मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जारी विवाद के बीच वरिष्ठ वकील और भारत के पूर्व सॉलिसिटर जनरल हरीश साल्वे के बयान ने राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है. साल्वे ने दावा किया कि देश में चल रहे कुछ विरोध-प्रदर्शनों को विदेशी फंडिंग मिल सकती है और इनके पीछे बाहरी ताकतों की भूमिका होने की आशंका है. उन्होंने नेपाल, श्रीलंका और बांग्लादेश में हुई राजनीतिक उथल-पुथल का जिक्र करते हुए भारत में भी इसी तरह का माहौल बनाने की कोशिश किए जाने की बात कही.
‘नेपाल, श्रीलंका और बांग्लादेश में क्या हुआ, इस पर सवाल उठने चाहिए’
SIR और चुनाव आयोग के खिलाफ हो रहे प्रदर्शनों पर टिप्पणी करते हुए हरीश साल्वे ने विरोध-प्रदर्शनों के लिए धन जुटाने के स्रोतों पर सवाल उठाए. उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ समूह सरकार के कामकाज और देश की प्रगति में बाधा डालने की कोशिश कर रहे हैं. साल्वे ने नेपाल, श्रीलंका और बांग्लादेश में हुई राजनीतिक घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके पीछे बाहरी ताकतों की भूमिका पर सवाल उठाए जाने चाहिए. उन्होंने आशंका जताई कि भारत में भी कुछ लोग इसी तरह के घटनाक्रम को दोहराने की कोशिश कर सकते हैं.
‘कुछ समूह भारत को आगे बढ़ने से रोकना चाहते हैं’
हरीश साल्वे ने पिछले छह से आठ महीनों की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि एक ओर सरकार होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े संकट, आर्थिक विकास, तकनीकी प्रगति और भारत की सैटेलाइट क्षमताओं को मजबूत करने जैसे मुद्दों पर काम कर रही है, वहीं दूसरी ओर कुछ समूह कथित तौर पर इन प्रयासों में बाधा डालने की कोशिश कर रहे हैं. उनके बयान का केंद्र यह आरोप रहा कि विरोध-प्रदर्शनों के पीछे केवल सार्वजनिक असंतोष ही नहीं, बल्कि अन्य हित भी हो सकते हैं.
‘मैं इसे लोगों का आंदोलन नहीं मानता’
SIR और चुनाव आयोग के खिलाफ जारी विरोध-प्रदर्शनों पर साल्वे ने कहा कि वह इसे लोगों का आंदोलन नहीं मानते. उन्होंने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर फैलने वाले संदेशों, यूट्यूब वीडियो और रील्स के जरिए कथित तौर पर गलत जानकारी तथा विशेष नैरेटिव प्रसारित किए जाने पर भी चिंता जताई. साल्वे की टिप्पणियों के बाद विदेशी फंडिंग, डिजिटल माध्यमों पर सूचना के प्रसार और विरोध-प्रदर्शनों के उद्देश्य को लेकर बहस तेज हो सकती है.