वॉशिंगटन: अमेरिका के 2026 मिडटर्म चुनावों में राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप और उनकी रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है. चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी ने शानदार वापसी करते हुए अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों—हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट—में बहुमत हासिल कर लिया है. यह नतीजा ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है.
रिपब्लिकन पार्टी को उन राज्यों में भी हार का सामना करना पड़ा है, जिन्हें उसका मजबूत गढ़ माना जाता था. सीनेट की कई अहम सीटों पर डेमोक्रेट्स ने जीत दर्ज की, जबकि गवर्नर चुनावों में भी पार्टी ने चार राज्यों में रिपब्लिकन से सत्ता छीन ली. भारतीय-अमेरिकी उम्मीदवारों की जीत और विवेक रामास्वामी की हार भी इन चुनावों की चर्चा का अहम हिस्सा रही.
आइए जानते हैं अमेरिका के मिडटर्म चुनावों में हुए 10 बड़े राजनीतिक बदलावों के बारे में.
1. कांग्रेस के दोनों सदनों पर डेमोक्रेट्स का कब्जा
2026 के मिडटर्म चुनाव का सबसे बड़ा नतीजा यह रहा कि डेमोक्रेटिक पार्टी ने अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों में बहुमत हासिल कर लिया. सीनेट की 100 सीटों में डेमोक्रेट्स और उनके साथ गठबंधन करने वाले निर्दलीयों की संख्या 54 तक पहुंच गई, जबकि रिपब्लिकन 44 सीटों पर रहे। दो सीटों के नतीजे उस समय तक लंबित थे. हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में भी डेमोक्रेट्स ने बहुमत का आंकड़ा 218 पार कर लिया. शुरुआती नतीजों में पार्टी कम से कम 228 सीटों पर जीत दर्ज कर चुकी थी, जबकि कई सीटों पर मतगणना जारी थी. जनवरी 2027 में नई कांग्रेस के गठन के बाद डेमोक्रेटिक नेता हकीम जेफरीज़ के हाउस स्पीकर बनने की संभावना है। ऐसा होने पर वह इस पद पर पहुंचने वाले पहले अश्वेत नेता होंगे।
2. ‘ब्लू वेव’ ने रिपब्लिकन के मजबूत गढ़ों में लगाई सेंध
इन चुनावों में डेमोक्रेट्स की जीत इसलिए भी अहम है, क्योंकि पार्टी ने उन राज्यों में भी रिपब्लिकन उम्मीदवारों को हराया, जहां ट्रंप की पार्टी मजबूत मानी जाती थी. टेक्सास में डेमोक्रेट जेम्स टालारिको ने रिपब्लिकन केन पैक्सटन को हराकर सीनेट सीट पर कब्जा किया. कंसास में एडम हैमिल्टन ने रिपब्लिकन उम्मीदवार रोजर मार्शल को शिकस्त दी. आयोवा में जोश ट्यूरेक ने एश्ले हिंसन को हराकर सीनेट सीट डेमोक्रेट्स के खाते में डाली.
इसके अलावा मेन, ओहायो, नॉर्थ कैरोलिना और साउथ कैरोलिना जैसे राज्यों में भी डेमोक्रेट्स ने अहम जीत दर्ज की. इन नतीजों से साफ हुआ कि रिपब्लिकन पार्टी को इस बार अपने पारंपरिक समर्थक क्षेत्रों में भी चुनौती मिली.
3. ट्रंप के लिए चुनाव बना उनके कार्यकाल पर जनमत संग्रह
मिडटर्म चुनाव को राष्ट्रपति के कामकाज पर जनता की राय के तौर पर देखा जाता है. इस बार ट्रंप ने भी अपने समर्थकों से कहा था कि वे चुनाव को उनके कार्यकाल के प्रदर्शन से जोड़कर देखें. लेकिन नतीजे रिपब्लिकन पार्टी के पक्ष में नहीं आए. चुनाव के बाद ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा, ‘मैं बैलेट पर नहीं था और अगर होता तो हम भारी अंतर से जीतते.’
हालांकि, चुनावी नतीजों ने यह संकेत दिया कि राष्ट्रपति की लोकप्रियता और उनके राजनीतिक एजेंडे को लेकर मतदाताओं के बीच असंतोष बढ़ा है. एपी के मतदाता सर्वेक्षण में करीब 10 में से 6 मतदाताओं ने ट्रंप के राष्ट्रपति पद के प्रदर्शन पर असहमति जताई.
