नई दिल्ली: मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच चुनाव आयोग ने अपने तीनों सदस्यों के बीच कथित टकराव की खबरों पर प्रतिक्रिया दी है। आयोग ने कहा है कि विचारों में अंतर होना किसी संस्थागत टकराव का संकेत नहीं है। आयोग के मुताबिक, SIR समेत सभी फैसले निर्धारित प्रक्रिया के तहत बहुमत से लिए गए हैं।
यह प्रतिक्रिया उस मीडिया रिपोर्ट के बाद आई है, जिसमें दावा किया गया था कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू व विवेक जोशी के बीच कई मुद्दों पर मतभेद सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों चुनाव आयुक्तों ने पिछले 10 महीनों में आयोग के कुछ फैसलों और आदेशों पर लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं।
चुनाव आयोग ने क्या कहा?
चुनाव आयोग ने अपने बयान में कहा कि ECI एक बहु-सदस्यीय संवैधानिक संस्था है और संविधान के अनुच्छेद 324, संबंधित कानूनों और स्थापित संस्थागत परंपराओं के तहत काम करती है। आयोग के मुताबिक, किसी मुद्दे पर सदस्यों के बीच विचार अलग हो सकते हैं और ऐसे विचार-विमर्श संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा हैं। आयोग ने इस तरह के मतभेद को सदस्यों के बीच टकराव के रूप में पेश किए जाने पर आपत्ति जताई है। ECI का कहना है कि आयोग के फैसले सामूहिक विचार-विमर्श के बाद लिए जाते हैं और SIR समेत सभी फैसले बहुमत के आधार पर लिए गए हैं।
14 आपत्तियों की रिपोर्ट के बाद बढ़ी चर्चा
दरअसल, द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने करीब 10 महीनों के दौरान कम से कम 14 बार आयोग के कुछ कदमों पर आपत्ति दर्ज की। रिपोर्ट में मतदाता सूची में नाम जोड़ने, नाम हटाने और चुनावी डेटा से जुड़े IT सिस्टम सहित कई मुद्दों का उल्लेख किया गया है।
रिपोर्ट सामने आने के बाद विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और SIR की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए। हालांकि, आयोग ने इन रिपोर्टों से पैदा हुई उस तस्वीर को खारिज किया है जिसमें सदस्यों के बीच संस्थागत टकराव की बात कही गई थी।
ECI में कौन-कौन हैं सदस्य?
फिलहाल चुनाव आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और चुनाव आयुक्त विवेक जोशी शामिल हैं। ECI की आधिकारिक वेबसाइट पर भी इन तीनों को मौजूदा आयोग के सदस्यों के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।
SIR को लेकर पहले से बहस जारी
SIR का उद्देश्य मतदाता सूची की गहन समीक्षा और उसमें जरूरी सुधार करना है। हालांकि, इस प्रक्रिया में नाम हटाने, जोड़ने और सत्यापन के तरीकों को लेकर राजनीतिक दलों तथा नागरिक समूहों की ओर से लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। दिल्ली में SIR से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भी कुछ मतदाताओं को भेजे गए नोटिस की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए ECI से जवाब मांगा है।
ऐसे में चुनाव आयोग का ताजा बयान उसके संस्थागत कामकाज और SIR से जुड़े फैसलों पर उठ रहे सवालों के बीच उसके आधिकारिक पक्ष को स्पष्ट करता है। वहीं, आयोग के दो सदस्यों की लिखित आपत्तियों से संबंधित रिपोर्ट भी सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा बनी हुई है।