पीएम मोदी और रूसी राष्ट्रपति पुतिन के बीच भारत मंडपम में बैठक मुलाकात शुरू हो गई है. सूत्रों के अनुसार, दोनों के बीच द्विपक्षीय बैठक में 2030 तक 100 अरब अमेरिकी डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार का लक्ष्य, रूस के साथ औद्योगिक सहयोग का विस्तार, रेल क्षेत्र और सुरंग निर्माण में सहयोग, रूस में भारतीय कुशल श्रमिकों की संख्या बढ़ाने समेत कई बड़े मुद्दों पर चर्चा संभव है.
पीएम मोदी ने पुतिन को भेंट की ‘तिरुक्कुरल’ की रूसी प्रति
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को तमिल कवि और दार्शनिक तिरुवल्लुवर की प्रसिद्ध रचना ‘तिरुक्कुरल’ की रूसी भाषा में प्रकाशित प्रति भेंट की। ‘तिरुक्कुरल’ तमिल साहित्य की प्राचीन और महत्वपूर्ण कृतियों में शामिल है, जिसमें जीवन, नैतिकता, शासन, प्रेम और सामाजिक मूल्यों से जुड़े विषयों पर विचार प्रस्तुत किए गए हैं।
तिरुवल्लुवर को ‘तिरुक्कुरल’ का रचयिता माना जाता है। इस रचना के काल को लेकर विद्वानों में अलग-अलग मत हैं और इसे लगभग ईसा पूर्व दूसरी शताब्दी से लेकर ईसा की छठी शताब्दी के बीच का माना जाता है। ‘तिरुक्कुरल’ के सूत्रात्मक पद्य जीवन के विभिन्न पहलुओं को छूते हैं और आज भी इसे तमिल संस्कृति और दर्शन की महत्वपूर्ण विरासत माना जाता है।

पुतिन और पीएम मोदी के बीच इन मुद्दों पर होगी अहम बातचीत
सूत्रों के मुताबिक, पीएम मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच होने वाली द्विपक्षीय बैठक में व्यापार, औद्योगिक सहयोग, परमाणु ऊर्जा, रोजगार और क्रिटिकल मिनरल्स समेत कई अहम मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।
- 2030 तक 100 अरब डॉलर का व्यापार लक्ष्य: दोनों देश द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाकर 2030 तक 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने के लक्ष्य पर चर्चा कर सकते हैं।
- औद्योगिक सहयोग: भारत में INNOPROM के जरिए रूस के साथ औद्योगिक सहयोग बढ़ाने, रेलवे और टनलिंग सेक्टर में साझेदारी मजबूत करने पर बात हो सकती है। इसके अलावा स्टील वैल्यू चेन विकसित करने और B2B अवसर बढ़ाने पर भी जोर रहेगा।
- रूसी बाजार में भारत की पहुंच: भारतीय कंपनियों और उत्पादों के लिए रूसी बाजार में पहुंच बढ़ाने के उपायों पर भी चर्चा संभव है।
- सिविल न्यूक्लियर सहयोग: परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने, खासकर फ्यूल साइकिल और लाइफ साइकिल सपोर्ट से जुड़े मुद्दों पर बातचीत हो सकती है।
- कुशल भारतीय श्रमिकों की मोबिलिटी: रूस में भारतीय कुशल श्रमिकों की संख्या बढ़ाने और दोनों देशों के बीच श्रम एवं मोबिलिटी सहयोग को आगे बढ़ाने पर भी चर्चा हो सकती है।
- क्रिटिकल मिनरल्स: महत्वपूर्ण खनिजों यानी क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के रास्ते तलाशे जा सकते हैं।
- फर्टिलाइजर सेक्टर: रणनीतिक जॉइंट वेंचर (JV) प्रोजेक्ट्स के जरिए रूस के साथ खाद के क्षेत्र में मौजूदा सहयोग को बनाए रखने और उसका विस्तार करने पर भी जोर दिया जा सकता है।