नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है. ईरान की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य से भारतीय जहाजों की आवाजाही को लेकर विशेष छूट दिए जाने की बात कही गई है. ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के उपाध्यक्ष अहमद हयात-मोगाद्दम के मुताबिक, भारत के अलावा चीन, इराक और कतर को भी इस समुद्री मार्ग से गुजरने के लिए छूट दी गई है. यह घटनाक्रम भारत के लिए अहम माना जा रहा है, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है.
भारत को क्यों दी गई छूट?
ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के उपाध्यक्ष अमीर हयात-मोगद्दम ने इस फैसले के पीछे ईरान के आर्थिक हितों का हवाला दिया. उनके मुताबिक, भारतीय जहाजों को छूट देने का उद्देश्य भारत से दवाइयों का आयात आसान बनाना है.
उन्होंने चीन को दी गई छूट के पीछे बीजिंग से राजनीतिक समर्थन हासिल करने की मंशा बताई. हयात-मोगद्दम के बयान के अनुसार, भारत और चीन के जहाजों से ट्रांजिट शुल्क भी लिया जा रहा है, जबकि कतर के जहाजों को इस शुल्क से छूट दी गई है. यानी भारतीय जहाजों को आवाजाही में रियायत मिलने का मतलब यह नहीं है कि उन्हें पूरी तरह टोल-मुक्त रास्ता दिया गया है.
भारत के तेल और गैस आयात के लिए क्यों अहम है होर्मुज?
होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के बीच स्थित एक बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है. पश्चिम एशिया से दुनिया के कई देशों तक कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति इसी रास्ते से होती है.
भारत के लिए भी यह मार्ग काफी अहम है. रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के कुल कच्चे तेल आयात का लगभग 30 प्रतिशत फिलहाल होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर आता है. वहीं, भारत के करीब 90 प्रतिशत LPG आयात और कतर तथा UAE से आने वाली LNG की आधे से अधिक आपूर्ति भी इसी समुद्री मार्ग पर निर्भर है. ऐसे में यहां जहाजों की आवाजाही बाधित होने से भारत की ऊर्जा आपूर्ति और आयात लागत पर असर पड़ सकता है.
ईरान-अमेरिका के बीच फिर बढ़ सकता है तनाव
इस बीच ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम होने के संकेत अभी स्पष्ट नहीं हैं. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, कतर की मध्यस्थता से संभावित समझौते को लेकर ईरान के कुछ वरिष्ठ राजनीतिक नेता सैन्य नेतृत्व से बातचीत और कूटनीतिक रास्ते पर विचार करने की अपील कर रहे हैं.
हालांकि, ईरान के आंतरिक आकलन को लेकर सामने आई रिपोर्टों में अमेरिका के साथ फिर से सीधे सैन्य टकराव की आशंका भी जताई गई है. ऐसे हालात में होर्मुज जलडमरूमध्य से भारतीय जहाजों को दी गई कथित छूट भारत के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम है. लेकिन इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि समुद्री मार्ग पर सुरक्षा की स्थिति और जहाजों की आवाजाही कितनी सामान्य रहती है.


