देश की राजनीति में एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी और विपक्ष के बीच टकराव तेज होता दिखाई दे रहा है। इस बार बीजेपी ने कांग्रेस और INDIA गठबंधन को चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूची और EVM के मुद्दे पर घेरने की कोशिश की है। हरियाणा के करनाल में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राहुल गांधी पर तीखा हमला बोलते हुए SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) के मुद्दे पर विशेष सत्र बुलाने की बात कही। वहीं, उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चुनावी हार के बाद EVM पर सवाल उठाने को लेकर कांग्रेस और विपक्ष पर निशाना साधा।
दोनों नेताओं के बयानों में राहुल गांधी प्रमुख राजनीतिक निशाने पर रहे। अमित शाह ने विपक्ष को SIR पर चर्चा की चुनौती दी, तो योगी आदित्यनाथ ने चुनावी नतीजों के बाद EVM को जिम्मेदार ठहराने की विपक्ष की रणनीति पर सवाल उठाए। ऐसे में करनाल से गाजियाबाद तक बीजेपी के इन बयानों ने चुनावी राजनीति को एक बार फिर गरमा दिया है।
करनाल में अमित शाह का राहुल गांधी पर हमला, SIR पर विशेष सत्र की चुनौती
करनाल में आयोजित कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और विपक्ष की राजनीति पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी गंभीर मुद्दों पर चर्चा करने के बजाय राजनीतिक अराजकता का माहौल बनाने की कोशिश करते हैं। शाह ने कहा कि विपक्ष लगातार चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची को लेकर सवाल उठा रहा है, लेकिन सरकार इन मुद्दों पर चर्चा से पीछे हटने वाली नहीं है।
SIR को लेकर विपक्ष के विरोध पर अमित शाह ने कहा कि अगर इस मुद्दे पर इतनी आपत्ति और सवाल हैं, तो सरकार विशेष सत्र बुलाकर चर्चा करने के लिए तैयार है। उनके इस बयान को विपक्ष के लिए सीधी राजनीतिक चुनौती के तौर पर देखा जा रहा है।
दरअसल, SIR को लेकर कांग्रेस समेत विपक्षी दल लगातार सवाल उठा रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण की प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जानी चाहिए। वहीं, बीजेपी का कहना है कि मतदाता सूची को दुरुस्त करना और चुनावी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना जरूरी है।
अमित शाह ने इसी मुद्दे को आधार बनाकर राहुल गांधी पर हमला बोला। बीजेपी की रणनीति है कि विपक्ष के आरोपों का जवाब देने के साथ-साथ उससे सार्वजनिक बहस में भी जवाब मांगा जाए। शाह ने राहुल गांधी की राजनीतिक शैली पर सवाल उठाते हुए उन्हें संविधान और संवैधानिक संस्थाओं के प्रति अपने रवैये पर घेरने की कोशिश की।
घुसपैठ और चुनावी शुचिता के मुद्दे पर भी विपक्ष को घेरा
अमित शाह ने अपने संबोधन में घुसपैठ के मुद्दे को भी विपक्ष की राजनीति से जोड़कर निशाना साधा। बीजेपी लंबे समय से अवैध घुसपैठ और मतदाता सूची की शुद्धता को चुनावी बहस का अहम मुद्दा बनाती रही है।
पार्टी का तर्क है कि मतदाता सूची में किसी भी तरह की गड़बड़ी को दूर करना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए जरूरी है। वहीं, विपक्ष इस प्रक्रिया के दौरान आम मतदाताओं के अधिकारों और संभावित विसंगतियों को लेकर सवाल उठाता रहा है।
करनाल से अमित शाह ने इसी बहस को नया राजनीतिक मोड़ देते हुए विपक्ष को संदेश देने की कोशिश की कि अगर उसे SIR पर आपत्ति है, तो वह चर्चा के लिए सामने आए। यानी बीजेपी अब केवल विपक्ष के आरोपों का जवाब देने के बजाय उसी से सवाल पूछने की रणनीति पर आगे बढ़ती दिखाई दे रही है।
गाजियाबाद में योगी आदित्यनाथ का राहुल गांधी पर निशाना
करनाल में अमित शाह के हमले के बाद गाजियाबाद में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी कांग्रेस और INDIA गठबंधन को निशाने पर लिया। उन्होंने चुनावी हार के बाद EVM पर सवाल उठाने की विपक्ष की राजनीति पर हमला बोला।
