उत्तराखंड प्रशासनिक गलियारों में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। राज्य में एक भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारी को बिना अचल संपत्ति का विवरण (IPR) जमा किए ही प्रमोशन दिए जाने का मामला सामने आया है। नियमों को ताक पर रखकर दी गई इस तरक्की के बाद अब इस मामले की उच्च स्तरीय जांच और सीबीआई से फेरबदल की मांग जोर पकड़ने लगी है।
नियमों के अनुसार, हर साल सभी अधिकारियों को अपनी संपत्ति का ब्योरा देना अनिवार्य होता है, लेकिन इस मामले में इस प्रक्रिया की अनदेखी की गई। इस गड़बड़ी के सामने आने के बाद प्रशासनिक हलकों में सवाल उठने लगे हैं कि आखिर बिना पूरी औपचारिकताओं के इस अधिकारी को पदोन्नति कैसे मिल गई। अब देखना यह होगा कि शासन इस मामले में क्या कदम उठाता है।