4. महंगाई और जीवनयापन की बढ़ती लागत बनी बड़ा मुद्दा
अमेरिकी मतदाताओं के लिए अर्थव्यवस्था और रोजमर्रा के खर्च चुनाव के सबसे अहम मुद्दों में शामिल रहे. महंगाई, घरेलू बजट, पेट्रोल-डीजल की कीमतें और जीवनयापन की बढ़ती लागत ने लोगों की चिंता बढ़ाई. ट्रंप प्रशासन की टैरिफ नीतियों और आयात लागत को लेकर भी उपभोक्ताओं तथा कारोबारियों के बीच सवाल उठे. डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों ने इन मुद्दों को चुनाव प्रचार में प्रमुखता से उठाया.
एपी के करीब 80 हजार मतदाताओं पर आधारित सर्वेक्षण के मुताबिक, लगभग 10 में से 4 मतदाताओं ने अर्थव्यवस्था को देश का सबसे बड़ा मुद्दा बताया. करीब आधे मतदाताओं ने कहा कि जीवनयापन की लागत ने उनके वोट को प्रभावित किया.
5. ईरान युद्ध और विदेश नीति का असर
ट्रंप ने सत्ता में वापसी के दौरान लंबे विदेशी सैन्य संघर्षों से अमेरिका को दूर रखने का वादा किया था. लेकिन ईरान के साथ बढ़ते सैन्य तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति ने उनकी विदेश नीति को चुनावी बहस के केंद्र में ला दिया. होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति का अहम समुद्री रास्ता है. यहां तनाव बढ़ने से ऊर्जा बाजार और तेल की कीमतों को लेकर चिंता बढ़ी. इसका असर अमेरिकी मतदाताओं की आर्थिक चिंताओं से भी जुड़ा.
चुनाव के बाद सामने आए सर्वेक्षणों में ईरान संघर्ष और विदेश नीति को भी मतदाताओं की चिंता के मुद्दों में शामिल किया गया. हालांकि, चुनावी नतीजों को केवल इसी एक मुद्दे का परिणाम मानना सही नहीं होगा.
6. युवा और हिस्पैनिक मतदाताओं का बदला रुख
2024 के राष्ट्रपति चुनाव में ट्रंप को समर्थन देने वाले कुछ अहम मतदाता समूहों में इस बार रिपब्लिकन पार्टी की पकड़ कमजोर होती दिखाई दी. एपी वोटर पोल के मुताबिक, 30 साल से कम उम्र के करीब 10 में से 7 मतदाताओं ने हाउस चुनाव में डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों का समर्थन किया. वहीं हिस्पैनिक मतदाताओं में भी डेमोक्रेट्स को बढ़त मिली और करीब 10 में से 6 ने डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों को वोट दिया.
टेक्सास के कुछ चुनावी क्षेत्रों में यह बदलाव खास तौर पर चर्चा में रहा. टेक्सास में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार बॉबी पुलिडो ने रिपब्लिकन सांसद मोनिका डी ला क्रूज़ को हराया. इसे हिस्पैनिक मतदाताओं के बीच डेमोक्रेट्स की बेहतर पकड़ के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है.
7. गवर्नर चुनावों में भी डेमोक्रेट्स की बड़ी जीत
डेमोक्रेटिक पार्टी की वापसी सिर्फ वॉशिंगटन तक सीमित नहीं रही. 36 राज्यों में हुए गवर्नर चुनावों में पार्टी ने चार ऐसे राज्य रिपब्लिकन से छीन लिए, जहां पहले रिपब्लिकन गवर्नर थे.
इनमें जॉर्जिया, ओहायो, टेक्सास और आयोवा शामिल हैं.
जॉर्जिया: डेमोक्रेट कीशा लांस बॉटम्स ने जीत दर्ज की. वह राज्य की पहली अश्वेत महिला गवर्नर बनीं. जॉर्जिया में 1998 के बाद पहली बार डेमोक्रेटिक पार्टी का गवर्नर चुना गया.
