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‘Cold Drink Tax’ का असर! UK की Fanta में भारत से कम चीनी क्यों? एक्सपर्ट ने बताई असली वजह

भारत और ब्रिटेन में एक ही ब्रांड की Fanta के फॉर्मूले में बड़ा अंतर सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, UK में बिकने वाली Fanta में भारत के मुकाबले करीब एक-तिहाई चीनी है।
Fanta
UK Fanta में भारत से कम चीनी क्यों? ‘कोल्ड ड्रिंक टैक्स’ से समझिए असली वजह

Fanta Sugar Difference: भारत और ब्रिटेन में एक ही ब्रांड की Fanta के फॉर्मूले में बड़ा अंतर सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, UK में बिकने वाली Fanta में भारत के मुकाबले करीब एक-तिहाई चीनी है। आखिर ऐसा क्यों है? क्या इसके पीछे ब्रिटेन का ‘Cold Drink Tax’ जिम्मेदार है? एक्सपर्ट ने इसकी पूरी वजह समझाई है।

UK और भारत की Fanta में इतना बड़ा अंतर क्यों?

एक ही ब्रांड का सॉफ्ट ड्रिंक अलग-अलग देशों में अलग फॉर्मूले के साथ बिक सकता है। Fanta को लेकर सामने आई तुलना ने भी इसी अंतर पर ध्यान खींचा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, UK में बिकने वाली Fanta की एक कैन में करीब 63 कैलोरी होती हैं, जबकि भारत में बिकने वाले वर्जन में चीनी की मात्रा करीब तीन गुना ज्यादा बताई गई है। यही अंतर अब सोशल मीडिया और हेल्थ एक्सपर्ट्स के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

लेकिन सवाल है कि कंपनियां एक ही प्रोडक्ट में अलग-अलग देशों के लिए इतना बड़ा बदलाव क्यों करती हैं?

असली वजह क्या है ‘Cold Drink Tax’?

फूड सेफ्टी एजुकेटर उर्वशी अग्रवाल के मुताबिक, UK में लागू Soft Drinks Industry Levy यानी शुगर टैक्स इसकी एक बड़ी वजह है।

इस टैक्स व्यवस्था के तहत सॉफ्ट ड्रिंक में चीनी की मात्रा जितनी ज्यादा होती है, निर्माता पर टैक्स का बोझ उतना बढ़ सकता है। ऐसे में कंपनियों के पास चीनी की मात्रा कम करने का सीधा आर्थिक प्रोत्साहन होता है।

यानी मामला सिर्फ हेल्थ का नहीं, बल्कि टैक्स और बिजनेस मॉडल का भी है।

ज्यादा चीनी मतलब ज्यादा टैक्स

एक्सपर्ट के मुताबिक, UK की व्यवस्था में ज्यादा चीनी वाले ड्रिंक पर ज्यादा टैक्स देना पड़ता है। ऐसे में कंपनियों के लिए अपने पेय पदार्थ में चीनी कम करना आर्थिक रूप से फायदेमंद हो सकता है।

उर्वशी अग्रवाल ने बताया कि UK में इस तरह का वित्तीय प्रोत्साहन मौजूद है, जबकि भारत में फिलहाल ऐसा समान टैक्स स्ट्रक्चर नहीं है, जो कंपनियों को उसी तरह चीनी कम करने के लिए प्रेरित करे।

यही वजह है कि UK जैसे बाजार में कंपनियां अपने ड्रिंक्स को कम चीनी वाले फॉर्मूले के साथ पेश करने की दिशा में आगे बढ़ सकती हैं।

क्या सिर्फ Fanta में है ऐसा अंतर?

यह अंतर सिर्फ सॉफ्ट ड्रिंक तक सीमित नहीं है। रिपोर्टिंग में दूसरे पैकेज्ड फूड प्रोडक्ट्स की अलग-अलग देशों में अलग फॉर्मुलेशन का भी जिक्र किया गया है।

उदाहरण के तौर पर, Maggi के कुछ UK वर्जन में sunflower oil का इस्तेमाल होता है, जबकि भारत में इसके वेरिएंट्स में palm oil का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे अंतर दिखाते हैं कि एक ही अंतरराष्ट्रीय ब्रांड अलग-अलग बाजारों में स्थानीय नियमों, उपलब्ध सामग्री और बाजार की परिस्थितियों के हिसाब से अपने प्रोडक्ट में बदलाव कर सकता है।

भारत में पैकेज्ड फूड को लेकर क्यों उठ रहे सवाल?

Fanta की चीनी को लेकर हुई चर्चा ऐसे समय में सामने आई है, जब भारत में पैकेज्ड फूड और ड्रिंक्स में चीनी, नमक और फैट की मात्रा को लेकर बहस चल रही है।

भारत में पैकेज्ड फूड के फ्रंट-ऑफ-पैक न्यूट्रिशन लेबलिंग को लेकर भी लंबे समय से चर्चा होती रही है। मौजूदा व्यवस्था में उत्पादों पर पोषण संबंधी जानकारी और सामग्री की जानकारी दी जाती है, लेकिन हाई शुगर, हाई सॉल्ट या हाई फैट को लेकर फ्रंट पर स्पष्ट चेतावनी की व्यवस्था को लेकर लगातार बहस रही है।

क्या कम चीनी वाला ड्रिंक अपने आप हेल्दी है?

यहां एक जरूरी बात समझना भी जरूरी है। किसी ड्रिंक में चीनी कम होने का मतलब यह जरूरी नहीं कि वह पूरी तरह हेल्दी हो गया।

कंपनियां चीनी कम करने के लिए दूसरे स्वीटनर्स या अलग ingredients का इस्तेमाल कर सकती हैं। इसलिए किसी भी पैकेज्ड ड्रिंक को खरीदने से पहले उसके Nutrition Facts, Total Sugar और Ingredients को देखना ज्यादा महत्वपूर्ण है।

हेल्दी प्रोडक्ट महंगे होने का भी सवाल

एक्सपर्ट ने एक और महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया है—affordability

बाजार में बेहतर ingredients और cleaner labels वाले कई प्रोडक्ट्स आ रहे हैं, लेकिन बड़ी आबादी के लिए उनकी कीमत अब भी चुनौती हो सकती है। ऐसे में सिर्फ कंपनियों पर नियम लागू करना ही पर्याप्त नहीं है; उपभोक्ताओं के लिए बेहतर विकल्पों की उपलब्धता और affordability भी जरूरी है।

Fanta विवाद ने क्या सवाल खड़ा किया?

भारत और UK में Fanta की चीनी की मात्रा में अंतर ने एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा किया है—क्या टैक्स और नियम कंपनियों को ज्यादा हेल्दी फॉर्मूलेशन अपनाने के लिए मजबूर कर सकते हैं?

UK का Soft Drinks Industry Levy इसका एक उदाहरण है, जहां ज्यादा चीनी वाले पेय पर टैक्स का आर्थिक दबाव कंपनियों को फॉर्मूलेशन बदलने के लिए प्रेरित कर सकता है।

वहीं भारत में फिलहाल ऐसा समान वित्तीय प्रोत्साहन नहीं है। ऐसे में Fanta का यह अंतर सिर्फ एक सॉफ्ट ड्रिंक की कहानी नहीं, बल्कि फूड रेगुलेशन, टैक्स पॉलिसी और उपभोक्ता स्वास्थ्य के बीच संबंध पर बड़ी बहस को जन्म देता है।

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