भारत में अब तेजी से बनेंगे इलेक्ट्रॉनिक पुर्जे, 15 राज्यों में 106 नई परियोजनाओं को मंजूरी

देश में इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम उठाया गया है। सरकार ने 15 राज्यों में 106 नई परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है।

नई दिल्ली: भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मजबूत करने के लिए सरकार की Electronics Components Manufacturing Scheme (ECMS) के तहत अब तक 106 प्रोजेक्ट मंजूर किए जा चुके हैं। ये प्रोजेक्ट देश के 15 राज्यों में लगाए जाएंगे और इनमें कुल ₹69,548 करोड़ के निवेश को मंजूरी दी गई है।

सरकार के मुताबिक, इन परियोजनाओं से देश में इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स और जरूरी कच्चे माल का घरेलू उत्पादन बढ़ेगा। इसका उद्देश्य इलेक्ट्रॉनिक्स की सप्लाई चेन को मजबूत करना और आयात पर निर्भरता कम करना है।

106 प्रोजेक्ट में 30 तरह के इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद

ECMS के तहत मंजूर परियोजनाएं करीब 30 अलग-अलग इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों से जुड़ी हैं। इनमें कैमरा मॉड्यूल, डिस्प्ले मॉड्यूल, ऑप्टिकल ट्रांसीवर, कनेक्टर, स्पीकर, माइक्रोफोन, कैपेसिटर, कॉइल, फिल्टर और एंटीना जैसे कंपोनेंट शामिल हैं। इसके अलावा एनोड मटेरियल, रेयर-अर्थ परमानेंट मैग्नेट, इलेक्ट्रोलाइट एडिटिव्स और अन्य सप्लाई-चेन उत्पादों के घरेलू उत्पादन को भी बढ़ावा दिया जाएगा।

38 प्लांट में उत्पादन शुरू

सरकार के अनुसार, मंजूर किए गए 106 प्रोजेक्ट में से 38 प्लांट में उत्पादन शुरू हो चुका है। वहीं 16 अन्य प्रोजेक्ट निर्माण या मशीनरी लगाने के एडवांस स्टेज में हैं। इन परियोजनाओं से करीब ₹5.34 लाख करोड़ का उत्पादन होने का अनुमान है। साथ ही लगभग 74,628 प्रत्यक्ष रोजगार और करीब 2.5 लाख अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होने की उम्मीद है।

किन राज्यों में लगाए जा रहे हैं प्रोजेक्ट?

ECMS के तहत मंजूर परियोजनाएं देश के 15 राज्यों में फैली हैं। अगस्त 2026 में मंजूर किए गए नए प्रोजेक्ट गोवा, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड समेत 10 राज्यों में हैं। इससे इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग का दायरा देश के अलग-अलग हिस्सों में बढ़ने की उम्मीद है।

ECMS क्या है और क्यों शुरू की गई?

Electronics Components Manufacturing Scheme (ECMS) को सरकार ने अप्रैल 2025 में शुरू किया था। इसका शुरुआती बजट ₹22,919 करोड़ था। बाद में केंद्रीय बजट 2026-27 में इसका कुल आवंटन बढ़ाकर ₹40,000 करोड़ कर दिया गया।

योजना का मुख्य उद्देश्य सिर्फ इलेक्ट्रॉनिक सामान को असेंबल करने के बजाय उसके जरूरी कंपोनेंट और कच्चे माल का उत्पादन भी भारत में बढ़ाना है। इससे घरेलू वैल्यू एडिशन बढ़ाने और विदेशी सप्लाई चेन पर निर्भरता कम करने की कोशिश की जा रही है।

इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन और निर्यात में भी बढ़ोतरी

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स का उत्पादन 2014-15 में करीब ₹1.9 लाख करोड़ था, जो 2025-26 में बढ़कर ₹13.11 लाख करोड़ हो गया।

इसी अवधि में इलेक्ट्रॉनिक्स का निर्यात करीब ₹38,000 करोड़ से बढ़कर ₹4.24 लाख करोड़ पहुंच गया। सरकार अब इस बढ़ते इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग की हिस्सेदारी बढ़ाने पर जोर दे रही है।

भारत को क्या फायदा होगा?

ECMS के जरिए भारत में मोबाइल, ऑटोमोबाइल, टेलीकॉम, आईटी हार्डवेयर और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के लिए जरूरी कंपोनेंट की घरेलू सप्लाई बढ़ सकती है।

सरकार के मुताबिक, योजना से घरेलू वैल्यू एडिशन बढ़ाने, आयात पर निर्भरता घटाने और इलेक्ट्रॉनिक्स की सप्लाई चेन को मजबूत करने में मदद मिलेगी। इससे भारत को ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सप्लाई चेन में अपनी भूमिका बढ़ाने का अवसर भी मिलेगा।

संबंधित खबरें

ट्रंप की चुनावी हार से रिपब्लिकन पार्टी में बगावत? ईरान युद्ध, टैरिफ और भारत नीति पर उठे सवाल

सोशल मीडिया की कानूनी ढाल पर बड़ा वार! Facebook से X तक बढ़ सकती है मुश्किल, कंपनियों की तय होगी जवाबदेही?

विपक्ष के खिलाफ बीजेपी का ‘रण’, अमित शाह ने SIR तो योगी ने EVM पर राहुल गांधी को घेरा

यूपी में धनतेरस से छठ पूजा तक नहीं होगी बिजली कटौती

यूरोप के आसमान में बम धमाकों की धमकी से हड़कंप, 25 से ज्यादा उड़ानें निशाने पर

Recommended Stories

ट्रंप की चुनावी हार से रिपब्लिकन पार्टी में बगावत? ईरान युद्ध, टैरिफ और भारत नीति पर उठे सवाल

सोशल मीडिया की कानूनी ढाल पर बड़ा वार! Facebook से X तक बढ़ सकती है मुश्किल, कंपनियों की तय होगी जवाबदेही?

विपक्ष के खिलाफ बीजेपी का ‘रण’, अमित शाह ने SIR तो योगी ने EVM पर राहुल गांधी को घेरा

यूपी में धनतेरस से छठ पूजा तक नहीं होगी बिजली कटौती

यूरोप के आसमान में बम धमाकों की धमकी से हड़कंप, 25 से ज्यादा उड़ानें निशाने पर