नई दिल्ली: चुनाव आयोग और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर जारी विवाद के बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने विपक्ष पर पलटवार किया है। BJP सांसद और राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर विपक्ष के आरोपों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि चुनाव हारने के बाद विपक्ष संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बना रहा है।
पात्रा ने कहा कि चुनाव आयोग के तीनों सदस्यों के बीच किसी मुद्दे पर चर्चा, सुझाव और मतभेद होना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है। उन्होंने आयोग के उस स्पष्टीकरण का भी हवाला दिया, जिसमें कहा गया है कि SIR समेत उसके फैसले पूर्ण आयोग की सहमति से लिए गए हैं।
संबित पात्रा बोले- ‘हार गए हैं, तो चुनाव आयोग पर हमला कर रहे हैं’
BJP प्रवक्ता संबित पात्रा ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनावी हार के बाद संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
संबित पात्रा का बयान: “हार गए हैं, तो चुनाव आयोग पर हमला कर रहे हैं।”
उन्होंने आरोप लगाया कि 2014 के बाद से चुनावों में लगातार हार के बाद विपक्षी दल संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाने की कोशिश कर रहे हैं। यह पात्रा का राजनीतिक आरोप है।
‘मैं चुनाव आयोग की तरफ से प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं कर रहा’
SIR विवाद पर आयोग के बचाव में बोलते हुए पात्रा ने यह भी स्पष्ट किया कि वह चुनाव आयोग की ओर से प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह केवल आयोग की ओर से जारी प्रेस नोट का हवाला दे रहे हैं।
संबित पात्रा का बयान: “मैं चुनाव आयोग की तरफ से प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं कर रहा, लेकिन चुनाव आयोग की तरफ से जारी प्रेस नोट लाया हूं।”
पात्रा ने कहा कि तीनों चुनाव आयुक्तों के बीच बातचीत और विचारों का आदान-प्रदान होना स्वाभाविक है। उनके मुताबिक अगर चुनाव आयुक्त आपस में चर्चा न करें और हर मुद्दे पर एक ही राय रखें, तो विपक्ष इसे अलग तरह से देख सकता है।
’14 बार हुई बातचीत, यह आधिकारिक विचार-विमर्श है’
चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों को लेकर सामने आई रिपोर्ट में दो चुनाव आयुक्तों की ओर से पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज किए जाने की बात कही गई है। रिपोर्ट में इन आपत्तियों को मतदाता सूची, नाम जोड़ने-हटाने, Form-6 और चुनावी डेटा से जुड़े मुद्दों से जोड़ा गया है।
इसी मुद्दे पर पात्रा ने कहा कि तीनों चुनाव आयुक्तों के बीच 14 मौकों पर पत्राचार हुआ। उनके मुताबिक इसे संस्थागत विचार-विमर्श के तौर पर देखा जाना चाहिए।
संबित पात्रा का बयान: “अब तीनों चुनाव आयुक्तों के बीच 14 मौकों पर पत्राचार हुआ है। यह तीनों चुनाव आयुक्तों के बीच आधिकारिक विचार-विमर्श है।”
उन्होंने आगे कहा कि इस तरह का विचार-विमर्श लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है।
‘अगर वोट चोरी हुई तो BJP सभी सीटें कैसे नहीं जीती?’
पात्रा ने पश्चिम बंगाल के चुनावी आंकड़ों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जिन 20 विधानसभा सीटों पर सबसे ज्यादा मतदाता नाम हटाए गए, उनमें 13 सीटों पर तृणमूल कांग्रेस और 6 सीटों पर BJP जीती।
BJP नेता ने इसी आंकड़े के आधार पर विपक्ष के ‘वोट चोरी’ के आरोप पर सवाल उठाया। यह उनके द्वारा प्रस्तुत राजनीतिक तर्क है, जिससे चुनावी प्रक्रिया में किसी कथित अनियमितता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं होती।
संबित पात्रा का बयान: “जिन 20 विधानसभा सीटों पर सबसे ज्यादा वोट कटे, उनमें 13 सीटें ममता बनर्जी जीतीं और बीजेपी सिर्फ 6 सीटें जीती। अगर वोट चोरी हुई, तो हम आधे से ज्यादा सीटें कैसे हार गए?”
चुनाव आयोग ने क्या कहा?
इस पूरे विवाद की शुरुआत उस रिपोर्ट के बाद हुई जिसमें दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग के कुछ फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज की थी।
चुनाव आयोग ने इस रिपोर्ट के बाद कहा कि सदस्यों की ओर से लिखित नोट, सुझाव, तकनीकी टिप्पणियां और सवाल उठाना उसकी सामान्य संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा है। आयोग के मुताबिक अलग-अलग राय किसी भी संस्था में विचार-विमर्श का सामान्य हिस्सा हैं। आयोग ने यह भी कहा कि SIR समेत पिछले एक साल में उसके सभी फैसले पूर्ण आयोग के स्तर पर सर्वसम्मति से लिए गए।
SIR को लेकर क्यों बढ़ा विवाद?
SIR के दौरान मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और बहाल करने की प्रक्रिया को लेकर पहले से राजनीतिक बहस चल रही है। इसी बीच आयोग के भीतर कथित आपत्तियों की रिपोर्ट सामने आने के बाद विपक्ष ने CEC ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
BJP ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए आयोग के भीतर हुई चर्चा को संस्थागत प्रक्रिया बताया है। वहीं चुनाव आयोग का कहना है कि आंतरिक सुझाव और टिप्पणियां अंतिम निर्णय से पहले होने वाले सामान्य विचार-विमर्श का हिस्सा हैं।