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राम मंदिर में ‘लेटर बम’! चंपत राय के 9 पन्नों में नृपेंद्र मिश्रा पर सवाल, पूर्व IAS का पलटवार

अयोध्या राम मंदिर निर्माण को लेकर चंपत राय के 9 पन्नों के बयान से नई बहस छिड़ गई है। इसमें उन्होंने दावा किया कि मंदिर निर्माण से जुड़े कई अहम फैसलों में नृपेंद्र मिश्रा की बड़ी भूमिका रही और उनकी सहमति के बिना फैसले मान्य नहीं होते थे। वहीं नृपेंद्र मिश्रा ने इस पत्र को लेकर कहा कि उन्होंने ऐसा कोई पत्र देखा ही नहीं है और पहले उसे देखने के बाद ही कुछ कहेंगे।
चंपत राय के 9 पन्नों में नृपेंद्र मिश्रा का जिक्र, पूर्व IAS ने दिया जवाब

अयोध्या के राम मंदिर से जुड़ी एक खबर ने मंदिर निर्माण से जुड़े दो प्रमुख चेहरों के बीच मतभेद की चर्चा को सामने ला दिया है। मामला चढ़ावा चोरी विवाद के बाद सामने आए चंपत राय के नाम से जुड़े करीब 9 पन्नों के एक बयान का है। इस बयान में राम मंदिर निर्माण समिति और उसके अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा की भूमिका को लेकर कई सवाल उठाए गए हैं।

हालांकि इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि नृपेंद्र मिश्रा ने इस पत्र या बयान को देखने से ही इनकार किया है। उनका कहना है कि जब तक वह खुद पत्र नहीं देख लेते, तब तक वह इसमें लगाए गए आरोपों पर कोई टिप्पणी नहीं कर सकते।

इसलिए फिलहाल सामने आए दस्तावेज में किए गए दावों को अंतिम सच मानना जल्दबाजी होगी। इस मामले में दस्तावेज की पुष्टि और संबंधित पक्ष का आधिकारिक जवाब बेहद जरूरी है।

चंपत राय के नाम से सामने आए 9 पन्नों में क्या है?

18 अगस्त की तारीख वाले करीब 9 पन्नों के एक बयान को चंपत राय से जोड़कर देखा जा रहा है। इसमें राम मंदिर निर्माण समिति के कामकाज और नृपेंद्र मिश्रा की भूमिका को लेकर कई सवाल उठाए गए हैं।

बयान में दावा किया गया है कि नृपेंद्र मिश्रा के सुझाव पर L&T को मंदिर निर्माण की जिम्मेदारी दी गई। साथ ही भवनों के डिजाइन और निर्माण से जुड़े काम के लिए नोएडा की एक डिजाइन फर्म के चयन का भी जिक्र किया गया है।

इसके बाद निर्माण समिति में शामिल किए गए लोगों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। चंपत राय के नाम से सामने आए बयान में दावा किया गया कि समिति में नृपेंद्र मिश्रा की पसंद के लोगों को शामिल किया गया और इनमें से कुछ लोग छह साल के दौरान सिर्फ एक-दो बार ही अयोध्या आए।

बयान में पूर्व NBCC चेयरमैन अनूप मित्तल का भी जिक्र किया गया है। दावा किया गया है कि वह लगातार नृपेंद्र मिश्रा के साथ निर्माण समिति की बैठकों में शामिल होते थे।

इसके अलावा आरोप लगाया गया है कि मंदिर निर्माण से जुड़े फैसले निर्माण समिति की बैठकों में लिए जाते थे, लेकिन कई मामलों में बाद में बदलाव किए गए और नृपेंद्र मिश्रा के फैसलों को प्राथमिकता दी गई।

कुछ मामलों में समिति के दूसरे सदस्यों के सुझावों और फैसलों को महत्व नहीं दिए जाने का भी दावा किया गया है।

निर्माण समिति की कार्यप्रणाली पर भी उठे सवाल

अगर इन दावों को देखा जाए तो विवाद सिर्फ किसी एक फैसले तक सीमित नहीं है। सवाल निर्माण समिति की कार्यप्रणाली और फैसला लेने के तरीके तक पहुंचते दिखाई दे रहे हैं।

लेकिन यहां यह साफ करना जरूरी है कि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।

नृपेंद्र मिश्रा ने क्या कहा?