ओहायो: डेमोक्रेट एमी एक्टन ने ट्रंप समर्थित रिपब्लिकन उम्मीदवार विवेक रामास्वामी को हराया. इस जीत के साथ एक्टन राज्य की पहली महिला गवर्नर बनीं.
टेक्सास: जीना हिनोजोसा ने रिपब्लिकन गवर्नर ग्रेग एबॉट को हराकर बड़ा उलटफेर किया.
आयोवा: रॉब सैंड ने जीत दर्ज कर राज्य में रिपब्लिकन पार्टी के लंबे राजनीतिक दबदबे को चुनौती दी.
8. भारतीय-अमेरिकी उम्मीदवारों की जीत और रामास्वामी की हार
2026 के मिडटर्म चुनाव भारतीय-अमेरिकी उम्मीदवारों के लिहाज से भी अहम रहे. कई नेताओं ने कांग्रेस और राज्य स्तर के चुनावों में जीत दर्ज की. फ्लोरिडा के 22वें कांग्रेसनल जिले से डेमोक्रेट पिया डांडिया ने रिपब्लिकन केसी असकर को हराया. वर्जीनिया के 10वें जिले से सुहास सुब्रमण्यम दोबारा चुने गए. मैरीलैंड की लेफ्टिनेंट गवर्नर अरुणा मिलर ने भी गवर्नर वेस मूर के साथ अपना पद बरकरार रखा. इसके अलावा रो खन्ना, अमी बेरा और प्रमिला जयपाल ने भी अपनी-अपनी सीटों पर जीत हासिल की. वहीं, भारतीय मूल के रिपब्लिकन नेता विवेक रामास्वामी को ओहायो के गवर्नर चुनाव में हार का सामना करना पड़ा. डेमोक्रेट एमी एक्टन ने उन्हें शिकस्त दी। यह चुनाव के सबसे चर्चित मुकाबलों में से एक रहा.
9. व्हाइट हाउस और कैपिटल हिल के बीच बढ़ेगा टकराव
कांग्रेस के दोनों सदनों पर डेमोक्रेट्स के नियंत्रण के बाद ट्रंप प्रशासन के लिए अगले दो साल आसान नहीं रहने वाले हैं. अब राष्ट्रपति को अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए विपक्ष के साथ सहमति बनानी होगी. डेमोक्रेट्स को कांग्रेस की समितियों के जरिए प्रशासन के कामकाज की जांच करने, सुनवाई बुलाने और समन जारी करने की ताकत मिलेगी. ईरान नीति, सरकारी खर्च, प्रशासनिक फैसलों और नियुक्तियों पर विपक्ष की निगरानी बढ़ सकती है.
दूसरी ओर, ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर ‘VETO’ लिखी लाल टोपी की तस्वीर साझा की. इसे इस संकेत के तौर पर देखा गया कि वह कांग्रेस से टकराव की स्थिति में राष्ट्रपति के वीटो अधिकार का इस्तेमाल कर सकते हैं.
10. 2028 के राष्ट्रपति चुनाव की तैयारी शुरू
2026 के मिडटर्म चुनावों ने 2028 के राष्ट्रपति चुनाव की राजनीति को भी प्रभावित किया है. रिपब्लिकन पार्टी के भीतर अब ट्रंप के नेतृत्व, उनके राजनीतिक प्रभाव और उनके बाद पार्टी की दिशा को लेकर चर्चा तेज हो सकती है. वहीं डेमोक्रेटिक पार्टी को कांग्रेस में मिली जीत से नए नेताओं और गवर्नरों को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान मजबूत करने का मौका मिलेगा. जॉर्जिया, टेक्सास, ओहायो और आयोवा में मिली जीत के बाद पार्टी के संभावित राष्ट्रपति उम्मीदवारों की चर्चा भी तेज हो सकती है.
कुल मिलाकर, 2026 के मिडटर्म चुनाव ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के लिए एक बड़ी राजनीतिक परीक्षा साबित हुए. डेमोक्रेट्स ने कांग्रेस के दोनों सदनों में बहुमत हासिल कर रिपब्लिकन पार्टी की सत्ता पर पकड़ कमजोर कर दी है. अब अगले दो साल अमेरिकी राजनीति में व्हाइट हाउस और कांग्रेस के बीच कड़े मुकाबले के रहने की संभावना है.


