अमेरिका की ओर से आठ बड़ी टेक्नोलॉजी और आईटी कंपनियों को स्थायी श्रम प्रमाणन कार्यक्रम (PERM) से निलंबित किए जाने के बीच एक अहम बात सामने आयी है. भारतीय आईटी कंपनियों ने 2026 में ग्रीन कार्ड के लिए पहले के मुकाबले काफी कम आवेदन किए हैं. ऐसे में शुरुआती आकलन के मुताबिक, इस कार्रवाई का कंपनियों के कामकाज पर तत्काल प्रभाव सीमित रह सकता है. हालांकि, इन कंपनियों में काम करने वाले विदेशी कर्मचारियों के स्थायी निवास की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है.
अमेरिकी प्रशासन ने 8 अक्टूबर को टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), इन्फोसिस, विप्रो, एचसीएल टेक, कॉग्निजेंट, कैपजेमिनी, माइक्रोसॉफ्ट और एडोबी को PERM कार्यक्रम से निलंबित करने की घोषणा की थी. अमेरिकी अधिकारियों ने आरोप लगाया कि विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने की प्रक्रिया का दुरुपयोग हुआ और इससे अमेरिकी नागरिकों के रोजगार के अवसर प्रभावित हो सकते हैं. हालांकि, कंपनियों के खिलाफ आरोपों और कार्रवाई के आधार से जुड़े विस्तृत निष्कर्ष सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं.
TCS के ग्रीन कार्ड आवेदनों में बड़ी गिरावट
PERM आवेदन के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज ने अमेरिकी वित्त वर्ष 2026 में ग्रीन कार्ड के लिए केवल दो आवेदन किए. इसके मुकाबले कंपनी ने 2025 में 513 और 2024 में 1,804 आवेदन किए थे. एचसीएल टेक ने 2026 में 59 आवेदन किए, जबकि 2025 में यह संख्या 323 थी. ये आंकड़े संकेत देते हैं कि अमेरिकी कार्रवाई से पहले ही कुछ भारतीय आईटी कंपनियों के PERM आवेदनों में तेज गिरावट आ चुकी थी.
विप्रो ने 2024 में 257 और 2025 में 523 आवेदन किए थे. उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 2024 में कंपनी के 169 आवेदन खारिज हुए, जबकि 88 आवेदन वापस ले लिए गए. वहीं, इन्फोसिस ने 2024 में PERM के तहत 87 आवेदन किए थे. कंपनी के 2025 और 2026 के आवेदन संबंधी आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं. इसलिए सभी कंपनियों के लिए एक जैसी तुलना करना फिलहाल संभव नहीं है.
PERM प्रमाणपत्रों में भारतीय आईटी कंपनियों की हिस्सेदारी 2% से कम
एचसीएल टेक के पूर्व सीईओ विनीत नायर ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि पिछले साल जारी किए गए 1,17,849 PERM प्रमाणपत्रों में भारतीय आईटी कंपनियों की हिस्सेदारी 1,400 से भी कम थी. उनके मुताबिक, यह कुल संख्या के दो प्रतिशत से भी कम है. उन्होंने इसी आधार पर कहा कि अमेरिकी कार्रवाई का कंपनियों पर प्रत्यक्ष असर शुरुआती अनुमान से कम हो सकता है. यह आकलन PERM प्रमाणपत्रों में भारतीय आईटी कंपनियों की हिस्सेदारी पर आधारित है, न कि प्रभावित कर्मचारियों की कुल संख्या पर.
कैपजेमिनी और कॉग्निजेंट के आवेदन भी चर्चा में
PERM Tracker वेबसाइट के आंकड़ों के अनुसार, कैपजेमिनी ने 2026 में 98 आवेदन किए, जबकि 2025 में 361 और 2024 में 300 आवेदन किए थे. कॉग्निजेंट ने 2024 में 1,236 आवेदन किए थे. कंपनी के 2025 और 2026 के आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं. इन आंकड़ों से पता चलता है कि कंपनियों के आवेदन का स्तर अलग-अलग रहा है और सभी के लिए एक समान रुझान मानना सही नहीं होगा.
क्या है PERM और ग्रीन कार्ड से इसका संबंध?
PERM यानी स्थायी श्रम प्रमाणन अमेरिका में रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण शुरुआती चरण है. इसके तहत नियोक्ता को यह साबित करना होता है कि संबंधित पद के लिए योग्य अमेरिकी कर्मचारी उपलब्ध नहीं है या विदेशी कर्मचारी की नियुक्ति निर्धारित श्रम नियमों के अनुरूप है. इसके बाद रोजगार आधारित स्थायी निवास की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है.
PERM प्रक्रिया पर रोक का मतलब यह नहीं है कि प्रभावित कंपनियों में काम करने वाले सभी कर्मचारियों के मौजूदा वीजा या ग्रीन कार्ड अपने आप रद्द हो गए हैं. हालांकि, जिन कर्मचारियों की स्थायी निवास प्रक्रिया इस चरण पर निर्भर है, उनके लिए आगे की प्रक्रिया में अनिश्चितता बढ़ सकती है.
कुल मिलाकर, उपलब्ध आंकड़े बताते हैं कि भारतीय आईटी कंपनियों के PERM आवेदनों में गिरावट अमेरिकी कार्रवाई से पहले ही दिखाई दे रही थी. इससे कंपनियों के तत्काल कामकाज पर असर सीमित रहने की संभावना जताई जा रही है, लेकिन प्रभावित कर्मचारियों की ग्रीन कार्ड प्रक्रिया पर पड़ने वाले असर का आकलन अलग से करना होगा.