योगी आदित्यनाथ ने राहुल गांधी की राजनीतिक कार्यशैली पर तंज कसते हुए कहा कि बार-बार चुनाव में असफल होने के बावजूद विपक्ष आत्ममंथन करने के बजाय EVM को जिम्मेदार ठहराता है। मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर संवैधानिक संस्थाओं का अपमान करने और लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर भ्रम फैलाने का आरोप भी लगाया।
योगी ने विपक्ष की चुनावी रणनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब चुनाव में जीत मिलती है तो EVM सही होती है, लेकिन हार मिलने पर उसी मशीन पर सवाल उठाए जाने लगते हैं। बीजेपी लंबे समय से विपक्ष पर इसी तरह का दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाती रही है।
मुख्यमंत्री का हमला सिर्फ EVM तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने कांग्रेस को 1975 में लगाए गए आपातकाल की याद दिलाते हुए लोकतंत्र पर उसके मौजूदा बयानों को लेकर सवाल उठाए। योगी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस का इतिहास लोकतांत्रिक संस्थाओं और संवैधानिक मूल्यों के उल्लंघन से जुड़ा रहा है, जबकि आज वही पार्टी लोकतंत्र की रक्षा की बात कर रही है।
राहुल गांधी की राजनीति पर बीजेपी के दो बड़े सवाल
करनाल और गाजियाबाद में अमित शाह और योगी आदित्यनाथ के बयानों को एक साथ देखें तो बीजेपी की राजनीतिक रणनीति साफ नजर आती है। पार्टी ने विपक्ष को दो अलग-अलग मुद्दों पर घेरने की कोशिश की है।
पहला मुद्दा SIR और मतदाता सूची का है, जिस पर अमित शाह ने विशेष सत्र में चर्चा की चुनौती दी है। दूसरा मुद्दा EVM और चुनावी नतीजों का है, जिस पर योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष से आत्ममंथन करने की बात कही है।
बीजेपी का आरोप है कि विपक्ष चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाकर अपनी राजनीतिक विफलताओं से ध्यान हटाने की कोशिश करता है। पार्टी का कहना है कि चुनाव में हार के कारणों को संगठन, रणनीति और जनता के बीच अपनी स्वीकार्यता के आधार पर समझने की जरूरत है।
हालांकि, विपक्ष का पक्ष इससे अलग है। कांग्रेस और उसके सहयोगी दल चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता, मतदाता सूची में संभावित गड़बड़ियों और EVM की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। ऐसे में यह मुद्दा केवल बीजेपी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं है, बल्कि चुनावी व्यवस्था पर भरोसे से भी जुड़ा हुआ है।
SIR से EVM तक, आने वाले दिनों में और तेज होगी सियासी लड़ाई
अमित शाह और योगी आदित्यनाथ के इन बयानों ने साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में SIR और EVM का मुद्दा राजनीतिक बहस के केंद्र में बना रह सकता है। बीजेपी इन मुद्दों के जरिए राहुल गांधी और INDIA गठबंधन को घेरने की कोशिश कर रही है, जबकि विपक्ष चुनावी प्रक्रिया को लेकर अपने सवालों पर कायम है।
करनाल में अमित शाह ने SIR पर विशेष सत्र बुलाने की बात कहकर विपक्ष को चर्चा की चुनौती दी, तो गाजियाबाद में योगी आदित्यनाथ ने चुनावी हार के बाद EVM पर सवाल उठाने को लेकर कांग्रेस को घेरा।
यानी बीजेपी की तरफ से विपक्ष के सामने दो बड़े सवाल रखे गए हैं। अगर SIR पर सवाल हैं तो चर्चा के लिए सामने आइए और अगर चुनावी नतीजों से असंतोष है तो अपनी रणनीति पर भी आत्ममंथन कीजिए।
अब देखना होगा कि राहुल गांधी और कांग्रेस इन हमलों का क्या जवाब देते हैं। फिलहाल इतना तय है कि SIR, EVM और चुनावी प्रक्रिया को लेकर बीजेपी और विपक्ष के बीच सियासी संग्राम आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है।


