नेपाल में आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने भारी तबाही मचा दी है। नेपाल-चीन सीमा से लगे इलाकों में आई बाढ़ और भूस्खलन के बाद मृतकों का आंकड़ा 332 तक पहुंच गया है, जबकि 900 से ज्यादा लोग अब भी लापता हैं। राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। इस आपदा ने सिर्फ नेपाल ही नहीं, बल्कि कई देशों के लोगों को प्रभावित किया है। 30 से ज्यादा देशों के नागरिकों के लापता होने की जानकारी सामने आई है।
नेपाल में बाढ़ ने मचाई भारी तबाही
26 अगस्त को नेपाल-चीन सीमा के पास अचानक आई फ्लैश फ्लड ने कई इलाकों में भारी तबाही मचाई। तेज बहाव अपने साथ मिट्टी, पत्थर और मलबा लेकर आया, जिससे सड़कें, पुल, इमारतें और दूसरी जरूरी सुविधाएं बुरी तरह प्रभावित हुईं।
बाढ़ का सबसे ज्यादा असर नेपाल के रसुवा और आसपास के इलाकों में देखने को मिला। कई जगहों पर बाढ़ का पानी और मलबा इतनी तेजी से आगे बढ़ा कि लोगों को संभलने और सुरक्षित स्थानों तक पहुंचने का पर्याप्त मौका नहीं मिला।
332 लोगों की मौत, 900 से ज्यादा अब भी लापता
नेपाल में इस आपदा के बाद मृतकों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। ताजा उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक नेपाल में अब तक 332 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 900 से ज्यादा लोग लापता हैं।
बचाव दल लगातार मलबे और प्रभावित इलाकों में तलाशी अभियान चला रहे हैं। हालांकि, कई जगह सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त होने की वजह से राहत एवं बचाव अभियान में मुश्किलें आ रही हैं।
30 से ज्यादा देशों के लोग लापता
नेपाल में आई इस आपदा का असर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी देखने को मिल रहा है। नेपाल के पर्यटन अधिकारियों के मुताबिक बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक और तीर्थयात्री भी लापता हैं।
रॉयटर्स के अनुसार, नेपाल और तिब्बत में लापता लोगों में 31 से ज्यादा देशों के नागरिक शामिल हैं। भारत, चीन, अमेरिका, मलेशिया, यूक्रेन, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा समेत कई देशों के नागरिकों के लापता होने की जानकारी सामने आई है।
भारत के भी सैकड़ों नागरिक संपर्क से बाहर
इस आपदा में भारतीय नागरिक भी प्रभावित हुए हैं। भारत के विदेश मंत्रालय के मुताबिक नेपाल में 288 भारतीय नागरिक अभी संपर्क से बाहर हैं, जबकि 21 भारतीयों को अब तक सुरक्षित निकाला जा चुका है।
कई भारतीय नागरिक नेपाल-चीन सीमा क्षेत्र से जुड़े इलाकों में मौजूद थे। इनमें कैलाश मानसरोवर यात्रा से जुड़े लोग भी शामिल बताए गए हैं।
आखिर कैसे आई इतनी भयावह बाढ़?
शुरुआती तौर पर इस आपदा को लेकर कई तरह की आशंकाएं जताई गई थीं। हालांकि, बाद की रिपोर्टों में ग्लेशियर से जुड़े घटनाक्रम को संभावित वजह बताया गया है।
रिपोर्टों के मुताबिक हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर या बर्फ और चट्टान के बड़े हिस्से के टूटने से अचानक भारी मात्रा में मलबा और पानी नीचे की ओर आया, जिसने नदियों के बहाव को प्रभावित किया और फ्लैश फ्लड जैसी स्थिति पैदा कर दी। विशेषज्ञों के मुताबिक इस तरह की घटनाओं को समझने के लिए विस्तृत वैज्ञानिक जांच जरूरी होगी।
नेपाल के साथ तिब्बत में भी भारी नुकसान
इस आपदा का असर नेपाल तक सीमित नहीं रहा। चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी बाढ़ और मलबे से भारी नुकसान हुआ है।
रिपोर्टों के मुताबिक तिब्बत में कम से कम 3 लोगों की मौत हुई है और सैकड़ों लोग लापता हैं। नेपाल और तिब्बत में प्रभावित लोगों के आंकड़ों को जोड़ने पर लापता लोगों की संख्या 1,300 से ज्यादा तक पहुंच सकती है। हालांकि, दोनों क्षेत्रों के आंकड़ों में ओवरलैप की संभावना को ध्यान में रखना जरूरी है।
रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी नेपाल की सेना
बाढ़ के बाद नेपाल की सेना और पुलिस राहत एवं बचाव अभियान में जुटी हुई हैं। जिन इलाकों में सड़क और पुल टूट चुके हैं, वहां हेलीकॉप्टरों की मदद से लोगों को निकालने और राहत सामग्री पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।
मलबे में दबे लोगों और लापता नागरिकों की तलाश के लिए प्रभावित इलाकों में लगातार सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। खराब मौसम और क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे के कारण बचाव दलों के सामने बड़ी चुनौती है।
खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं
सबसे बड़ी चिंता यह है कि राहत और बचाव अभियान के बीच भी प्रभावित इलाकों में आगे खतरे की आशंका बनी हुई है। हिमालयी क्षेत्र में भूस्खलन, ग्लेशियर से जुड़ी घटनाओं और नदी के अचानक बढ़ते जलस्तर को लेकर लगातार निगरानी की जा रही है।
रिपोर्टों में एक नए बैरियर झील के बनने और उसके संभावित ओवरफ्लो को लेकर भी चिंता जताई गई है। ऐसे में प्रशासन को निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देना पड़ रहा है।
कई परिवार अब भी अपनों की तलाश में
नेपाल की यह आपदा अब एक बड़े मानवीय संकट में बदल चुकी है। 900 से ज्यादा लोगों के लापता होने के बाद बड़ी संख्या में परिवार अपने रिश्तेदारों और करीबियों की जानकारी का इंतजार कर रहे हैं।
विदेशी नागरिकों के लापता होने की वजह से कई देशों की सरकारें भी अपने नागरिकों की जानकारी जुटाने और उन्हें सुरक्षित निकालने के प्रयासों में जुटी हैं।
सबसे बड़ी चुनौती अब लापता लोगों को तलाशना
फिलहाल नेपाल में सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों को तलाशना और प्रभावित इलाकों तक राहत पहुंचाना है। भारी मलबा, टूटे हुए रास्ते और लगातार बदलते मौसम ने रेस्क्यू टीमों के सामने मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
नेपाल में 332 मौतों और 900 से ज्यादा लोगों के लापता होने का आंकड़ा इस आपदा की भयावहता बताने के लिए काफी है। लेकिन अंतिम नुकसान का आकलन राहत और बचाव अभियान पूरा होने के बाद ही हो पाएगा।
फिलहाल पूरी दुनिया की नजर नेपाल पर है, जहां एक तरफ बचाव दल जिंदगी की तलाश में मलबा खंगाल रहे हैं, तो दूसरी तरफ सैकड़ों परिवार अपनों के लौटने का इंतजार कर रहे हैं।