अयोध्या पहुंचे राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा से जब इस पत्र को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने साफ कहा कि उन्होंने ऐसा कोई पत्र देखा ही नहीं है।उन्होंने कहा कि जब तक वह पत्र खुद नहीं देख लेते, तब तक उसके आधार पर सामने आए दावों पर प्रतिक्रिया देना संभव नहीं है।

नृपेंद्र मिश्रा ने इस पूरे मामले को लेकर नाराजगी भी जताई और कहा कि विवाद पैदा करने की कोशिश की जा रही है।यानी फिलहाल इस मामले में दो अलग-अलग तस्वीरें सामने हैं। एक तरफ चंपत राय के नाम से सामने आया दस्तावेज है, जिसमें गंभीर सवाल और आरोप लगाए गए हैं। दूसरी तरफ नृपेंद्र मिश्रा हैं, जो उस दस्तावेज को देखने से ही इनकार कर रहे हैं।

आरोपों पर निष्कर्ष निकालने से पहले पुष्टि जरूरी

ऐसे में किसी भी आरोप को तथ्य मानने से पहले दस्तावेज की पुष्टि और संबंधित पक्ष का जवाब जरूरी है।

चढ़ावा चोरी विवाद से कैसे जुड़ा है मामला?

राम मंदिर से जुड़े चढ़ावे की चोरी का मामला सामने आने के बाद मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को लेकर भी चर्चा तेज हुई थी।इस मामले में जांच के बाद SIT की अंतिम रिपोर्ट ट्रस्ट को सौंपे जाने की खबर सामने आई। रिपोर्टिंग के मुताबिक जांच में चंपत राय का नाम आरोपी के तौर पर सामने नहीं आया।

इसी घटनाक्रम के बीच चंपत राय के नाम से जुड़ा 9 पन्नों का बयान सामने आया, जिसमें मंदिर निर्माण समिति और नृपेंद्र मिश्रा की भूमिका पर सवाल उठाए गए।यानी पूरा मामला अब सिर्फ चढ़ावा चोरी की जांच तक सीमित नहीं रह गया है। मंदिर निर्माण से जुड़े फैसले, निर्माण समिति की भूमिका और उसके काम करने के तरीके को लेकर भी सवाल चर्चा में आ गए हैं।

विवाद इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

राम मंदिर निर्माण देश की सबसे बड़ी धार्मिक और सार्वजनिक परियोजनाओं में शामिल रहा है। मंदिर से करोड़ों लोगों की आस्था जुड़ी है। ऐसे में निर्माण से जुड़े फैसलों, ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और चढ़ावे से जुड़े किसी भी विवाद पर लोगों की स्वाभाविक नजर रहती है।

यही वजह है कि चंपत राय के नाम से सामने आए बयान और नृपेंद्र मिश्रा के जवाब को लेकर चर्चा बढ़ गई है।

हालांकि इस मामले में सबसे जरूरी बात यह है कि आरोपों और तथ्यों के बीच अंतर रखा जाए।किसी दस्तावेज के सामने आने भर से उसमें लिखी हर बात सही साबित नहीं हो जाती। जब तक दस्तावेज की प्रामाणिकता सामने नहीं आती और संबंधित पक्ष अपना जवाब नहीं देता, तब तक दावों को दावों के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

अब आगे क्या होगा?

इस पूरे मामले में अब तीन बातें सबसे अहम होंगी।

पहला, सामने आए 9 पन्नों के बयान की प्रामाणिकता साफ होती है या नहीं। दूसरा, राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से इसमें लगाए गए आरोपों पर कोई आधिकारिक जवाब आता है या नहीं। तीसरा, चढ़ावा चोरी से जुड़े मामले में जांच और आगे की कार्रवाई किस दिशा में जाती है।

इन तीनों सवालों के जवाब इस विवाद की आगे की तस्वीर काफी हद तक साफ कर सकते हैं। फिलहाल अयोध्या में राम मंदिर निर्माण से जुड़े दो महत्वपूर्ण नामों के बीच मतभेद की चर्चा सार्वजनिक हो चुकी है। एक तरफ चंपत राय के नाम से सामने आया बयान है, जिसमें नृपेंद्र मिश्रा की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। दूसरी तरफ नृपेंद्र मिश्रा हैं, जो पत्र को देखने से ही इनकार कर रहे हैं।

इसलिए इस समय किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।

राम मंदिर विवाद में असली सवाल क्या?

पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल यही है कि सामने आया 9 पन्नों का बयान कितना प्रामाणिक है और उसमें लगाए गए आरोपों पर राम मंदिर ट्रस्ट का क्या जवाब आता है। अगर दस्तावेज की पुष्टि होती है तो उसमें उठाए गए सवालों पर जवाब जरूरी होगा। वहीं अगर दस्तावेज की प्रामाणिकता ही स्पष्ट नहीं होती, तो उसके आधार पर किसी व्यक्ति या संस्था पर सवाल उठाना भी उचित नहीं होगा।

यानी फिलहाल मामला आरोप और जवाब के बीच है।राम मंदिर से जुड़ा हर विवाद भावनात्मक रूप से बेहद संवेदनशील है। इसलिए इस मामले में भी दावों से ज्यादा जरूरी है—तथ्य, पुष्टि और आधिकारिक जवाब।

फिलहाल सवाल सामने हैं… दावे सामने हैं… लेकिन पूरे मामले की अंतिम तस्वीर अभी सामने आना बाकी है।

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