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105 साल के बुजुर्ग को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, उम्रकैद की बाकी सजा माफ कर बंद किया हत्या का केस

सुप्रीम कोर्ट ने 105 वर्षीय बुजुर्ग को मानवीय आधार पर बड़ी राहत दी है। उन्हें 68 साल की उम्र में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। बाद में 99 साल की उम्र में उन्होंने समय से पहले रिहाई की मांग की थी। अब कोर्ट ने उनकी 2024 की जमानत को अंतिम कर दिया और बची हुई सजा माफ कर दी, जिससे उन्हें दोबारा जेल नहीं जाना पड़ेगा।
105 साल के बुजुर्ग को सुप्रीम कोर्ट ने दी बड़ी राहत

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे 105 वर्षीय बुजुर्ग को बड़ी राहत दी है। अदालत ने उनकी अत्यधिक उम्र और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को ध्यान में रखते हुए उम्रकैद की बची हुई सजा माफ कर दी। इसके साथ ही 2024 में दिए गए अंतरिम जमानत के आदेश को भी पूर्ण और अंतिम कर दिया गया।

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने साफ किया कि अब बुजुर्ग को दोबारा जेल नहीं भेजा जाएगा। अदालत के इस फैसले के बाद वह बिना किसी कानूनी बंदिश के अपना बाकी जीवन गुजार सकेंगे।

क्या है पूरा मामला?

मामला पश्चिम बंगाल के मालदा जिले का है। साल 1920 में जन्मे रसिक चंद्र मंडल को वर्ष 1994 में हत्या के एक मामले में दोषी ठहराया गया था। उस समय उनकी उम्र करीब 68 वर्ष थी। मामले में उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।

कलकत्ता हाईकोर्ट से अपील खारिज होने के बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। उम्र बढ़ने के साथ उनकी सेहत भी लगातार खराब होती गई। करीब 99 वर्ष की उम्र में उन्होंने वृद्धावस्था और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का हवाला देते हुए समय से पहले रिहाई की मांग की थी।

2024 में मिली थी अंतरिम जमानत

मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2024 में रसिक चंद्र मंडल को अंतरिम जमानत दी थी। इसके बाद वह जेल से बाहर थे। अब अदालत ने उनकी उम्र, स्वास्थ्य और मामले की परिस्थितियों को देखते हुए इस राहत को स्थायी कर दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने मामले पर सुनवाई की। अदालत ने उनकी बची हुई उम्रकैद की सजा माफ करते हुए 2024 के अंतरिम जमानत आदेश को अंतिम रूप दे दिया।

इस फैसले का मतलब है कि रसिक चंद्र मंडल को अब अपनी बाकी जिंदगी जेल में नहीं बितानी होगी।

उम्र और स्वास्थ्य को देखते हुए मिली राहत

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला असाधारण परिस्थितियों में मानवीय आधार पर राहत देने का उदाहरण है। अदालत ने आरोपी की अत्यधिक उम्र और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को ध्यान में रखा। हालांकि उम्रकैद की सजा पूरी तरह समाप्त नहीं हुई थी, लेकिन अदालत ने शेष सजा को माफ करने का फैसला किया।

30 साल से ज्यादा चली कानूनी लड़ाई

रसिक चंद्र मंडल को 1994 में दोषी ठहराए जाने के बाद से इस मामले में लंबी कानूनी प्रक्रिया चली। हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। करीब तीन दशक से ज्यादा समय बाद अब शीर्ष अदालत के फैसले से इस मामले में उनके लिए कानूनी राहत का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले की अहम बातें

  • 105 वर्षीय रसिक चंद्र मंडल को बड़ी राहत मिली।
  • हत्या के मामले में उम्रकैद की बची हुई सजा माफ कर दी गई।
  • 2024 की अंतरिम जमानत को अंतिम रूप दिया गया।
  • अत्यधिक उम्र और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को ध्यान में रखा गया।
  • अदालत के आदेश के बाद उन्हें दोबारा जेल नहीं जाना होगा।

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