भारत और यूरोप के बीच व्यापारिक मामलों को लेकर अक्सर कई तरह की चर्चाएं होती रहती हैं। हाल ही में सामने आए घटनाक्रम के अनुसार, यदि यूरोप से भारत को कबाड़ (स्क्रैप) मिलना बंद हो जाता है, तो इससे देश के कई उद्योगों पर इसका असर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, रीसाइक्लिंग उद्योग और मेटल सेक्टर बड़े पैमाने पर आयातित स्क्रैप पर निर्भर हैं। अगर यह सप्लाई रुकती है, तो उत्पादन लागत में बढ़ोतरी हो सकती है और बाजार में इसका सीधा असर देखने को मिल सकता है।
हालांकि, इस स्थिति से निपटने के लिए घरेलू स्तर पर कचरा प्रबंधन और रीसाइक्लिंग क्षमताओं को बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि आयात पर निर्भरता को कम किया जा सके।