गर्मी और घरेलू हिंसा का खतरनाक कनेक्शन, रिसर्च में सामने आए चौंकाने वाले खुलासे

एक नई रिसर्च में यह बात सामने आई है कि बढ़ते तापमान और गर्मी का सीधा संबंध घरेलू हिंसा से होता है। जानिए क्या कहते हैं आंकड़े।

गर्मी का असर सिर्फ शरीर और स्वास्थ्य पर ही नहीं पड़ता, बल्कि इसका संबंध लोगों के व्यवहार और सामाजिक परिस्थितियों से भी देखा गया है। कई रिसर्च में अधिक तापमान और घरेलू हिंसा (Domestic Violence) के बीच संबंध सामने आया है। दक्षिण एशिया से जुड़े एक बड़े अध्ययन में तापमान बढ़ने के साथ महिलाओं के खिलाफ अंतरंग साथी हिंसा (Intimate Partner Violence) की व्यापकता बढ़ने की बात सामने आई है।

हालांकि, विशेषज्ञ शोध के आधार पर इसे यह कहने के बराबर नहीं मानते कि सिर्फ गर्मी ही घरेलू हिंसा का कारण है। घरेलू हिंसा के पीछे सामाजिक, आर्थिक और व्यक्तिगत समेत कई कारण हो सकते हैं। गर्मी इनमें एक अतिरिक्त जोखिम कारक के रूप में सामने आ सकती है।

1 डिग्री तापमान बढ़ने पर क्या मिला?

दक्षिण एशिया में किए गए अध्ययन में भारत, नेपाल और पाकिस्तान की 1.94 लाख से ज्यादा महिलाओं के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। अध्ययन में पाया गया कि औसत वार्षिक तापमान में हर 1 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी के साथ अंतरंग साथी हिंसा की व्यापकता में औसतन करीब 4.5 प्रतिशत की वृद्धि जुड़ी हुई थी।

शोध में शारीरिक और यौन हिंसा के मामलों में यह संबंध भावनात्मक हिंसा की तुलना में अधिक मजबूत पाया गया। हालांकि यह एक सांख्यिकीय संबंध (association) है और इससे यह साबित नहीं होता कि तापमान बढ़ना अकेले हिंसा को जन्म देता है।

भारत पर भी दिखा असर

अध्ययन में भारत, नेपाल और पाकिस्तान को शामिल किया गया था। शोधकर्ताओं ने पाया कि तीनों देशों में अधिक तापमान और अंतरंग साथी हिंसा के बीच संबंध मौजूद था। अध्ययन के मॉडल के मुताबिक भविष्य में तापमान बढ़ने पर इस तरह की हिंसा का बोझ भी बढ़ सकता है।

शोध में सबसे अधिक अनुमानित बढ़ोतरी भारत के लिए बताई गई थी। हालांकि ये भविष्य के मॉडल आधारित अनुमान हैं, वास्तविक परिस्थितियां सामाजिक और जलवायु बदलावों के साथ अलग हो सकती हैं।

गर्मी और हिंसा के बीच कनेक्शन कैसे समझें?

शोधकर्ताओं के मुताबिक अत्यधिक गर्मी लोगों के तनाव और चिड़चिड़ेपन को बढ़ा सकती है। इसके अलावा गर्म मौसम में नींद, मानसिक स्वास्थ्य, आर्थिक दबाव और घरेलू परिस्थितियों पर भी असर पड़ सकता है। ऐसे कई कारक मिलकर हिंसक व्यवहार का जोखिम बढ़ा सकते हैं। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि गर्मी घरेलू हिंसा को सही या जायज नहीं बनाती। हिंसा के लिए जिम्मेदारी हिंसा करने वाले व्यक्ति की ही होती है।

अमेरिका की एक और स्टडी में भी सामने आया संबंध

2025 में प्रकाशित JAMA Network Open की एक स्टडी में न्यू ऑरलियन्स में 2011 से 2021 के बीच दर्ज 1.5 लाख से अधिक घरेलू हिंसा से जुड़ी पुलिस कॉल्स का अध्ययन किया गया। इसमें अत्यधिक गर्मी की घटनाओं और घरेलू हिंसा से जुड़ी कॉल्स के बीच संबंध पाया गया। पांच या उससे ज्यादा दिनों तक चलने वाली अत्यधिक गर्मी की स्थितियों में यह संबंध सबसे मजबूत था।

शोधकर्ताओं ने सुझाव दिया कि अत्यधिक गर्मी से निपटने वाली योजनाओं में घरेलू हिंसा की रोकथाम और सहायता सेवाओं को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।

2026 की नई रिसर्च में क्या सामने आया?

सितंबर 2026 में प्रकाशित एक अन्य अध्ययन ने ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया क्षेत्र के अस्पतालों में दर्ज मामलों का विश्लेषण किया। इसमें 2009 से 2024 के बीच 28,637 घर में हुए हमले से जुड़ी चोटों और 2016 से 2024 के बीच 10,194 घरेलू एवं पारिवारिक हिंसा से जुड़ी चोटों का अध्ययन किया गया।

रिसर्च में असामान्य रूप से गर्म दिनों में घर में हुए हमलों से जुड़ी चोटों के अस्पताल पहुंचने के मामलों में 5.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई। हालांकि, घरेलू एवं पारिवारिक हिंसा से जुड़ी चोटों के लिए गर्मी का संबंध मौसम जैसे अन्य कारकों को नियंत्रित करने के बाद सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण नहीं रहा।

क्या सिर्फ गर्मी से बढ़ती है घरेलू हिंसा?

नहीं। उपलब्ध रिसर्च तापमान और हिंसा के बीच एक संभावित संबंध दिखाती है, लेकिन घरेलू हिंसा एक जटिल सामाजिक समस्या है। आर्थिक तनाव, रिश्तों में संघर्ष, सत्ता और नियंत्रण, नशे की समस्या तथा अन्य सामाजिक परिस्थितियां भी इसमें भूमिका निभा सकती हैं। इसलिए रिसर्च का निष्कर्ष यह नहीं है कि गर्मी घरेलू हिंसा का सीधा कारण है, बल्कि यह है कि अत्यधिक तापमान कुछ परिस्थितियों में हिंसा के जोखिम या उससे जुड़े मामलों को बढ़ा सकता है।

बढ़ती गर्मी के साथ बढ़ रही चिंता

जलवायु परिवर्तन के कारण दुनिया के कई हिस्सों में गर्मी और हीटवेव की घटनाएं बढ़ रही हैं। ऐसे में शोधकर्ता अब इसके असर को सिर्फ स्वास्थ्य तक सीमित नहीं देख रहे, बल्कि हिंसा और सामाजिक व्यवहार जैसे पहलुओं पर भी अध्ययन कर रहे हैं।

इन अध्ययनों से संकेत मिलता है कि हीटवेव से निपटने की रणनीति में स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ घरेलू हिंसा से प्रभावित लोगों के लिए सहायता और सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूत करना जरूरी हो सकता है।

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