामलों को बैठक में नहीं उठाया गया।
चंद्रबाबू नायडू ने रखा बुलेट ट्रेन कॉरिडोर का प्रस्ताव
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु को जोड़ने वाले बुलेट ट्रेन कॉरिडोर का प्रस्ताव रखा। इसके अलावा अमरावती, बेंगलुरु और चेन्नई को जोड़ने वाले ट्रांजिट नेटवर्क का भी सुझाव दिया गया।
वहीं, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना ने परिसंपत्तियों और देनदारियों के बंटवारे से जुड़े लंबित मामलों को केंद्रीय गृह मंत्रालय के साथ बातचीत के जरिए सुलझाने पर सहमति जताई।
केरल ने मुल्लापेरियार बांध का मुद्दा उठाया
केरल की ओर से मुल्लापेरियार बांध का मुद्दा उठाया गया। राज्य ने स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे, पर्यावरण संरक्षण और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया।
तेलंगाना ने कृष्णा नदी के पानी पर मांगा अधिकार
तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमरका ने कृष्णा नदी के पानी पर राज्य के अधिकारों की सुरक्षा की मांग की। उन्होंने सिंचाई परियोजनाओं के लिए केंद्र से सहयोग की अपील भी की।
पुडुचेरी ने भी सालभर पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए केंद्र और पड़ोसी राज्यों, खासकर तमिलनाडु, के साथ सहयोग बढ़ाने की मांग की।
परिसीमन पर क्या हुआ?
बैठक में दक्षिणी राज्यों ने अपनी चिंताएं और मांगें केंद्र के सामने रखीं। खास तौर पर 543 लोकसभा सीटों को 25 वर्षों तक बरकरार रखने और 1971 की जनगणना को परिसीमन का आधार बनाए रखने की मांग प्रमुख रही। वहीं, जल विवादों को बातचीत और सहयोग के जरिए सुलझाने पर राज्यों ने सकारात्मक रुख दिखाया।